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असमायोजित शिक्षा मित्रों का धरना, हजारों की संख्या में प्रदेशभर से जुटे शिक्षामित्र

लखनऊ ! आदर्श शिक्षा सहायक वेलफेयर एशोसिएशन उत्तर प्रदेश के नेत्रत्व में लक्ष्मण मेला मैदान में समायोज़न से वंचित प्रदेश के करीब 14000 शिक्षा मित्रों के समयोज़न को लेकर तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया धरने में प्रदेश भर से हजारों की संख्या में जुटे शिक्षामित्रों को संबोधित करते हुए आदर्श शिक्षा सहायक वेलफेयर एशोसिएशन के पदाधिकारियों ने शीघ्र ही असमायोजित शिक्षामित्रों के समायोजन की मांग करते हुए मांग की तथा लम्बे समय तक असमायोजित शिक्षामित्रों का समायोजन न किये जाने से तमाम शिक्षामित्रों ने जिन्होंने आत्मदाह कर लिया उन आत्मदाह करने वालों के मृतक आश्रितों को योग्यता नुसार सरकारी सेवा दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी !
शिक्षामित्रों का कहना था की बुनियादी शिक्षा के मामले में सरकारों का रवैया किसी से अब छिपा नहीं है। केंद्र ने शिक्षा का अधिकार कानून तो लागू किया लेकिन इसके लिए संसाधन जुटाने की चुनौती से सरकारें आंख ही चुराती रही एक तरफ सरकारें शिक्षा के सर्वांगीण विकास के दावे करते रहीं सर्वशिक्षा अभियान के प्रचार प्रसार में करोड़ों का बज़ट खर्च करती रहीं वहीँ दूसरी तरफ शिक्षकों के खाली पद भरने की बात जब जब आई तो धन की कमी का राग अलापने में भी पीछे नहीं रहीं ,ज्यादातर राज्य सरकारों ने शिक्षा-मित्र, शिक्षाकर्मी, अतिथि शिक्षक आदि की तैनाती कर स्कूलों में शिक्षकों की तरह ही इनसे कार्य तो करवाया लेकिन शिक्षकों की तरह काम कर रहे इन शिक्षा मित्रों, अतिथि शिक्षकों को मात्र कुछ हज़ार का मानदेय ही दिया, स्थित यह हुई की इन शिक्षामित्रों की माली हालत चरमराती गयी दैनिक प्रयोग की वस्तुओं की महंगाई में इजाफा होता गया और इनका मानदेय दो हज़ार फिर ढाई हज़ार इसके बाद साढ़े तीन हज़ार तक सिमट कर रह गया. भविष्य में सरकारों द्वारा कुछ बेहतर किये जाने की आशा लिए ये आर्थिक तंगी से जूझते हुए भी अपने कार्य दायित्व का निर्वाह करते रहे जब इतने कम पैसों में इन्हें जीविका चलाना दुर्गम हो गया तो शिक्षामित्रों ने जगह जगह आन्दोलन शुरू कर दिए शिक्षामित्रों का कहना था की हम शिक्षकों की तरह ही जब सारा कार्य करते हैं तो फिर हमे मजदूरों से भी बदतर स्थित का सामना क्यों करना पड़ रहा है ?
बताते चलें की शिक्षामित्रों का आन्दोलन जब जोर पकड़ा तो सरकारों की आँखें खुली अन्य प्रान्तों की भांति उत्तर प्रदेश में भी इनके समयोज़न की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन अधिकारियों की लीपापोती के चलते जहाँ इनके समयोज़न प्रक्रिया में तमाम खामियां छोड़ दी गयी वहीँ करीब 14000 शिक्षामित्रों को समायोजित ही नहीं किया गया इस बीच सैकड़ों शिक्षा मित्रों ने सरकार के उदासीन रवैये के चलते व समयोज़न न हो पाने के कारण अपनी जीवन लीला भी समाप्त कर ली बढ़ती आत्महत्याओं की घटनाओं ने एक बार फिर केंद्र व राज्यसरकारों की आँखे खोल कर रख दी. मामला सर्वोच्च न्यायलय तक में विचाराधीन है.मानदेय के नाम पर आज भी इन शिक्षामित्रों को मात्र ३.५०० रुपये महीना दिए जा रहे हैं. महत्वपूर्ण बात तो यह है की मजदूरों से गयी गुज़री स्थित है इनकी…. क्या सरकार व सरकार के नुमाइन्दों को यह एहसास नहीं की मजदूर इन शिक्षामित्रों से ज्यादा बेहतर स्थित में है लेकिन सब कुछ जानते हुए भी इन शिक्षा मित्रो के साथ मानवीय द्रष्टिकोण भी सरकार नहीं अपनाना चाहती भूंख और कुपोषण से अपने बच्चों को बचाने के लिए प्रदेश के असमायोजित शिक्षा मित्रों ने एक बार फिर हजारों की संख्या में उपस्थि हो लक्ष्मण मेला मैदान में धरना शुरू कर दिया है देखना यह है की प्रदेश सरकार इन असमायोजित शिक्षामित्रों के लिए क्या निर्णय लेती है फिलहाल आदर्श शिक्षा सहायक वेलफेयर एशोसिएशन उत्तर प्रदेश के नेत्रत्व में लक्ष्मण मेला मैदान में इनका धरना जारी है यहाँ जुटे शिक्षामित्रों का कहना है की धरना आगामी १३ अप्रैल तक इसी तरह जारी रहेगा !

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