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अगस्ता वेस्टलैंड मामले में वसुंधरा राजे भी घेरे में

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की मोदी सरकार ने वसुंधरा राजे के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया, जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद कर जनता के 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान किया था।

नई दिल्ली!अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील पर कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कंपनी पर लगे बैन को मोदी सरकार ने हटा दिया। अपने सवालों में कांग्रेस ने बीजेपी के दो मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे और रमन सिंह पर भी आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की मोदी सरकार ने राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया, जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद कर जनता के 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान किया था।
दरअसल राज्य सरकार ने वीआईपी के लिए करीब 20 करोड़ की लागत में हेलिकॉप्टर खरीदा था। यह राजे सरकार के पिछले कार्यकाल का मामला है, तब 2005 में यह सौदा हुआ था। अब यह सौदा रक्षा मंत्रालय की जांच के घेरे में है। राज्य सरकार को लिखे पत्र में रक्षा मंत्रालय की ओर से अगस्ता ई-190 पावर हेलिकॉप्टर की खरीद संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। 31 मार्च 2008 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कैग की रिपोर्ट में इस सौदे को लेकर कई अनियमितताओं का जिक्र किया गया था।
क्या है अगस्ता वेस्टलैंड मामला आइये जानें ?
उसके अनुमान के मुताबिक इससे खजाने को करीब 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सीबीआई अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद के 3,600 करोड़ के मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच कर रही है।
राजे सरकार ने करीब 20 करोड़ रुपए में यह हेलिकॉप्टर खरीदा था, जो मुख्यत: मुख्यमंत्री, राज्यपाल जैसे वीआईपी के दौरों के लिए था, लेकिन यह हेलिकॉप्टर सजावटी हाथी ही साबित हुआ क्योंकि प्रशिक्षित पायलट के अभाव में यह खड़ा रहा एवं पहली बार 2007 में ही उड़ा।
राज्य सरकार ने इसके लिए कंपनी से अनुबंध किया था, जबकि देश में उस श्रेणी के हेलिकॉप्टर के लिए कोई प्रशिक्षित पायलट नहीं था। इस तरह जहां हेलिकॉप्टर की खरीद एवं रखरखाव पर काफी पैसा खर्च किया गया, वहीं पायलट न होने से दूसरे हेलिकॉप्टरों पर भी काफी खर्चा हुआ। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि हेलिकॉप्टर 29 जुलाई 2005 में दिल्ली पहुंचा और 22 सितंबर 2005 को जयपुर आया।
इसका कोई उपयोग नहीं हुआ, क्योंकि उड़ान के लिए आवश्यक प्रशिक्षण जनवरी 2006 में सिर्फ एक पायलट को दिया गया। जबकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार फर्म को दो पायलट को प्रशिक्षण देना था। इसके अलावा एक अतिरिक्त पायलट को प्रशिक्षण एवं तीन हफ्तों के लिए दो टेक्नीशियन को मैंटेेनेंस ट्रेनिंग देनी थी।

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