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काशी में भी सांस लेना हुआ दूभर, बीएचयू भी जद में

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इन दिनों वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। अबकी बार इसके लिए जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि नगर निगम है, जिस पर यह जिम्मेदारी है कि वह शहर को स्वच्छ और प्रदूषण रहित रखे। लेकिन निगम न तो शहर को स्वच्छ रख पा रहा है न प्रदूषण पर कोई अंकुश लगा पा रहा है।
बीएचयू तक आया जद में
नगर निगम की लापरवाही के चलते शहरी क्षेत्र के साथ अब वे इलाके भी वायु प्रदूषण की जद में आ रहे हैं जहां अब तक इसका नामो निशां नहीं था। चारों तरफ हरियाली थी। स्वच्छता थी और कम से कम कूड़ा जलाया नहीं जाता है। इन इलाकों में एक बीएचयू है, जहां की साफ-सफाई और हरियाली का कोई जोड़ नहीं। लेकिन जिस तरह से हाल के दिनों में नगर निगम ने बीएचयू की चहारदीवारी के आस-पास कूड़ा डंप कर उसे जलाया उसके चलते अब बीएचयू भी वायु प्रदूषण की जद में आने लगा है। खास तौर पर परिसर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा है।
डपिंग ग्राउंड का न होना सबसे बड़ा कारण
दरअसल जो पहल 1997-98 में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी हरदेव सिंह ने की थी, वह अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। नतीजा वाराणसी नगर निगम अब तक शहर के कचरे के निस्तारण के लिए एक अदद डंपिंग ग्राउंड की तलाश पूरी नहीं कर सका। ऐसे में निगम के स्वास्थ्य कर्मचारी जिन पर कूड़ा हटाने की जिम्मेदारी है वो जहां-तहां कूड़ा गिराते रहते हैं। अब तक यह काम गंगा और वरुणा के तट पर होता था। मसलन राजघाट और कचहरी जाने वाले मार्ग पर कूड़े का टीला आज भी देखा जा सकता है। नगर निगम के कूड़ा डंपिंग के चलते ही पुराना पुल के पास वरुणा लगभग समाप्त सी हो गई हैं। सलारपुर से अलईपुर मार्ग से आना-जाना दुरूह है। रास्ते में दुर्गंध इस कदर है कि गमछा भी नाक पर रखें तब भी कोई असर नहीं पड़ता। हाल के दिनों में तो नगर निगम ने रमना और आसपास के क्षेत्रों को इसके लिए चुन लिया। बीएचयू की चहारदीवारी के समीप भी कूड़ा डंप कर दिया जिसके चलते लोगों का सुख-चैन छिन गया है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
बीएचयू के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अभय सिंह बताते हैं कि नगर निगम जिस तरह से कूड़ों में आग लगा कर उसे नष्ट कर रहा है वह जानलेवा है। कूड़े के धुएं से जो विषैली गैस निकल रही है वह सासं के रोगियों की संख्या में तो इजाफा करेगी ही दूसरे फेफड़ों को बर्बाद कर देगी। बताया कि कूड़ा निस्तारण की सबसे सरल विधि है, जमीन में गड्ढा खोद कर उसमें कूड़ा डाला जाए फिर उसे मिट्टी से ही ढका जाए। ताकि कचरे के विषाणु हवा में न फैलें। कूड़ा जलाने से कार्बनिक गैस वायुमंडल को दूषित करती है जो किसी भी स्वस्थ्य मनुष्य के लिए हानिकारक है। यह धूम्रपान से कहीं ज्यादा हानिकारक है। डॉ.सिंह ने बताया कि बीएचयू परिसर में जो भी कूड़ा कचरा निकलता है उसे जलाया नहीं जाता बल्कि गड्ढ़ा खोद कर उसमें ही डाला जाता है। लेकिन हाल के दिनों में नगर निगम ने जिस तरीके से विश्वविद्यालय की चहारदीवारी के आसपास कूड़ा डंप क

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