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2014 में हिंसा से भारतीय अर्थव्यवस्था को 21,932 अरब रुपये का नुकसान

                                                          देश के  हरेक व्यक्ति का करीब 18,000 रुपये का नुकसान
हिंसा किसी इलाके में भड़के, नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ता है। दंगों में भले ही मुट्ठी भर लोग ही शामिल हों, लेकिन जेब देश के हेरक व्यक्ति की कटती है। इस बात की तस्दीक करती एक रिपोर्ट में बताया गया है किपिछले साल देश में हुई हिंसात्मक घटनाओं ने हरेक व्यक्ति का करीब 18,000 रुपये का नुकसान किया। यह आकलन इंस्टीट्यूट फॉर इकनॉमिक्स ऐंड पीस की ताजा रिपोर्ट में लगाया गया है।
संगठन के मुताबिक, साल 2014 के दौरान हिंसात्मक घटनाओं के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को 341.7 अरब डॉलर यानी 21,932 अरब रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के इस वर्ष के वैश्विक शांति सूचकांक (जीपीआई) में 162 देशों की सूची में भारत 143वें स्थान पर है। जीपीआई-2015 की बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आंतरिक संघर्षों और उसके परिणाम स्वरूप शरणार्थी संकट से वैश्विक स्तर पर हिंसा होने वाला नुकसान बढ़ गया है।

 रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल भारत में हिंसा को काबू करने और उससे उपजे हालात से निपटने में 341.7 अरब डॉलर यानी 21932 अरब रुपये तक रहा। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.7 प्रतिशत यानी प्रति व्यक्ति 273 डॉलर यानी 17522.49 रुपये बनता है। वहीं, दुनियाभर में हिंसा से हुए नुकसान की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल इकॉनमी पर 2014 में कुल मिलाकर 14,300 अरब डॉलर यानी 9,17,774 अरब रुपये का नुकसान हुआ। यह राशि ग्लोबल जीडीपी का 13.4 प्रतिशत है।

 

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