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जम्मू कश्मीर में गवर्नर रूल

जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक संकट पैदा हो जाने की स्थिति में राज्य एक बार फिर राज्यपाल शासन लागू के हवाले हो गया है। राज्य को गवर्नर रूल के तहत लाने का यह कदम राज्यपाल एनएन वोहरा को इसलिए उठाना पड़ा, क्योंकि राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने से इनकार कर चुके हैं। दूसरी तरफ, चुनाव नतीजे आने के लगभग 15 बीत जाने के बाद भी कोई भी राजनीतिक दल राज्य में नई सरकार का गठन नहीं कर पाया था।
19 जनवरी तक ही थी मोहलत
जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का गठन 19 जनवरी से पहले किया जाना जरूरी था। इसी दिन मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। तब तक नई सरकार का गठन नहीं होने की स्थिति में राज्यपाल शासन लागू करने का फैसला लिया गया। लेकिन उमर अब्दुल्ला के फैसले के चलते राज्यपाल शासन को पहले ही लागू किया जा रहा है। राज्य का अपना अलग संविधान होने के कारण यहां सीधे राष्ट्रपति शासन लागू नहीं होता, बल्कि पहले छह महीने राज्यपाल का शासन लागू होता है और उसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है।
उमर के दांव से आया नया मोड़
जम्मू-कश्मीर में पिछले 15 दिन से जारी राजनीतिक गतिरोध ने गुरुवार को उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया, जब उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में राज्यपाल से मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद से हटने का निर्णय लिया और दलील दी कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार जारी गोलाबारी और सीमा पर बने हालात से निबटने के लिए राज्य को कार्यवाहक नहीं, बल्कि पूर्णकालिक मुख्यमंत्री की जरूरत है। उमर ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद से हटने की अपनी मंशा राज्यपाल को बता दी। उमर अपने बीमार पिता फारुख अब्दुल्ला को देखने के लिए लंदन गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने 23 दिसंबर को आए चुनाव नतीजों के बाद अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिली हार के बाद 24 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम देखने को कहा गया था। विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्‍फ्रेंस को महज 15 सीटें मिली थीं। 87 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई, जबकि भाजपा को 25 सीटें मिलीं।
नई सरकार पर गतिरोध बरकरार
चुनाव नतीजों के बाद राज्य में आए खंडित जनादेश के बीच सरकार गठन के लिए बीजेपी ने नेकां एवं पीडीपी दोनों से संपर्क बनाए रखा है, लेकिन गतिरोध खत्म होने को लेकर कोई नतीजा फिलहाल सामने आता दिखाई नहीं दे रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी के साथ जाने से पहले ही इनकार कर दिया है, वहीं पीडीपी को बीजेपी के साथ हाथ मिलाने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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