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मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनना लगभग तय

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इस बात को स्वीकार किया है कि जम्मू कश्मीर में अगली सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर गठित होने जा रही है। इसके लिए सही बातचीत की जरूरत है, जो ज्यादा लंबी नहीं चलेगी। सरकार बनने का ऐलान जल्द हो सकता है।

पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अगर सरकार बनती है तो भाजपा और पीडीपी के बीच सीट बंटवारे की व्यवस्था है। अगर सब ठीक जाता है तो दोनों पार्टी के बीच एक सहज बातचीत है और आम सहमति से ही ऐसा होगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार गठन को लेकर भाजपा और पीडीपी के बीच लगभग सहमति बन चुकी है। दोनों दलों के सूत्रों का कहना है कि इसकी घोषणा जल्द की जाएगी। हालांकि राज्य में राज्यसभा चुनाव व दिल्ली विधानसभा चुनाव के कारण फिलहाल दोनों पार्टियां बच रही हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बार-बार मीडिया से कह चुके हैं, जम्मू कश्मीर में भाजपा की हिस्सेदारी वाली सरकार गठन पर वार्ता जारी है। वहीं, पीडीपी खुले तौर पर तो नहीं लेकिन संकेतों में मीडिया को बताती रही है कि सरकार गठन पर उसकी भाजपा से वार्ता चल रही है।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा अब यह जिद लगभग छोड़ चुकी है कि राज्य के मुख्यमंत्री का पद तीन-तीन वर्ष के लिए दोनों पार्टियों के बीच बांटा जाए। सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियों के सहमति फार्मूले के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद 6 साल तक के लिए पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मुहम्मद सईद संभालेंगे। संभव है कि इस व्यवस्था में भाजपा को उपमुख्यमंत्री का पद मिले और उसके दो लोगों को पीडीपी के सहयोग से राज्यसभा में भेज दिया जाए।

अगले महीने जम्मू कश्मीर की चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव भी होना है, जिसके लिए नामांकन की आज आखिरी तारीख है। इसमें भाजपा ने शमशेर मन्हास व चंद्रमोहन शर्मा को राज्यसभा चुनाव के लिए जम्मू कश्मीर से उम्मीदवार घोषित किया है।

मंगलवार को सरकार गठन के मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस की भाजपा और पीडीपी से बढ़ी दूरी का पता उस समय भी चला, जब मीडिया में यह खबर आई कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा भेजने के लिए नेशनल कान्फ्रेंस उन्हें सहयोग करेगी। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 28 जनवरी ही है।

सरकार न बनने की स्थिति में 9 जनवरी से राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया। जम्मू कश्मीर संविधान की धारा 92 के तहत छह माह के लिए राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया। राज्य में नवंबर और दिसंबर, 2014 में कुल पांच चरणों में चुनाव हुए थे और परिणाम 23 दिसंबर, 2014 को घोषित किए गए थे। उसके बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी की हार के बाद 24 दिसंबर, 2014 को इस्तीफा दे दिया था।

जम्मू कश्मीर में 87 विधानसभा सीटों के लिए दिसंबर में हुए चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिससे यहां सरकार गठन को लेकर संकट खड़ा हो गया है। चुनाव में पीडीपी 28 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। इसके बाद भाजपा 25 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही। नेशनल कांफ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती हैं!

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