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हाई क्लास लाइफस्टाइल की शौकीन थी इंद्राणी-सिद्धार्थ दास

शीना बोरा मर्डर केस में गिरफ्तार इंद्राणी मुखर्जी के पहले पति बताए जा रहे सिद्धार्थ दास ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत की। इसमें उन्‍होंने बताया कि वह और इंद्राणी पहली बार एक सिनेमाहॉल में बेहद नजदीक आए थे। उस वक्त वहां ‘शीना, क्वीन ऑफ द जंगल’ मूवी चल रही थी। सिद्धार्थ ने बताया, ”हमें मूवी पसंद आई और हॉल में बिताया वक्त भी। हमने तय किया कि अगर हमारी बेटी हुई तो उसका नाम शीना रखेंगे। हमारी इच्छा पूरी हुई और 1987 में हमें एक बेटी हुई। दूसरी संतान मिखाइल का नाम सोवियत लीडर मिखाइल गोर्वाचोव के नाम पर रखा।”
ऐसे हुई मुलाकात
सिद्धार्थ ने बताया, ”हम दोनों की मुलाकात 1984 में एक पार्टी में हुई थी। वह बेहद खूबसूरत थी। उन दिनों कई लड़कियां मुझे भी पसंद करती थीं। जल्द ही हम एक-दूसरे से घुलमिल गए और मिलने-जुलने लगे। हमें एक-दूसरे से प्यार हो गया। इंद्राणी मुझे सिड बुलाती थी।” इंद्राणी ने शिलॉन्ग के कॉलेज में एडमिशन लिया। उसकी पढ़ाई खत्म होते ही हम गुवाहाटी आ गए। 1986 में जब हमने साथ रहना शुरू किया तो उस वक्त इंद्राणी 20 साल की, जबकि मैं 21 साल का था।
इंद्राणी के मां-बाप को नहीं थी आपत्ति
सिद्धार्थ के मुताबिक, दोनों इंद्राणी के घर पर ही रहते थे और उसके मां-बाप को इस पर कोई आपत्ति नहीं थी। सिद्धार्थ ने कहा, ”इंद्राणी के मां-बाप मुझसे प्यार करते थे। हम एक ही कमरे में रहते थे।” सिद्धार्थ ने बताया कि उन्होंने गुवाहाटी में एक बेकरी शुरू की।
हाई क्लास लाइफस्टाइल की शौकीन थी इंद्राणी
सिद्धार्थ के मुताबिक, इंद्राणी को महंगे कपड़ों, परफ्यूम्स, कार का शौक था। सिद्धार्थ ने बताया, ”जब वह मेरे साथ रिलेशनशिप में थी, वह दूसरे पुरुषों से महंगे गिफ्ट्स लिया करती थी। वह उनकी कारों में घूमती भी थी। इस बात पर हमारा झगड़ा भी होता था। लेकिन बाद में वह मुझसे माफी मांगती और हम सब कुछ भूल जाते। वह मुझे शेयर या ऐसी चीजों में इन्वेस्ट करने के लिए बोलती, जिसमें तुरंत मुनाफा हो।”
क्यों अलग हुए
सिद्धार्थ ने बताया, ”वह मेरी कम सैलरी से बेहद दुखी थी। वह दूसरा बच्चा नहीं चाहती थी। वह मुझसे कहा करती थी कि मुझे बिजनेस के अलावा कोई दूसरी जॉब भी करनी चाहिए। हालांकि, मैं अपनी फैक्टरी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। 1989 में इंद्राणी ने कहा कि हमारी आमदनी परिवार चलाने के लिए पूरी नहीं पड़ रही और वह शिलॉन्ग जा रही है, जहां उसे नौकरी मिल गई है। उसने कहा कि सेटल होने के बाद वह मुझे भी वहां बुला लेगी। चार महीने तक वह नहीं लौटी। इसके बाद, इंद्राणी के मां-बाप ने मुझे घर छोड़ने के लिए कहा। मैं बच्चों की कस्टडी चाहता था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करने दिया। मैंने उनका घर छोड़ दिया।”
फिर डिस्टर्ब न करने को कहा
सिद्धार्थ ने आगे बताया कि उन्हें इंद्राणी के शिलॉन्ग का एड्रेस भी नहीं पता था। दो महीने ढूंढने के बाद उनकी इंद्राणी से एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मुलाकात हुई। सिद्धार्थ ने बताया, ”वह एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही थी। जब वह मुझसे मिलने आई तो उसने काफी महंगी ड्रेस पहन रखी थी। उसने बताया कि वह किसी और के साथ है और अपनी जिंदगी से खुश है। उसने मुझसे कहा कि मैं अपनी जिंदगी में आगे बढूं और उसे फिर डिस्टर्ब न करूं।शिलॉन्ग से गुवाहाटी वापस लौटते वक्त मेरा रोड एक्सीडेट हो गया। मैं छह महीने तक बिस्तर पर रहा। 1992 में अरुणाचल प्रदेश आ गया और प्राइमरी स्कूल में इंग्लिश पढ़ाने लगा। मैंने वहां 1998 तक पढ़ाया और उसके बाद कोलकाता आ गया।”

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