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आनंदपाल गैंग ऐसे हथियाता था  नई-नवेली लक्ज़री कारें

श्यामवीर सिंह जादौन/ जयपुर।

पांच लाख के इनामी गैंगस्टर आनंदपाल के गिरोह का एक और कारनामा सामने आया है। गुर्गों के लिए आनंदपाल के एक राजदार ने 2014 में वैशालीनगर के एक कॉल सेंटर संचालक के नाम पर चूरू से तीन लग्जरी कारें खरीदी थीं। इनमें से एक कार जवाहर सर्किल थाने में लावारिस जब्ती में खड़ी है।

पुलिस के अनुसार पिलानी (झुंझुनूं) निवासी कॉल सेंटर संचालक कुनाल कुमावत यहां वैशालीनगर के हनुमाननगर में रहता है। उसने गत 13 सितंबर को वैशाली थाने में विभव के. सिंधु और भरत शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। उसका आरोप है कि दोनों ने षड्यंत्र रचकर उससे दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए और विभिन्न बैंकों से 12 लाख का फाइनेंस कराकर चूरू से तीन लग्जरी कारें खरीदीं। इन्हें अवैध कारोबार में इस्तेमाल किया गया।

बैंक में किस्तें समय पर जमा नहीं हुआ और उसे नोटिस मिला तब माजरा उसके सामने आया। इसके बाद जवाहर सर्किल क्षेत्र में एक कार लावारिस मिली तो खेल का खुलासा हुआ। अब एसओजी और एटीएस की मॉनीटरिंग में वैशाली पुलिस छानबीन में जुटी है। दोनों कारें अभी कौन चला रहा है, इसका पता नहीं चल पाया है।

पार्टनर निकला राजदार 

कुनाल ने पुलिस को बताया कि 2011 में पाली मूल के विभव के. सिंधु से कॉल सेंटर को लेकर सम्पर्क हुआ था। विभव तब बनीपार्क में रहता था। दोनों ने साझेदारी में कॉल सेंटर खोला। एक दिन उसके पीछे विभव ऑफिस आकर एग्रीमेंट सहित तमाम दस्तावेज ले गया। घाटा होने पर उसने यह हरकत की, फिर दोनों के बीच कई माह तक फोन पर लेन-देन को लेकर बात हुई।

वर्ष 2014 में विभव ने इंटरनेट कॉल कर घाटे के 60 से 70 लाख रुपए लौटाने का आश्वासन दिया और उसके पास भरत शर्मा नामक व्यक्ति को भेजा। पुलिस की प्रारंभिक छानबीन में खुलासा हुआ है कि विभव और भरत दोनों ही आनंदपाल के खास राजदार हैं।

यूं बनाया शिकार 

भरत अगले दिन कुनाल के कॉल सेंटर पर आया और कहा कि उसे डाउन पैमेंट भी नहीं देना होगा, लाखों की कमाई भी करा देगा। जरूरी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराकर वह उसके नाम से बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर तीन कारें खरीदेगा। उन्हें बाड़मेर में एक तेल कम्पनी में किराए पर लगा देगा। एक कार से उसे 45 से 50 हजार रुपए किराया मिलेगा। लेकिन, उसे न तो किराया मिला, न तेल कम्पनी में कारें लगाई गई।

अनुसंधान में खुलासा 

‘परिवादी के नाम से फाइनेंस कराकर तीन कारें चूरू से खरीदी गई थीं। यह काम आनंदपाल, राजू ठेहट या अन्य गिरोह के होने की आशंका है। इसे लेकर पड़ताल की जा रही है।’  -अशोक गुप्ता, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम)! साभार राजस्थान पत्रिका 

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