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शिक्षा मित्रों ने कोविड 19 सर्वेक्षण डियुटी लगाने में की जा रही मनमानी पर जताया आक्रोश

राजधानी लखनऊ में  चिनहट ब्लाक के शिक्षामित्रों ने कोविड 19 सर्वेक्षण में मनमानी तरीके से लगाई गयी ड्यूटी को लेकर आक्रोश जताया प्राथमिक विद्यालयों के दर्जनों शिक्षा मित्रों ने ब्लाक संसाधन केंद्र चिनहट पर एकत्रित हो शिक्षा मित्रों साथ हो रहे इस नाइंसाफी के खिलाफ सरकार द्वारा आवश्यक कदम उठाये जाने की बात कही !

शिक्षा मित्र जगजीवन सिंह यादव,कुलदीप सिंह,बी एल यादव,क़तर सिंह मोहम्मद आशिफ़,पुष्पेन्द्र,सैयद अली अब्बास,अमर नाथ मिश्रा,लोकपाल, रमेश प्रसाद सहित दर्जनों शिक्षा मित्रों ने कोविड 19 सर्वेक्षण में मनमानी तरीके से लगाई गयी ड्यूटी को लेकर आक्रोश जताते हुए 21 जुलाई को खंड शिक्षाधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए गए पत्र का हवाला देते हुए मीडिया को विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कोविड-19 सर्वेक्षण का मामला हो या लॉक डाउन केआरंभ होने के बाद की जिम्मेदारियां शिक्षा मित्रों ने  अपनी जान की  परवाह ना करतेह हुए सेवाएं जारी रखी है शिक्षा मित्रों का योगदान चाहे क्वारोंटाइन सेटर के साथ रहा हो या राशन वितरण का कार्य यहाँ तक की जून  माह में भी शिक्षा मित्र  सेवाएं देते रहे हैं जबकी उन्हें जून माह का  मानदेय भी नहीं दिया जाता है उलटे शिक्षा मित्रों को कोविड 19 के सर्वेक्षण में भी लगा दिया गया है जब की डियूटी पर लगाए गए कई शिक्षा मित्रों की तबियत भी ख़राब है जिसे लेकर शिक्षा मित्रों में काफी गुस्सा भी है शिक्षामित्रों ने कहीं कही इसे लेकर शिक्षामित्रों ने अधिकारीयों को ज्ञापन भी सौपा है । 

शिक्षामित्र बी एल यादव व आशिफ़  ने कहा कि शिक्षामित्र वर्ष 2002 से शिक्षा की अलख जगा रहे हैं  इस दौरान शिक्षामित्रों ने कई उतार चढ़ाव भी  देखे है सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिये  जाने से प्रदेश में करीब 1500 शिक्षामित्रों की जान तक जा चुकी है  इसके बावजूद अब तक शिक्षामित्रों की छोटी छोटी समस्याओं को भी नज़र अंदाज़ किया जा रहा है आज देश जब  कोविड.19 जैसी वैश्विक आपदा से जूझ रहा है तब भी  शिक्षा मित्र  बराबर सहयोग कर रहे हैं शिक्षामित्र आशिफ़ का कहना है कि‘शिक्षामित्र हमेशा से ही समाज हित के लिए कार्य करते रहे हैं तमाम दिक्कतों व परेशानियों के बावजूद  तमाम शिक्षा मित्रों  ने अपना एक माह का मानदेय भी प्रधानमंत्री राहत कोष में दान किया  है किन्तु शिक्षमित्रों के साथ हमेसा सौतेला व्यवहार ही अपनाया गया है वे  कहते हैं कि शिक्षा मित्रों में हमेशा से ही एक ललक रहती है कि किस तरह से  समाज के लोगों की मदद की जाए शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों की पढाई विद्यालय सञ्चालन बेहतर कैसे किया जाए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया जाने से प्रदेश में करीब 1500 शिक्षामित्रों की जान चली गई तब से लेकर अब तक  शिक्षामित्र अवसाद ग्रस्त है इधर कोविड -19 सर्वेक्षण डियूटी लगाने में की जा रही मनमानी से शिक्षामित्रो में भारी आक्रोश है ! 

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