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Saturday 30 May 2020
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सच्चे धर्म से रूबरू कराते मानवताधर्मी योद्धा     

सच्चे धर्म से रूबरू कराते मानवताधर्मी योद्धा     

कोरोना वायरस की महामारी से पूरा विश्व हलकान है ज्यादातर देशों में धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया है इस आधुनिक युग में वे देश जो संसाधन सम्पन्न माने जाते थे वे भी कोरोना के डंक से कराहते नज़र आ रहें हैं किन्तु जिन्दगी की इस जंग में सच्चे मानवता धर्मी योद्धा अपनी जान की बाज़ी लगा पूरी सिद्दत से लड़ रहें है !

कोरोना वायरस का किसी भी देश के पास सफल इलाज़ नही है वावजूद इसके  डाक्टरों ने विभिन्न प्रयोगों को आजमाते हुए इस वायरस से जंग जारी रखी है और सफलता भी मिल रही है बड़ी संख्या में लोगो को बच्या जा सका है शोधार्थी वैज्ञानिकों ने भी प्रयास तेज़ कर दिए हैं ,एंटीडाट वेक्सीन के लिए भी काम शुरू हो चूका है किन्तु इस वैश्विक महामारी की जंग में सच्चा धर्म जो मानवता का था फिलहाल वही लोगों के जीवन के लिए राम बाण साबित हुआ है !

संकट के इस दौर में पूरे विश्व में डाक्टर स्वास्थ्य कर्मी पुलिस तथा सामाजिक संस्थाओं के अलावा समाजसेवी लोग अपनी जान की बाज़ी लगा आम लोगों के जीवन को बचाने के लिए इस वैश्विक महामारी की जंग में योद्धा बनकर डटें हैं  और जाति धर्म मज़हब को भुला सिर्फ और सिर्फ मानवता के सच्चे धर्म को अपनाकर ये इस युद्ध लड़ते जूझते दिखाई दे रहें हैं !

हमारी भारतीय संस्कृति तो वैसे भी समूचे विश्व की संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ और समृद्ध संस्कृति रही है हमारा देश विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता वाला देश रहा है यहाँ का शिष्टाचार, तहज़ीब, सभ्य संवाद, धार्मिक संस्कार, मान्यताएँ आदि दूसरे देशों के लिए उदाहरण रही हैं अब जब कि हर एक की जीवन शैली आधुनिक हो रही है तब भी देश का बड़ा हिस्सा आज भी अपनी पुरानी परंपरा और मूल्यों को बनाए हुए हैं.विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने देश के गौरव को शिखर पर रखा है.यहाँ महामारी के इस संकट में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा धमकी भरे अंदाज़ में माँगी गयी दवा हाइड्रोक्लोरोक्वीन को भारत सरकार के प्रधान मंत्री मोदी जी दे देते हैं वो देश की वसुधैव कुटुम्बकम’  की भावना को आहत नहीं होने देते और इसे अपना कर्तव्य समझते हैं.

इस देश की संस्कृति ज्ञानमय ही नहीं अपितु युतियुक्त कर्म करने की प्रेरणा देने वाली भी है । भारतीय संस्कृति का अर्थ ही है, सर्वांगीण विकास, सबका साथ । देश  की संस्कृति में न तो  छुआछूत को स्थान दिया गया है और ना ही हिन्दू और मुसलमान या अन्य किसी तरह के जातिगत भेद को बल दिया गया है.बावजूद इसके देश की संस्कृति को चंदलोग प्रायोजित तरीके से ख़राब करने का कुचक्र मौके-बेमौके करते रहते हैं ऐसे लोगों को इस संकट की घड़ी में इन मानवता के सच्चे धर्मावलम्बियों योद्धाओं से शिक्षा लेने की जरूरत है जब कथित धर्म के ठेकेदार घरो में बैठे है तो ये योद्धा इस महामारी से युद्ध कर लोगो की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाए मैदान में डटें हैं. मानवता के इन सच्चे धर्मावलम्बियों ने यह बता दिया है कि इंसानियत व मानवता ही सच्चा धर्म है इससे बढ़कर कोई धर्म नहीं है. दुनिया में कोरोना क्या कोई ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो इनसान को गिरा सके, हाँ इन्सान इन्सान द्वारा ही गिराया जाता है. दुनिया में ऐसा नहीं है कि सभी मानवता के सच्चे धर्मी ही है संख्या पाखंडियों और अधर्मियों की भी काफी हैं, यहीं नहीं बल्कि सारे विश्व में अच्छे-बुरे लोग है कहीं संस्कारों का चीरहरण हो रहा है तो कहीं खूनी रिश्ते ही खून बहा रहे हैं. इसी तरह हमारे देश में भी सर्वश्रेष्ठ और समृद्ध संस्कृति को चंद लोग बट्टा लगाने में जुटे हैं उनमें  दया ,धर्म ईमान का नामेानिशान मिट चुका है और वो खुदगर्ज हो गए हैं उनकी सोच मानवता को शर्मशार कर रही है निजी स्वार्थों के लिए वे जघन्य अपराध तक करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं वे देश के भाईचारे को ख़राब करने का समय समय पर षड़यंत्र रचने से बाज़ नहीं आ रहे ऐसे लोग मानवता के सच्चे धर्मावलम्बियों को भी निशाना बना रहे  है ये उन्हें मुख्यधारा से हाशिए पर धकेलने की कोसिस भी कर रहें हैं उंच-नीच की भावना के अलावा हिन्दू-मुस्लिम के बीच ये संघर्ष की फसलें भी बो रहें हैं जो कि किसी भी राष्ट्र के हित में नहीं है !

