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तोमर ने केजरीवाल को दिखाए थे फर्जी दस्तावेज

 दिल्ली. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी सरकार में कानून मंत्री रहे जितेंद्र सिंह तोमर से नाराज है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार सुबह कुछ पुराने ट्वीट्स को रीट्वीट किया। इन ट्वीट्स से साफ होता है कि तोमर ने केजरीवाल को फर्जी आरटीआई दिखाकर गुमराह किया।
तोमर ने यह आरटीआई तब दिखाई थी जब उनके खिलाफ फर्जी डिग्री के आरोप लगे थे और उनके खिलाफ समन जारी हुए थे। दूसरी ओर, एक न्यूज चैनल ने खबर दी है कि तोमर के मामले में ‘आप’ नेताओं की बैठक हो चुकी है। तोमर का मामला ‘आप’ के इंटरनल लोकपाल के पास भेज दिया गया है और जल्द ही उनको पार्टी से निकाला जा सकता है।
 तोमर को बिहार लेकर जाएगी पुलिस
इस बीच, तोमर को दिल्ली पुलिस बिहार ले जा रही है। दिल्ली पुलिस उन्हें मुंगेर के विश्वनाथ सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी कॉलेज और भागलपुर की तिलका मांझी यूनिवर्सिटी ले जाएगी, जहां उनके सामने उनकी डिग्री का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे पहले तोमर को दिल्ली पुलिस फैजाबाद के केएस साकेत पीजी कॉलेज और आरएमएल अवध विश्वविद्यालय भी ले गई थी, जहां उनकी बीएससी की डिग्री का वेरिफिकेशन कराया गया था। दूसरी ओर, तोमर को गुरुवार को साकेत की सेशन कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की सुनवाई 16 जून के लिए टाल दी।
क्या है मामला?
आरोप
जितेंद्र सिंह तोमर यूपी की डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी से साइंस ग्रेजुएट नहीं हैं। उनकी बीएससी की डिग्री फर्जी है। बिहार के मुंगेर स्थित विश्वनाथ सिंह इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडी से तोमर की लॉ की डिग्री भी सही नहीं है। यह कॉलेज बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों पर खरा नहीं उतरता।
बिहार की यूनिवर्सिटी
मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद तिलक मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी ने हलफनामा दायर किया। कहा- तोमर के प्रोविजनल सर्टिफिकेट हमारे रिकॉर्ड में नहीं हैं। तोमर ने अपना रोल नंबर 3687 बताया था जो किसी संजय कुमार चौधरी का है।
यूपी की यूनिवर्सिटी
फैजाबाद की अवध यूनिवर्सिटी में एक आरटीआई अर्जी दायर हुई। जवाब में यूनिवर्सिटी ने कहा कि तोमर की बीएससी सेकंड ईयर की मार्कशीट फर्जी है और डिग्री अमान्य है।
बार काउंसिल
काउंसिल ने 13 मई को दिल्ली पुलिस के डीसीपी को पत्र लिखकर तोमरपर कार्रवाई करने को कहा। काउंसिल ने कहा- तोमर ने गलत जानकारी दी है। मार्कशीट के साथ जालसाजी की है। उनकी डिग्री फर्जी है। वे फर्जी प्रोविजनल एलएलबी सर्टिफिकेट के आधार पर लॉ ग्रेजुएट होने का दावा करते हैं। तोमर का वकालत करने का लाइसेंस निलंबित किया गया है।
तोमर के वकील
तोमर 1994 से 1998 के बीच एलएलबी के स्टूडेंट थे। मुंगेर के लॉ कॉलेज ने खुद यह बात स्वीकार की है। इसलिए आरोप गलत हैं।
तोमर का बयान
‘मैं बेकसूर हूं। हाईकोर्ट में यह साबित कर दूंगा कि मेरी डिग्रियां फर्जी नहीं हैं। मेरे पास पुख्ता सबूत हैं।’ इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 20 अगस्त को है।

 

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