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मुलायम को मनाने में नाकाम रहे लालू-शरद

लखनऊ. शुक्रवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को मनाने में जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव नाकाम रहे। दिल्ली में हुई मुलाकात में सीटों के बंटवारे पर सपा सुप्रीमो की नाराजगी को दोनों नेता दूर नहीं कर सके। बातचीत के दौरान न लालू की लालटेन जल सकी और न ही जेडीयू का तीर ही निशाने पर लगा। ऐसे में बिहार में जनता परिवार में गठबंधन की संभावना फिलहाल क्षीण नजर आ रही है। बता दें कि करीब साढ़े चार महीने पहले ही मुलायम ने जेडीयू और आरजेडी के साथ जनता परिवार के एकीकरण की कोशिश शुरू की थी, लेकिन महज पांच सीटें मिलने से मुलायम समेत सपा के सभी बड़े नेता अब कोप भवन में बैठ गए हैं और बिहार में सपा के नेतृत्व में नए मोर्चे की संभावना दिखने लगी है।
 सपा के महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने शुक्रवार को ही ये बता दिया था कि बिहार विधानसभा के चुनाव को लेकर पार्टी की अन्य दलों से बातचीत चल रही है। रामगोपाल का बयान आते ही शरद यादव और लालू यादव सक्रिय हो गए थे। दोनों नेताओं ने कहा था कि मुलायम सिंह की नाराजगी दूर की जाएगी, लेकिन शुक्रवार को दोनों नेता जब दिल्ली में मुलायम से मिले, तो अपने नाम के ठीक उलट सपा सुप्रीमो कठोर नजर आए। राजनीति के जानकारों के मुताबिक सपा के परंपरागत वोटर यादव और मुसलमान हैं। इनके दम पर पार्टी हर बार यूपी में सत्ता में आई है। मुलायम के अलग होने से इसका असर जेडीयू और आरजेडी पर पड़ सकता है।
                              एनसीपी और पप्पू यादव पर नजर
बताया जा रहा है कि बिहार में एक नए गठजोड़ के लिए मुलायम की नजर लालू की पार्टी से अलग हुए और जन अधिकार मोर्चा बनाने वाले पप्पू यादव और सीट बंटवारे को लेकर पहले ही नाराजगी जताकर जनता परिवार से अलग हुई एनसीपी पर है। हालांकि पप्पू यादव का झुकाव फिलहाल बीजेपी की ओर दिखता है, लेकिन अगर अपेक्षा के मुताबिक उनकी पार्टी को सीटें नहीं मिलीं, तो देर-सबेर पप्पू भी मुलायम के सामने हाथ जोड़ सकते हैं। सपा का मानना है कि पप्पू यादव हमेशा लालू और नीतीश पर निशाना साधते हैं। ऐसे में वह दोनों के यादव वोट बैंक में सेंध लगाने का काम कर सकते हैं। वहीं, एनसीपी से भी मुलायम के बेहतर रिश्ते हैं।
                    रघुनाथ को आगे खडा कर सकती है पार्टी
बिहार की राजनीति में ब्राहमण वोटों पर अच्‍छी पकड़ रखने वाले रघुनाथ झा ने भी आरजेडी से नाता तोड़ लिया है। रघुनाथ की न केवल ब्राहमण वोटों पर पकड़ मानी जाती है, बल्कि यादव वोटरों पर भी इनका खासा असर है। जेडीयू-आरजेडी के बजाय इसका सीधा फायदा मुलायम सिंह को मिल सकता है, क्‍योंकि बिहार में पकड़ और पहचान बनाने के लिए सपा को इन वोटों की सबसे ज्यादा जरूरत है। सूत्र बताते हैं कि बिहार में अगला चुनाव पार्टी रघुनाथ को आगे लाकर लड़ने के मूड में है। वहीं, हत्‍या के आरोप में जेल में बंद छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने जेडीयू से रिश्‍ता तोड़ लिया है। इसकी वजह लालू को बताया जा रहा है। नए मोर्चे में वह भी आ सकते हैं।

 

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