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 चौथे चरण में 63% मतदान, फतेहपुर में एक व्यक्ति की हत्या

 लखनऊ ! उत्तरप्रदेश में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के लिए वोट डाले गए जिसमे करीब ६३% मतदाताओं ने मतदान किया । 12 जिलों की 53 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई । 53 विधानसभा सीटों में 680 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई ।

यूपी में चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीटों पर गुरुवार को हुई वोटिंग  में इवीएम में कैद हुए ६८० प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तो ११ मार्च को ही होगा लेकिन इस चरण में कई महारथियों के भी प्रतिष्ठा दाँव पर लग गयी है पिछली बार सर्वाधिक सीटें जीतने वाली सपा के साथ ही रायबरेली में चुनाव होने के कारण कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बुंदेलखंड के जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट के अलावा रायबरेली, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद और फतेहपुर में  यदि पिछले चुनावों की समीक्षा की जाये तो  ऐसा लगता है की इस चरण में वही दल या उम्मीदवार जीत हासिल करता है जो पिछड़ी जाति के वोटरों को साध पाता है। हालांकि ब्राह्राण वोटरों की संख्या भी अच्छी खासी है। पिछड़ों में अत्यन्त पिछड़े निषाद, मल्लाह, केवट, राजभर, कुम्हार, बिन्द, धीवर, कहार, गोड़िया, मांझी आदि जातियों की निर्णायक संख्या हैं और इन जातियों का झुकाव जिस दल की ओर होता है वह सबसे आगे निकल जाता है।
हमीरपुर जिले के सदर सीट पर निषादों के साथ कुशवाहा, पाल जैसी पिछड़ी जातियां हार-जीत तय करती हैं  वहीं राठ विधानसभा (सुरक्षित) सीट पर लोधी मतदाता सर्वाधिक है। चित्रकूट में जातीय समीकरण पर नजर डाली जाए तो यहां करीब 80 हजार दलित वोटर हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, कुर्मी, यादव, वैश्य, मुस्लिमों की संख्या भी अच्छी खासी है।जालौन में सवर्ण वोटरों की संख्या अधिक है, लेकिन पिछड़ी जातियां ही जीत-हार तय करती हैं।

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