दुर्भाग्य यह है कि ऐसे लोगों को राजनीतिक संरक्षण भी मिलने लगा है जो किसी भी राष्ट्र के विकास व उत्थान के लिए काफी घातक है परिणामस्वरुप आज कहीं इनसान इंसानी रिश्तों को कलंकित करता दिख रहा  है तो कहीं भाई-भाई के खून का प्यासा ,जमीन जायदाद के लिए मां-बाप को ही मौत के घाट उतार दिया जा रहा है,घरों से बेटा बाप को बेघर किये दे रहा है,कलयुगी श्रवणों का आलम यह है की वे मां-बाप को तीर्थ कराने की जगह वृद्ध आश्रमों में भेज रहें हैं शायद यह बुजुर्गों का दुर्भाग्य है कि जिन बच्चों की खातिर वे भूखे-प्यासे रहे, पेट काटकर जिन्हे सफलता दिलवाई आज वही उनके दुःख का करण बन गयीं. बेशक ईश्वर ने संसार में करोड़ों जीव जन्तु बनाए, लेकिन इनसानी  कृति उसने अहम् बनाई इसे विवेक दिया है लेकिन ईश्वर की यह विवेककृति भी पथभ्रष्ट हो चली,अच्छाई बिलख रही है, भाईचारा, सहयोग, मदद एक अंधेर में सिमट गया हैं। आत्मा सिसक रही है। वर्तमान में अच्छे व संस्कारवान मनुष्य की कोई गिनती नहीं है। चोर उच्चकों ,गुंडे, मवालियों का आदर सत्कार हो रहा है, हंस भीड़ में खोते जा रहे हैं,कौओं को मंच मिल रहा है,संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं,संस्कारों का जनाजा निकाला जा रहा है, मर्यादाएं भंग हो रही हैं,अहिंसा-परमोधर्म का भाव विलुप्त हो रहा है लोग भूखे प्यासे मर रहे हैं और सम्पन्नता उन्हें दूर से निहार रही है मानव ‘एको ब्रम्ह द्वितीयो नास्ति’ ,खुदा का नूर ज़र्रे ज़र्रे में न मानकर मानव निर्मित तथाकथित ईस्वर को खुद ही बना रहा है और खुद ही मान भी रहा है.नतीजतन मानव मानव के बीच खाई बढ़ रही है जिसे पाटना अब जरूरी हो गया है इसके लिए भी मानवता के सच्चे धर्मियों को ही आगे आना होगा.इस वैश्विक महामारी के संकट से मानवता के सच्चे धर्मी जंग तो जीतेंगें ही आने वाला कल बेहतर होगा हम फिर से कुछ नया करेंगें लेकिन इस जंग से उबरने के बाद मानवता के सच्चे धर्मियों को देश की संस्कृति पर बट्टा लगा रहे और देश के भाई चारे को ख़राब कर रहे इन कथित धर्मावलम्बियों को भी सही राह पर लाना ही होगा जो कि एक चुनौती बनते जा रहे हैं ! आइये सच्चे धर्मावलम्बियों के कंधे से कन्धा मिला हम आप सब न केवल इस वैश्विक महामारी से जंग जीते बल्कि भारतीय संस्कृति के साथ खिलवाड़ कर रहे भटके लोगो को भी राह पर लाने का संकल्प लें !




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