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शहीद के बेटे का बुरा हाल अनुकम्पा नौकरी के लिए भटक रहा दर दर

वर्ष 2006 में आरआर बटालियन 40 में नायब सूबेदार खेताराम जाट की तैनाती जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए हुई। वे 3 सितम्बर 2006 को राजौरी से पुंछ सैक्टर में 14 सैनिकों के साथ ऑपरेशन पर जा रहे थे। इस दरम्यान रास्ते में आतंककारियों की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंग में विस्फोट से उनकी गाड़ी गहरी खाई में गिर गई और खेताराम सहित चार सैनिक शहीद हो गए।
जिला मुख्यालय बाड़मेर से 100 किलोमीटर दूर जिले की सरहद पर बसे उण्डू गांव के राजस्व गांव मूढ़णों की ढाणी में शहीद खेताराम का घर है। लुम्भाराम मूढ़ण के दोनों पुत्र पूनमाराम व खेताराम सेना में नायब सूबेदार बने। खेताराम की शहादत के बाद उनके अन्तिम संस्कार के समय तत्कालीन सरकार के प्रतिनिधियों ने शहीद के नाम को चिरस्थायी रखने के लिए ग्राम पंचायत के सरकारी स्कूल व मुख्य चौराहे को शहीद के नाम पर करने की घोषणा की थी। यह कार्य दस साल के लम्बे इन्तजार के बाद भी सिरे नहीं चढ़े। इस एवज में प्रशासन व सैनिक कल्याण विभाग ने शहीद की ढाणी स्थित राप्रावि डूडियों की ढाणी को 6 माह पूर्व शहीद के नाम पर करने के आदेश कर दिए। स्कूल प्रशासन ने इस आदेश के चलते कागजों में नाम बदल दिया, लेकिन विद्यालय के ऊपर लिखे नाम को बदलने तक की जहमत नहीं उठाई।
सर्किल का सपना भी अधूरा
सरकार की ओर से किया गया दूसरा वादा भी नौ साल से अधूरा है। शहीद खेताराम जाट का गांव में सर्किल बनाने का आश्वासन उस दौरान दिया गया था, लेकिन अब तक इस ओर कोई कार्य नहीं हुआ है। सर्किल की मांग को लेकर शहीद के परिजन और ग्रामीणों ने कई बार ग्राम पंचायत और प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
कानूनी पेचों में फंसी सरकारी नौकरी
शहीद खेताराम के पुत्र हेमाराम ने शिक्षक और चम्पालाल ने जीएनएम की डिग्री कर रखी है। छोटे पुत्र चम्पालाल ने शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी शिक्षक की अनुकम्पा पर नौकरी के लिए 2008 में आवेदन किया। सरकारी विभागों के चक्कर काटने के बाद 2011 में आरटेट की अनिवार्यता के चलते शिक्षक पद से वंचित कर दिया। इसको लेकर जिला प्रशासन को बार-बार अवगत करवाने के बावजूद कोई सुनने को तैयार नहीं है।

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