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UP के नए लोकायुक्त बने जस्टिस संजय मिश्रा

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम खारिज करते हुए यूपी का नया लोकायुक्त अप्वॉइंट कर दिया। जस्टिस (रिटायर्ड) संजय मिश्रा को यूपी का नया लोकायुक्त बनाया गया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने अपनी आपत्ति 16 दिसंबर तक बता दी होती, तो शायद आज हालात कुछ और होते।” इसके पहले कोर्ट ने माना था कि लोकायुक्त के मामले में यूपी सरकार ने गुमराह किया है। इस बावत मीडिया ने जब जस्‍टि‍स संजय मि‍श्रा से संपर्क कि‍या तो उन्‍होंने सबसे पहले नि‍युक्‍ति‍ के लि‍ए कोर्ट का आभार जताया। इसके बाद उन्‍होंने कहा कि‍ अभी मीडि‍या के द्वारा ही उन्‍हें यह खबर मि‍ली है। जब नि‍युक्‍ति‍ संबंधी दस्‍तावेज उन्‍हें मि‍ल जाएगा तब वे लोकायुक्‍त को लेकर सामयि‍क बिंदुओं पर बात करेंगे। यूपी के गवर्नर राम नाईक और सीएम अखि‍लेश यादव ने प्रदेश के नए लोकायुक्त के चयन के लि‍ए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। नाईक ने कहा, ‘मैंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हमेशा सम्मान किया है। लोकायुक्‍त संबंधी नए आदेश का भी सम्‍मान करता हूं।’ सीएम ने कहा, ‘हमारी सरकार कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करती है।’

– जस्टिस संजय मिश्रा इलाहाबाद के मूल निवासी हैं। वह यूपी के पूर्व अटॉर्नी जनरल कन्हैयालाल मिश्रा के पोते हैं।
– उनका जन्म 19 नवंबर 1952 में हुआ। उनकी छवि काफी साफ-सुथरी है।
– उन्होंने दिसंबर 1977 में अपना करियर शुरू किया था। 18 अगस्त 2005 को वे फुलटर्म जज बने थे।
– इलाहाबाद हाईकोर्ट में 24 सितंबर 2004 में ज्वॉइनिंग हुई। यहां 18 नवंबर 2014 तक सर्विस दी।
– नवंबर 2014 में वह हाईकोर्ट से रिटायर हुए।
– वह बलरामपुर में एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी रह चुके हैं।
– यूपी सरकार के पैनल में भी जस्टिस संजय मिश्रा का नाम था, लेकिन सरकार ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम प्रपोज किया था।
– जस्टिस रंजन गोगई की बेंच ने यूपी सरकार पर सख्त नाराजगी जताई और कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक साधारण से मामले में यूपी के संवैधानिक पदाधिकारी एक राय नहीं बना पाए।
– नियुक्ति के लिए कई बार वक्त दिया गया। लंबी बैठकों का दौर चला और जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम यूपी सरकार ने कोर्ट के सामने रखा, लेकिन हमें उनके बारे में कई तथ्य साफ नहीं हैं।
– जाहिर है कि उनके नाम पर गंभीर संदेह है। इसके कारण उनका नाम हटाया जा रहा है। उम्मीद है कि अब संजय मिश्रा के नाम पर सभी में सहमति बनेगी। दुख इस बात का है कि पहले यह पता चलता कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर सहमत नहीं हैं तो ये हालात नहीं होते।
– बीते साल 16 दिसंबर को डेडलाइन खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस वीरेंद्र सिंह यादव को यूपी का लोकायुक्त अप्वॉइंट किया था।
– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने गवर्नर राम नाईक को लेटर लिखकर एतराज जताया था।
– चीफ जस्टिस ने कहा था कि जस्टिस वीरेंद्र सिंह के नाम पर वह सहमत नहीं थे। बावजूद इसके उनका नाम यूपी सरकार ने भेज दिया।
– इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर आप लोकायुक्त के अप्वॉइंटमेंट में नाकाम रहते हैं, तो हम ऑर्डर में लिखेंगे कि सीएम, गवर्नर और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपनी ड्यूटी करने में असफल रहे।
आखिर क्यों नाराज थे चीफ जस्टिस?
सूत्रों के मुताबिक, चीफ जस्टिस इस बात से नाराज थे कि वे सिलेक्शन कमेटी की मीटिंग में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज वीरेंद्र सिंह के नाम पर पहले ही एतराज जता चुके थे। सीएम ने भी उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे लोकायुक्त के लिए रिटायर्ड जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम प्रपोज नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने लोकायुक्त के लिए जस्टिस एसयू खान (रिटायर्ड), जस्टिस देवेंद्र प्रताप सिंह (रिटायर्ड), जस्टिस अमर सरन (रिटायर्ड), जस्टिस श्रीकांथ त्रिपाठी (रिटायर्ड) और जस्टिस सुनील हाली (रिटायर्ड) का नाम प्रपोज किया था। हालांकि, वह रिटायर्ड जस्टिस एसयू खान के नाम पर भी सहमत नहीं थे।

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