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Monday 18 February 2019
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होम लोन पर मिलेगी 6.5% ब्याज की छूट

होम लोन पर मिलेगी 6.5% ब्याज की छूट
नई दिल्‍ली. देश में सस्‍ते घरों की कमी दूर करने के लिए बुधवार को कैबिनेट ने सस्‍ते घर खरीदने वालों को बड़ी राहत देने का फैसला किया। कैबिनेट ने अपने फैसले में कहा कि ऋण-संबद्ध ब्याज छूट घटक के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तबके/निम्न आय समूह (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) श्रेणी में 15 साल तक की अवधि हेतु लिए गए आवास ऋण पर 6.5 फीसदी ब्याज छूट दी जाएगी, जिसमें दोनों ही श्रेणियों में शुद्ध वर्तमान मूल्य पर कुल सब्सिडी प्रति मकान 2.3 लाख रूपये होगी। घटे ब्याज का बोझ बैंकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार सब्सिडी दे रही है। सरकार के इस एलान से कम आय वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी और कम आय में भी खुद के घर का सपना पूरा किया जा सकेगा।
 2 करोड़ घरों की जरूरत
एसोचैम के मुताबिक, देश में करीब 2 करोड़ घरों की जरूरत है। इनमें से 95.62 प्रतिशत घर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस), निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए चाहिए।
 कुछ ख़ास बातें
 सस्ते आवास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस श्रेणी में प्रति मकान 1.5 लाख रूपये की केंद्रीय सहायता दी जाएगी।
 योजना के तहत लगभग दो करोड मकान बनेंगे।
 कब से होगी शुरु
 प्रथम चरण (अप्रैल 2015 से मार्च 2017) में 100 शहर चुने जाएंगे।
चरण-2ए (अप्रैल 2017-मार्च 2019) में 200 और शहरों का चुनाव होगा।
तीसरे चरण (अप्रैल 2019-मार्च 2022) में शेष सभी शहरों में योजना कार्यान्वित की जाएगी।
 किस आय वर्ग को चाहिए सस्ता घर
झुग्गी वासियों
असंगठित क्षेत्र के कर्मी
संगठित क्षेत्रों के कर्मी
आय (मासिक)
3000-6000रु
6000-10000रु
10000-20000रु
ईएमआई
500-1000रु
1000-1500रु
2000-4000रु
मापदंडईडब्लूएस/ एलआईजीएमआईजी
क्षेत्रफल300-600 वर्गफीट (कार्पेट एरिया)1200 वर्ग फीट
कीमतवार्षिक आय का 4 गुणा से कमवार्षिक आय का 5 गुणा से कम
मासिक किस्तमासिक आय का 30 फीसदीमासिक आय का 40 फीसदी
मार्केट में सस्‍ते घर की परिभाषा
रियल एस्‍टेट मार्केट में सस्‍ते घर की कोई तय परिभाषा नहीं है। दिल्‍ली-एनसीआर या फिर किसी अन्य मेट्रो सिटी में सस्‍ते घर की कीमत 15 से 20 लाख रुपए के रेंज में है और यह 500-650 वर्ग फीट एरिया में बना होता है। वहीं, इसके उलट सरकारी स्कीमों में सस्ते घर को तलाशा जाए इंदिरा आवास योजना देश के ग्रामीण इलाकों में समाज के गरीब तबकों को 75,000 रुपए में घर बनाने की आर्थिक मदद देता है।
 क्या है जमीनी हकीकत?
सस्‍ते घर की कीमत 5 से 12 लाख के बीच होनी चाहिए। ऐसे घरों का आकार 200 से 500 वर्ग फीट होना चाहिए। सस्‍ते घर के निर्माण के लिए सस्‍ती कीमत पर जमीन मुहैया होनी चाहिए और इसके लिए स्‍वीकृति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी किया जाना चाहिए। घरों की कीमतों को कम रखने के लिए निर्माण की नई तकनीकि को विकसित करने की जरूरत है।
 क्‍यों नहीं बन पा रहा है सस्‍ता घर?
देश भर में घर निर्माण में प्राइवेट डेवलपर्स का बोलबाला है। प्राइवेट डेवलपर्स मोटा मुनाफा कमाने के चक्‍कर में सस्‍ते घर का निर्माण नहीं करना चाहते। रियल एस्‍टेट के लिए रेगुलेटर नहीं होने का फायदा भी बिल्‍डर उठाते हैं। घरों की कीमत वह अपनी मनमर्जी से तय करते है। सरकार की जितनी भी एजेंसियां है, वे घर बनाने का काम छोड़ चुकी हैं। वे जमीन का अधिग्रहण कर प्राइवेट डेवलपर्स को बेचने का काम करती हैं जिसके चलते समय-समय पर ज्यादातर निर्माण एजेन्सियों पर भष्‍ट्राचार के गंभीर आरोप लगते रहते हैं।

 



A group of people who Fight Against Corruption.


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