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मोदीजी,अच्छे दिन कहाँ , 58 दिन में 135 किसानों ने की खुदकुशी

पीएम नरेंद्र मोदी रविवार को जब किसानों से ‘मन की बात’ करेंगे, तो शायद उनके जेहन में महाराष्ट्र में दिन-ब-दिन हो रही उम्मीदों की मौत का आंकड़ा भी होगा। एक तरफ लैंड बिल और दूसरी तरफ प्रकृति की मार झेल रहे किसानों की खुदकुशी का एक और आंकड़ा सामने आ गया है।
यह जानकारी किसी और ने नहीं बल्कि राज्यसभा में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री मोहनभाई कुंदरिया ने एक सवाल का जवाब देते हुए दी।

 उन्होंने लिखित जवाब में सदन को बताया कि पिछले तीन साल में (वर्ष 2012, 2013, 2014) में ऐसे 662 किसानों ने आत्महत्या की, जो सरकारी नीति के मुताबिक एक लाख रुपये के मुआवजे के हकदार थे। उन्होंने बताया कि आत्महत्या की वजह प्राकृतिक आपादा और किसानों की वीभत्स हालत थी।

एक और सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नैशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2012 में किसानी के जरिए जीवीका चला रहे 13,754 और वर्ष 2013 में 11,772 लोगों ने आत्महत्या की।

कुंदरिया ने बताया, ‘महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक 1 जनवरी, 2015 से 27 फरवरी, 2015 के बीच औरंगाबाद क्षेत्र के 135 किसानों ने आत्महत्या की। इसकी वजह प्राकृतिक आपदा और उनकी तंग आर्थिक हालत रही।’

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने यह भी बताया है कि गांव स्तर पर किसानों ने लिए चलाई जा रही सरकार की लाभकारी योजनाओं के बारे में अधिकारियों के जरिए अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।

 

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