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रोज दो घंटे जमीन में गाड़ दी जाती है यह बच्‍ची..

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में इलाज के नाम पर परिजन एक बच्चीन को रोज दो घंटे जमीन में गाड़ देते हैं। बच्चीे का केवल सिर मिट्टी से बाहर रखा जाता है। यह सिलसिला पिछले एक सप्ताह से लगातार जारी है। डॉक्टर इसे अंधविश्वास बताते हैं तो परिजन इसे देशी इलाज बता रहे हैं। इन दोनों तर्क बीच बच्चीन को रोज प्रताड़ना सहनी पड़ रही है।

कल्याणपुर गांव के रामलाल महरा की चार साल की बेटी रिया का कमर से नीचे का हिस्सा बचपन से ही कमजोर है। इस कारण वह सामान्या बच्चेर की तरह नहीं चल पाती है। बुजुर्गों की सलाह पर परिजनों ने सप्ता‍ह पहले घर के पास करीब दो फुट गहरा गड्ढा खुदवाया। इसमें बच्ची को उतारकर उसकी कमर तक मिट्टी या रेत भर दी जाती है। इस स्थिति में वह रोज करीब दो घंटे तक खडी़ रहती है। इस बीच, लड़की रोती भी है, लेकिन उसे बाहर निकालने के बजाय परिजन खिलौने देकर उसका मन बहलाने की कोशिश करते हैं।

बच्चीप की दादी रामरती का कहना है कि यदि दो महीने तक उसकी नातिन को इस तरह रोज डेढ़-दो घंटे तक गड्ढे में कमर तक मिट्टी से दबाकर खड़ा किया जाएगा तो वह चलने लगेगी। उनका कहना है कि यह पुराना नुस्खा है।

डॉक्टगरों का कहना है कि रिया को मेनिंगो मायलोसील बीमारी है। इसमें बाहर या अंदर की ओर रीढ़ की हड्डी में फोड़ा होता है, जिससे हड्डी बाहर की ओर आ जाती है इससे पैरों की नसों में करंट नहीं जा पाता और नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। जबलपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपम साहनी ने बताया कि इस बीमारी का इलाज ऑपरेशन से होता है। बाकी सारी देशी नुस्खेय अंधविश्वा.स हैं।

शहडोल के सीएमएचओ डॉ. एपी द्विवेदी ने बताया कि जमीन में बच्ची के पैर को मिट्टी व रेत से दबाकर रखने से कोई बीमारी ठीक नहीं हो सकती। देखने के बाद ही पता चल पाएगा कि बच्ची को कौन से बीमारी है। हम बच्ची को दिखवाएंगे। (news18से)

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