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500 रुपये घूंस नहीं दी तो निगम कर्मी ने दिखा दी दबंगई बुलडोज़र चलाकर

लखनऊ. एक और गरीब की रोजी-रोटी छीन ली गई। करतूत लखनऊ नगर निगम के एक दबंग कर्मचारी की है। गोमती नगर में हुसेड़िया चौराहे के पास बाटी चोखा की रेहड़ी पर बुलडोजर चला कर निगम कर्मी ने अपना जलवा दिखया । निगम कर्मी की दबंगई का शिकार हुए बलवंत और मुन्ना का आरोप है कि आरोपी निगमकर्मी ‘नेता’ उनसे पांच सौ रुपए की मांग कर रहा था। रुपए नहीं दे पाए तो अचानक आकर उसने रेहड़ी पर बुलडोजर चला कर सबकुछ तहस नहस कर मेरी रोजी रोटी ही उजाढ़ दी।
बताया जाता है की बलवंत हुसेड़िया चौराहे के पास नगर निगम के ऑफिस के बाहर सड़क किनारे ‘पुर्वांचल बाटी-चोखा’ नाम से रेहड़ी लगाता था। दो भाई बलवंत और मुन्ना इसके सहारे अपने परिवार का पेट पालते थे। आसपास कुछ और भी ठेले लगते हैं। नगर निगम ऑफिस में एक कर्मचारी है, जिसे लोग नेता के नाम से जानते हैं। वह लगातार इनसे वसूली करता था। कुछ दिन पहले उसने बलवंत और मुन्ना से पांच सौ रुपए मांगे। बिक्री अच्छी नहीं हुई थी। इसलिए वो रुपए नहीं दे पाए। शनिवार शाम करीब चार बजे अचानक नेता एक बुलडोजर लेकर पहुंचा और बिना कुछ बात किए रेहड़ी पर चढ़वा दी।
सड़क किनारे बिखरे सामान और टूटे ठेले को देखकर बलवंत फूट-फूटकर रो पड़ा। बड़ा भाई उसे हौसला देने की कोशिश जरूर कर रहा था, लेकिन अंधेरा तो उसके आंखों के सामने भी था। अब दोनों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
बीस सालों से सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले मुन्ना ने बताया,’इसी दुकान के सहारे मां-बाप, भाई-बहन और बच्चों का पेट भरता था। किसी से रुपए उधार लेकर पांच दिन पहले ही 22 हजार में रेहड़ी बनवाया था। मुझे नहीं पता था वह ऐसा करवा देगा, नहीं तो मैं किसी से उधार लेकर या भूखे रहकर उसको पैसा दे देता। रोते हुए बलवंत ने कहा कि मुझे नहीं पता अब मेरे परिवार का क्या होगा।”निगम कर्मी ‘नेता’ को आसपास की दुकानों से वसूली की रकम मिल गई थी, इसलिए उसने उनको छोड़ दिया। सिर्फ बाटी-चोखा रेहड़ी पर बुलडोजर चलवाया गौर तलब तो यह है की रेहड़ी को तोड़ने से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और ना ही किसी तरह की चेतावनी ही दी गई थी
इस बारे में जब नगर निगम जोन चार के जोनल अधिकारी अनूप वाजपेयी से जानकारी की गयी तो उन्होंने बताया की मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि कोई अभियान होता तो मुझे जरूर पता चलता।बताते चलें की 19 सितंबर को एेसे ही एक मामले में जीपीओ पर एक बुजुर्ग टाइपिस्ट कृष्ण कुमार का टाइपराइटर तोड़ दिया गया था।जब वह ख़बर वायरल हुई तो दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया था । बुजुर्ग को टाइपराइटर देने के लिए रात में ही डीएम उसके घर पहुंचे थे । सीएम ने इस मामले का संज्ञान लेकर टाइपिस्ट को एक लाख रुपए की मदद भी की थी। क्या इस तरह से नगर कर्मी कथित नेता द्वारा किया गया यह कृत्य जिसमे बलवंत का सब कुछ 500 रूपये न दे पाने के चलते उजाढ़ दिया गया उसे भी कुछ न्याय मिल पायेगा यह एक सवाल बन पड़ा है !

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