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असमायोजित शिक्षामित्र आत्मदाह को मजबूर मई से नहीं मिला मानदेय

बेसिक शिक्षामंत्री अहमद हसन से मिला शिक्षा मित्रों का प्रतिनिधिमण्डल

लखनऊ ! प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जहाँ सरकार की छवि बेहतर बनाने के लिए नित नयी नयी योजनाओं की शुरुआत कर एवं विकास कार्यों की शीर्ष अधिकारीयों के बीच समीक्षा बैठक कर सरकार की छवि को बेहतर बनाने के लिए दिन रात एक कर मिशन २०१७ को कामयाब करना चाह रहें हैं वहीँ कुछ अधिकारी उनके सारे किये धिये पर पानी फेरने पर आमादा हैं ! इसका जीता जगता उदाहरण है उनके नाक के नीचे राजधानी लखनऊ में ही कुछ अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में कोताही बरत सरकार की छवि ख़राब करने से बाज़ नहीं आ रहे है !
बताते चलें की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा एक लाख बहत्तर हज़ार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाये जाने की घोषणा ही नहीं की गयी बल्कि उसे अमली जामा भी दिए जाने हेतु सम्बंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गये थे. मुख्य मंत्री के कड़े निर्देशन के बाद शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाये जाने की प्रक्रिया शुरू हुई इस हेतु शिक्षा अधिनियम में कुछ संसोधन भी किये गये लेकिन इसे अधिकारियों की चूक कहे या लापरवाही कि शिक्षा मित्रों के सहायक अध्यापक बनाये जाने में जो प्रक्रिया अपनाई गयी उसमे कई पहलू ऐसे रहे जिसे हाई कोर्ट में टेट के लोंगों द्वारा चलेंज किया गया मामला यहाँ तक जा पहुंचा की हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाये जाने की प्रक्रिया को गलत ठहरा नियुक्तिया ही रद्द कर दी इसकी जानकारी मिलते ही शिक्षामित्र इतने सदमे में आ गये की जगह जगह शिक्षा मित्र आत्महत्या करने लगे प्रधान मंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी भी शिक्षामित्रों द्वारा लगातार आत्मदाह व आत्म्हात्या से हतप्रभ हुए उन्होंने भी शिक्षामित्रों द्वारा अवसाद में आकर उठाये जा रहे आत्महत्या जैसे मामलों पर दुःख जाहिर करते हुए उन्हें न्याय दिलाये जाने का आश्वाशन दिया .
प्रदेश में करीब १४ हज़ार से अधिक शिक्षामित्र अभी तक समायोजित ही नहीं किये गये
गौर तलब तो यह है की प्रदेश में करीब १४ हज़ार से अधिक शिक्षामित्र अभी तक समायोजित ही नहीं किये जा सके है. अधिकारियों ने शासन के निर्देश के बावजूद इन्हें अब तक लटकाए रखा है . अन्य जनपदों की बात छोडिये राजधानी लखनऊ में ही १२०८ शिक्षामित्र अभी तक समायोजन से ही वंचित है जिन्हें लम्बे अरसे से मई २०१५ के बाद आज तक मानदेय भी नहीं दिया गया है .
अब सोचने वाली बात यह है की जो मात्र 3.500 के मानदेय से किसी तरह अपने परिवार का जीवकोपार्जन चला रहे थे उन्हें इतने लम्बे अरसे से मानदेय भी नहीं दिया गया आखिर ऐसे में उनके सामने अवसाद में जाने के अलावा रास्ता ही क्या बचता है ? शिक्षामित्रों से मिली पुष्ट अपुष्ट जानकारी के मुताबिक अब तक करीब पांचदर्ज़न शिक्षामित्र आत्मदाह व आत्महत्या कर चुके हैं ! बताते चले की इनमे सैकड़ों पुरुष व महिला शिक्षामित्र ऐसी हैं जो अभी भी अवसाद से ग्रसित हो आत्महत्या कर लेने की बात करते नज़र आ रहें हैं .
