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प्रियंका गांधी की सक्रियता सुन विपक्षियो में खलबली

लखनऊ।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी वाड्रा के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलों पर कांग्रेसी ही नहीं विपक्ष की भी निगाहें लगी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा के होने वाले चुनाव को देखते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रियंका गांधी को चुनाव अभियान की कमान सौंपने की लगातार मांग की जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब कांग्रेस की नैया प्रियंका गांधी ही पार लगा सकती हैं। उन्हें ‘चेहरा’ बनाने का सुझाव चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) भी दे चुके हैं। सुनने में आ रहा है की प्रियंका ने इसके लिए हामी भी भर दी है और उनकी हामी की खबर सुनते ही विपक्षी दलों में खलबली भी मच गयी है !
पार्टी मामलों के प्रदेश प्रभारी गुलाम नवी आजाद ने इस बार उनके रायबरेली और अमेठी से बाहर भी चुनाव प्रचार करने के संकेत दिये हैं लेकिन उन्होने इस बारे मे ज्यादा कुछ कहने से इन्कार कर दिया था। कार्यकर्ता तो उन्हें हर हाल में सक्रिय देखना चाहता है। लखनऊ समेत कई शहरों में ‘एक सुर हर कांग्रेस जन का, नेतृत्व करो बहन प्रियंका । गुण्डों का चहुंओर डंका, उत्तर प्रदेश को बचाओ बहन प्रियंका’ जैसे नारे लिखे देखे जा सकते हैं।
कांग्रेस की वापसी के लिए प्रियंका जरुरी
बैनर लगाने वाले एक कार्यकर्ता का कहना है कि सूबे में 27 वर्ष से सत्ता से बाहर कांग्रेस की वापसी के लिए प्रियंका को सक्रिय राजनीति में आना ही होगा। उसने कहा, ‘अब समय आ गया है कि प्रियंका गांधी वाड्रा अमेठी और रायबरेली से बाहर निकलें और पूरे राज्य में प्रचार अभियान की कमान संभाले।’ कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर(पीके) ने भी हाईकमान को प्रियंका गांधी को राज्य विधानसभा चुनाव में आगे करने के कई बार सुझाव दिये। प्रशान्त किशोर ने राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए रणनीति बनाने की जिम्मेदारी संभाल रखी है। इसके लिए वह यहां कई बैठकें कर चुके हैं। बैठकों का यह सिलसिला बदस्तूर चल भी रहा है। प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग राज्य के कई अन्य हिस्सों से भी उठती रही है। इलाहाबाद में श्रीश दुबे और उनके साथियों ने इस अभियान को समय-समय पर काफी तेज भी किया।
150 सीटों पर प्रचार का सुझाव
पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत इन्दिरा गांधी के पैतृक नगर इलाहाबाद के ऐतिहासिक आनन्द भवन के आस-पास और सिविल लाइन्स चौराहे पर प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में आने की अपील वाले बैनर अक्सर दिख जाते हैं। आनन्द भवन को इन्दिरा गांधी के दादा और देश के पहले प्रधानमंत्री प़ं जवाहर लाल नेहरु ने बनवाया था। आनन्द भवन में स्वतंत्रता आन्दोलन के कांग्रेस नेताओं की बैठकें हुआ करती थीं। कांग्रेस के बडे-बडे नेता वहां ठहरते भी थे। महात्मा गांधी भी वहां कई बार गये हैं। चुनाव नजदीक आ रहे है लेकिन पार्टी में अभी भी राज्य में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है । चुनाव रणनीतिकार पीके और उनकी टीम उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की रणनीति तय करने के लिये गांधी परिवार के गढ अमेठी और रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर भी गयी थी लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओ में उदासी छंट नही रही है । सूत्रों के अनुसार पीके ने सुझाव दिया है कि प्रियंका गांधी कुछ चुने हुए जिलों में भी विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार करें । रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रियंका गांधी विधानसभा चुनाव में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव प्रचार करें जहां से कांग्रेस प्रत्याशी जीत सके।
विपक्षियों की निगाह गड़ी
उधर, प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने को लेकर विपक्ष ने भी नजरें गड़ा रखी हैं । हालांकि विपक्ष प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने को लेकर बेफिक्र दिखाने की कोशिश कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि प्रियंका को राजनीति में लाने या नहीं लाने का निर्णय कांग्रेस का होगा इससे दूसरे दलों का कोई लेना देना नहीं है लेकिन यह तय है कि कांग्रेस की जो हालत है उससे तो यही लगता है कि अब कांग्रेस उबरने वाली नहीं है। वह मानते हैं कि प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने से हो सकता है कि अमेठी और रायबरेली में एक दो सीटें मिल जायें लेकिन उनके आने से बहुत बड़ा बदलाव होने नहीं जा रहा है।
सपा प्रवक्ता और राजनीतिक पेंशन मंत्री राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि प्रियंका के आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा फिर सरकार बनायेगी लेकिन वह बेबाकी से यह भी स्वीकार करते हैं कि प्रियंका गांधी यदि कांग्रेस का प्रचार अभियान संभालती है तो दूसरे दलों को कुछ सीटों पर अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है.

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