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विकास की बाट जोह रहा बेंती गांव, गोद लेकर भूल गए गृहमंत्री

लखनऊ. पीएम मोदी ने पिछले साल बड़े जोर-शोर से आदर्श सांसद ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बेंती गांव गोद लिया था, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी यह गांव अपने विकास की बाट जोह रहा है। राजनाथ सिंह के गोद लेने से पहले इस गांव की जो हालत थी, आज भी जस की तस बनी हुई है। सड़कें, पानी, कॉलेज और अस्पताल जैसी कई मूलभूत सुविधाएं अभी भी इस गांव की पहुंच से कोसों दूर नजर आती हैं। अखबारनवीसों  ने जब इस गांव का रियलिटी चेक किया, तो दावों की सारी हकीकत सामने आ गई।
 बीते 10 अप्रैल को लखनऊ आए राजनाथ सिंह ने एलान किया था कि बेंती गांव के विकास का खाका खींच लिया गया है। जल्द ही वहां विकास कार्य शुरू कर दिए जाएंगे, लेकिन यहां जब लोगों से बात की गई, तो पता चला कि परवान चढ़ी उनकी उम्मीदों ने अब दम तोड़ना शुरू कर दिया है। यहां के लोगों को लगा था कि गृहमंत्री के गोद लेने के बाद इस गांव की तस्वीर बदल जाएगी। यहां विकास के काम होंगे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि यह गांव इंतजार की गोद में सो गया है।

छह दिसंबर, 2014 को राजनाथ सिंह बेंती गांव में ओरिएंटल बैंक की शाखा का उद्घाटन करने आए थे। इसके बाद बैंक की ओर से ही 10 हैंडपंप लगवाए गए, जबकि इस गांव में अभी भी 30 हैंडपंप की दरकार है। इसके अलावा इन पांच महीनों में यहां और कोई काम नहीं हुआ है। बेंती गांव के प्रधानपति गिरीश तिवारी का कहना है कि राजनाथ सिंह को गांव गोद लेने के बाद आम सहमति से 20 मांगों का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि, लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

प्रस्ताव में शामिल मांगें
-गांव में सरकारी अस्पताल
-पशु चिकित्सालय
-महिला डिग्री और इंटर कॉलेज
-सामुदायिक केंद्र या बारात घर
-सिंचाई के लिए तीन सरकारी नलकूप
-मिनी पॉवर हाउस
-पुलिस चौकी
-गांव में सीसी रोड
-नाली निर्माण
-हैंडपंप, पानी टंकी
-बिजली व्‍यवस्‍था
-गांव का प्रवेश द्वार
-साधन सहकारी संघ
-किसान बीज उपलब्ध सेवा केंद्र
-तालाबों का सौंद्रर्यीकरण
-दुग्ध क्रय केंद्र
-मिनी स्टेडियम और गैस एजेंसी
क्या कहते हैं गांव के लोग
गांव के बाहर से प्रधान के घर तक जाने वाली सड़क राजनाथ सिंह द्वारा गोद लिए जाने से पहले ही बनी हुई थी, लेकिन बाकी रास्तों की हालत अब भी खराब है। गांव में रहने वाले अमित  ने बताया कि पांच महीने में यहां विकास के नाम पर कोई काम नहीं हुआ है। वहीं यशवंत के मुताबिक, गांव में डिग्री कॉलेज बनवाने की बात की गई थी, लेकिन बच्चे सिर्फ तस्वीरों में ही कॉलेज देख रहे हैं। गांव के ही हीरालाल कहते हैं कि अस्पताल का काम भी अब तक शुरू नहीं हुआ है, जो बेहद जरूरी है। अचानक से परिवार में कोई बीमार पड़ता है, तो समझ में नहीं आता कि कहां ले जाएं?

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