यही नहीं अभी तक करीब १४००० शिक्षामित्रों का समायोजन न होने एवं उनमे बड़ते आक्रोष को देखते हुए आज बेसिक शिक्षामंत्री अहमद हसन से शिक्षामित्रों की अगुवाई कर रहे शिक्षामित्र नेता गाजी इमाम दर्ज़नो शिक्षामित्रों को साथ ले शिक्षामंत्री के विश्वास खंड गोमतीनगर स्थित आवास पर पहुंचें तथा बेशिक शिक्षा अधिकारी द्वारा गोलमाल करने एवं कोताही बरतने की बात कहते हुए शीघ्र ही अवशेष शिक्षा मित्रों के समायोजन कराये जाने की बात कही ! आश्चर्य जनक तो यह है की राजधानी लखनऊ में ही अभी तक एक हज़ार दो सौ अट्टारह शिक्षा मित्र जो की द्तीय चरण का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा की गयी घोषणा व शासनादेश के मुताबिक दिसम्बर २०१४ तक सहायक अध्यापक बनने का सपना देख रहे थे उनके सपनो पर पानी फिर गया है ! अवसाद् ग्रस्त शिक्षमित्र शासन के नेताओं और लखनऊ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का चक्कर लगाते हुए घूम रहे हैं . समायोजन न होने से परेशान शिक्षामित्रों की हालत अति दयनीय हो चली है खासकर महिला शिक्षामित्रों की हालत बहुत ही दयनीय व नाज़ुक है ज्यादातर महिला शिक्षमित्र अब इसे मानसिक उत्पीड़न बताते हुए आत्मदाह करने की बात कह रही हैं इधर इस बावत जब बेशिक शिक्षाधिकारी से दूरभाष पर वार्ता कर जानकारी चाही गयी तो उन्होंने पद न होने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड लिया ! यह कहे जाने पर की ग्रामीण क्षेत्र के सभी सपा विधायक भी समायोजन चाह रहे हैं फिर भी विलम्ब क्यों हो रहा है ? इस पर भी उन्होंने यही जबाब दिया की पद नहीं हैं , दूसरी तरफ शिक्षमित्रों की लीडरशिप करने वाले नेताओं का आलम यह है की वे अपनी अपनी नेतागीरी चमकाने में लगें हैं संगठन अपनी ढपली अपना राग अलापने में मशगूल हैं किसी को भी इस बात की परवाह नहीं है की लखनऊ जो कि प्रदेश की राजधानी है जब यहाँ ही शिक्षामित्र समायोजित नहीं किये गए हैं और उनमे व्यापक आक्रोष है तथा लगातार आत्मदाह जैसी घटनाये अंजाम देने की लें रही है तो भला सरकार की इसमें कीर्तिगाथा होगी या किरकिरी यह एक यक्ष प्रश्न है ? शायद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी अभी तक शिक्षा मित्रों के इस दर्द की गहराई को पूरी तरह नहीं समझ सके हैं या फिर शिक्षमित्रों के इस दर्द से उन्हें अवगत नहीं कराया गया है बताया तो यहाँ तक जा रहा है की खुद बेशिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन से आज जब शिक्षामित्रों का प्रतिनिधिमंडल मिला तो असमायोजित शिक्षामित्रों के बारे में उन्होंने जानकारी लिए जाने की बात कही अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की सरकार के नुमाइन्दे अधिकारी सरकार की सोच के पार्टी कितने धीर – गंभीर हैं ! इसमें कोई दो राय नहीं की लगातार १३ सालों से मात्र 2 हजार और साढ़े तीन हज़ार के मानदेय से जीवन यापन कर रहे इन शिक्षमित्रों के समयोजन पर यदि अखिलेश सरकार ने समय रहते शीघ्र ध्यान न दिया तो संभव है की उनके इस अच्छे काम पर भी लापरवाह अधिकारी पानी फेर देने में सफल रहें क्योंकि अवसाद ग्रस्त शिक्षमिता लगातार आत्महत्या कर रहें हैं रही बात समायोजित शिक्षा मित्रों की तो उनके रुके वेतन को फिलहाल दिए जाने की संस्तुति विधिक जानकारी लेने के उपरान्त सरकार द्वारा कर दी गयी है लेकिन करीब १४००० असमायोजित शिक्षामित्रों के बारे में अभी तक ना तो विधिक जानकारी ही ली गयी है न ही अभी तक इन असमायोजित शिक्षामित्रों को कोई ऐसा आश्वाशन ही सरकार की तरफ से दिया गया है की ये अवसाद मुक्त हो सकें तथा लगातार शिक्षामित्रों की हो रही आत्म्हात्यायों की घटना को विराम लग सके फिलहाल सुप्रीमकोर्ट में अगली तारिख ७ को आने वाले फैसले का समायोजित हो चुके शिक्षामित्रों को इंतज़ार है !

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