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सरकारी बैंक नियम कानून को किये किनारे प्राइवेट बैंकों से फिर भी जनता को कुछ राहत

रिपोर्ट-रहीम उल्ला खान
अमेठी,जगदीशपुर  जन जागरण मीडिया मंच टीम द्वारा  ज़िले की इलाकाई  ग्राउन्ड़  रिपोर्ट के मुताबिक नोट बंदी के मामले मे सरकारी बैंकों की घोर लापरवाही व भृष्टाचार पूर्ण रवैये के चलते  मोदी सरकार की विमुद्रीकरण की योजना पर   पानी फिरता नज़र आ रहा है ।एक ओर जहाँ प्राइवेट बैंक  एच. डी.एफ. सी, इंडस्इंड, आई.सी.आई.सी.आई आदि बैंको के कर्मचारियो को लगन व जोश से काम करते हुए देखा गया  वही दूसरी तरफ सरकारी बैंकों  के कर्मचारियों को मनमानी से जनता के साथ शौतेला व्यवहार  अपनाए जाने व ख़ास लोगों की हिमायत करने से जनता में भारे आक्रोश देखने को मिला  ।यू तो 8 नवम्बर मध्य रात्रि से प्रधान मंत्री मोदी द्वारा किये गए नोट बंदी के ऐलान से  सारे देश वासियों मे काले धन के सफाये को लेकर खुशियां थी लेकिन  सरकारी बैंकों के कुछ भ्रस्ट कर्मचारियों की काली करतूतों से पूरे देश वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
वही पर राहुल ग़ांधी के दिल का टुकड़ा कहा जाने वाला जिला जिसे हम अमेठी के नाम से जानते है और  उसकी कथिक  राजधानी कहे जाने वाला  जगदीशपुर मे कुछ इस तरह से जनता को दिन भर बैंको मे लाइन में खड़े होकर शाम को मायूस होकर अपने घरों को खाली हाथ लौटने को मजबूर होना पड़ता है।आइये देखिये अमेठी के जगदीशपुर क्षेत्र की नोट बंदी के बाद की बैंको की कार्यगुजारी ।एक ओर जहाँ  जगदीशपुर एच. डी.एफ. सी बैंक के मैनेजर -यश मेहरोत्रा व  बैकअप मैनेजर- आदित्य मिश्रा,कैशियर- शोएब अख्तर आदि स्टाफ के साथ ए. टी.एम से लेकर कैश काउंटर तक सँभालते हुए परेशान जनता को राहत देते दिखे  वहीं दूसरी तरफ इंडसइंड बैंक के मैनेजर -राजीव गुप्ता व इरफ़ान मेंहदी अपने स्टाफ के साथ भी ईमानदारी व मेहनत के साथ काम संभालते हुए जनता को खुश रखने में पीछे नही हैं मालूम हो की   नोट बंदी के ऐलान के बाद करंट अकाउंट से 50,000 प्रति सप्ताह और सेविंग अकाउंट से 24,000प्रति सप्ताह मांग के हिसाब से पैसे दिए जाने की बात कही गयी थी किन्तु  सरकारी बैंकों में जैसे एस. बी.आई, बी.ओ.बी,पी.एन.बी और सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया जैसे बैंको में जनता के साथ शौतेला व्यवहार शुरू से ही अपनाया जाने लगा ,बैंको व ए. टी.एम की लाइन में खड़े  जनता के बयान के मुताबिक बैंको के मैनेजर अपने करीबियों व दोस्तों और दबंगों को तो मानक के हिसाब से रुपये देते  रहे और निरीह  ग्रामीण जनता को 2 हजार और 4 हजार से ज़्यादा नहीं दिया उन्हें यह बताया जाता रहा की बैंक में कैश कम है जिसके चलते थोड़ी राशी ही दी जा सकती है सरकारी बैंकों के मनमानी रवैये से बहुत से ग्रामीण तो दिन भर कतार में खड़े रहकर भी पैसा नहीं प् पाए उन्हें पैसा ख़त्म हो जाने की बात कहकर बैरंग वापस क्र दिया गया यदि किसी ने सवाल किया तो जबाब में बैंक  मैनेजर यह तक कहने में कोई गुरेज़ नहीं किये की  मोदी सरकार रुपये भेजने में असमर्थ है, सवाल यह उठता है की अगर सरकारी बैंक कर्मियों का यही रवैया कायम रहा तो आने वाले 2017 के चुनाव में बी जे पी को करारा झटका लग सकता है और प्रधान मंत्री मोदी के सरे किये दिये पर जनता का फैसला भारी पद सकता है !

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