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अम्मी जान हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चली गईं :मुनव्वर

मां की तमाम खूबियों पर जब मुनव्वर राना की कलम चली, तो न जाने कितनी आंखों में आंसुओं का दरिया उतर आया। न जाने कितने लोगों ने कलामों को सुनकर मां को गले लगा लिया। आज मुनव्वर राना की मां का इंतकाल हो गया। जिसकी खबर खुद मुनव्वर राना के सोशल मीडिया के अकाउंट के जरिए मिली। मुनव्वर राणा ने लिखा कि आज अम्मी जान हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चली गईं। मुनव्वर राना द्वारा लिखी मां के लिए गज़लों में से चर्चित एक गजल
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी मां सजदे मे रहती है
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है
बुलंदियों का बड़े से बड़ा निशान छुआ
उठाया गोद में माँ ने तब आसमान छुआ
घेर लेने को मुझे जब भी बलाएं आ गईं
ढाल बनकर सामने मां की दुआएं आ गईं
जरा-सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये
दिये से मेरी मां मेरे लिए काजल बनाती है
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती
ये ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी मां सजदे में रहती है

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