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भारत में इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलने वाले इंजीनियर स्तरीय नहीं 

 मेट्रो मैन के नाम से मशहूर हुए ई श्रीधरन ने आज कहा कि देश में इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलने वाले इंजीनियर स्तरीय नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों से पढ़कर निकलने वाले अच्छे इंजीनियर विदेश जाने को तरजीह देते हैं।

श्रीधरन ने यहां एक कार्यक्रम में इंजीनियरों से अपील की कि देश में विभिन्न बुनियादी संरचना परियोजनाओं के लिए एक अलग सोच, मानदंड और मिशन अपनाया जाना चाहिए जिनके लिए प्रधानमंत्री ने पांच हजार अरब रुपए का लक्ष्य तय किया है। पद्म विभूषण से सम्मानित श्रीधरन को कोंकण रेल और दिल्ली मेट्रो जैसी चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने का श्रेय दिया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हमारे देश के इंजीनियरिंग कॉलेज या संस्थानों से बहुत स्तरीय इंजीनियर नहीं निकल रहे।’’ वह इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के प्रदेश चैप्टर द्वारा ‘इंजीनियरों का व्यावसायिक आचरण और भूमिका’ विषय पर यू एन महिदा स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। श्रीधरन ने एक पत्रिका के अध्ययन का जिक्र किया जिसमें करीब 300 इंजीनियरिंग कॉलेजों का सर्वेक्षण किया गया और निष्कर्ष निकाला गया कि केवल 29 प्रतिशत इंजीनियर एेसे हैं जो रोजगार लायक हैं, वहीं 30 प्रतिशत को आगे और अध्ययन के बाद रोजगार योग्य बनाया जा सकता है। वहीं 48 प्रतिशत सीधे तौर पर रोजगार के लायक नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में शिक्षा का यह स्तर है। क्या यह पर्याप्त है? इंजीनियरिंग के पेशे में ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण होता है। आपको सिद्धहस्त बनना होगा। ज्ञान व्यावहारिक होना चाहिए।’’ श्रीधरन ने कहा कि एक तरफ जहां अधिकतर इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले इंजीनियर स्तरीय नहीं हैं वहीं जो सबसे अच्छे इंजीनियर हैं या जो आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों से निकलते हैं वे बेहतर अवसरों के लिए देश छोड़कर विदेश चले जाते हैं।

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