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सरकार न्यायालय के फैसले तक इंतजार कर लेती तो ‘‘आसमान नहीं गिर जाता- शत्रुघन सिन्हा

भाजपा के असंतुष्ट सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के केंद्र के फैसले की यह कहते हुए आलोचना की कि यदि सरकार मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसले तक इंतजार कर लेती तो ‘‘आसमान नहीं गिर जाता।’’ पटना साहिब से 70 वर्षीय भाजपा सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘महान सलाहकारों’’ को भी यह कहते हुए आड़े हाथ लिया कि यदि उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ फैसला दिया तो वे क्या जवाब देंगे।
विभिन्न मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व से अलग राय रखने वाले सिन्हा ने इस मामले में सिलसिलेवार ट्वीट करने के बाद कहा, ‘‘जब मामला उच्चतम न्यायालय में है तो हमें अधिक सतर्क और सचेत रहना चाहिए था। मेरा मानना है कि यदि हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार कर लेते तो आसमान नहीं गिर जाता। ऐसा करना हमें शर्मिंदगी और विवाद से बचा सकता था।’’ उन्होंने पुणे से फोन पर कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी बहुत अच्छे प्रधानमंत्री हैं। ये सलाहकार हैं जो कई बार त्रुटिपूर्ण मत देते हैं जिसका अंजाम गलत राजनीतिक कदम के रूप में निकलता है जो निश्चित तौर पर पार्टी और सरकार के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।’’ यह कहे जाने पर कि उनके विचार पार्टी के प्रतिकूल हैं और उनसे असंतोष झलकता है, सिन्हा ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा सच कहा है। मेरे निजी विचार कई बार हमारे लोगों से नहीं मिलते हैं। लेकिन, मेरी मंशा हमेशा पार्टी और देश के लिए अच्छे की रही है।’’ अभिनय और राजनीति में सक्रिय सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं उम्मीद, कामना और प्रार्थना करता हूं कि वे पार्टी के प्रति मेरी ईमानदारी और वफादारी को स्वीकार करेंगे।’’
सिन्हा ने इससे पहले, ट्वीट किया था, ‘‘हमारे साहसी, गतिशील एक्शन हीरो प्रधानमंत्री में मेरा पूरा विश्वास है। लेकिन आश्चर्य है कि वे ‘महान’ सलाहकार कौन हैं जिन्होंने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की। वह भी तब जब मामला उच्चतम न्यायालय में पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के पास विचाराधीन है। क्या जल्दबाजी और चिंता थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर न करे, यदि यह फैसला हमारे खिलाफ जाता है, तो हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री के लिए हमारा क्या जवाब और स्पष्टीकरण होगा।’’
गौरतलब है कि केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को उचित ठहराते हुए शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर कहा था कि राज्य में शासन एवं कानून व्यवस्था की स्थिति ‘‘पूरी तरह चरमरा गई थी’’ जहां राज्यपाल और उनके परिवार के सदस्यों को हर रोज ‘‘अपने जीवन को गंभीर खतरे’’ की आशंका थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस सप्ताह के शुरू में अरुणाचल प्रदेश में केंद्रीय शासन लगाने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले पर अपनी मंजूरी दे दी थी।

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