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सपा, बसपा के सभी प्रत्याशी जीते भाजपा केवल एक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चुनाव में आज सत्तारूढ़ सपा और मुख्य विपक्षी दल बसपा अपने सभी प्रत्याशी को जिताने में कामयाब रहीं जबकि भाजपा इस मामले में पिछड़ गई और उसके एक अतिरिक्त उम्मीदवार को पराजय का सामना करना पड़ा।

विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने यहां बताया कि विधानमण्डल के उच्च सदन की 12 सीटों के लिए हुए चुनाव में सपा ने आठ, बसपा ने तीन और भाजपा ने एक सीट जीती।

सपा के सभी आठ प्रत्याशी अहमद हसन, रमेश यादव, रामजतन राजभर, साहब सिंह सैनी, अशोक बाजपेयी, वीरेन्द्र सिंह गुर्जर, सरोजिनी अग्रवाल तथा आशु मलिक चुन लिए गए। स्वास्थ्य मंत्री हसन विधानपरिषद में नेता सदन भी हैं।

बसपा के सभी तीन प्रत्याशी नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, धर्मवीर अशोक तथा प्रदीप चुनाव जीतने में सफल रहे। कांग्रेस ने विधान परिषद चुनाव में अपना कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा करके सपा को समर्थन देने को कहा था जिसने उसके दो राज्यसभा सदस्यों प्रमोद तिवारी तथा पीएल पुनिया को जिताने में मदद की थी।

विधानसभा में 80 सदस्यों वाली बसपा ने राष्ट्रीय लोकदल के आठ सदस्यों तथा कांग्रेस के कुछ अतिरिक्त वोटों की मदद से अपने सभी तीन प्रत्याशी जिता लिए। निचले सदन में 41 सदस्यों वाली भाजपा अपना सिर्फ एक प्रत्याशी ही जिता सकी और वह अपने 10 अतिरिक्त वोटों में इतने वोट जोड़ने में नाकाम रही, जिससे वह अपने दूसरे उम्मीदवार को जिता सकती।

कांग्रेस ने कहा कि उसके विधायकों ने साम्प्रदायिक ताकतों को हराने के लिए वोट दिया है। पार्टी प्रवक्ता और विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने वोट डालने के बाद कहा, कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा के अतिरिक्त प्रत्याशी को हराने के लिए बेहद समझदारी से अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस के अतिरिक्त वोट बसपा के पक्ष में गए? उन्होंने कहा हमने धर्मनिरपेक्ष दलों का साथ दिया। भाजपा के अतिरिक्त प्रत्याशी की हार के बारे में पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि उनके दल ने यह सोचकर अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा किया था कि अन्य पार्टियों के विधायक अपनी अन्तरात्मा की आवाज पर मतदान करेंगे।

उन्होंने कहा, दरअसल, हमें 41 से ज्यादा मत मिले हैं। इससे जाहिर है कि अन्य पार्टियों के विधायकों ने भी हमें वोट दिया है। विधानसभा में 41 सदस्यों वाली पार्टी और अपने दम पर एक प्रत्याशी जिताने की क्षमता रखने वाली भाजपा के लक्ष्मण आचार्य ने जीत हासिल की जबकि उसके दूसरे प्रत्याशी दयाशंकर सिंह को शिकस्त सहन करनी पड़ी।

उच्च सदन की एक सीट जीतने के लिए विधानसभा के 31 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है। उस लिहाज से 403 सदस्यीय विधानसभा में 230 विधायकों वाली सपा अपने दम पर सात सीटें जीत सकती थी। हालांकि 28 सदस्यों वाली कांग्रेस ने उसका साथ देने का आश्वासन दिया था। विधान परिषद के जिन 12 सदस्यों का आगामी 30 जनवरी को कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें से सात बसपा के, तीन सपा के तथा दो भाजपा के हैं।

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