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Saturday 30 May 2020
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*कोरोना आयातित है या प्रायोजित…….?

*कोरोना आयातित है या प्रायोजित…….?
आलेख -गौतम राणे सागर
कोरोना वायरस आया नहीं लाया गया है यह बात बेवजह नहीं बल्कि कुछ सबूतों की रोशनी में प्रस्तुत है । यहां कुछ विचारणीय प्रश्न है जिस पर सुराग रसी की जानी आवश्यक है ।
  पूरी पोस्ट पढ़िए और खुद फैसला कीजिए कि मेरा मत उचित है या अनुचित?
   BBC न्यूज के मुताबिक जनवरी  2020 से  मार्च 2020 तक विदेशों से लगभग 336 उड़ाने की भारत में लैंडिंग हुई । चीन, ईरान और इटली से अपने नागरिकों को लाने के लिए विशेष हवाई जहाज भेजे गए थे।
  27/03/20 के दैनिक जागरण के समाचार पत्र में लव अग्रवाल और डॉ. रमन गंगा खडेकर के बयान के अनुसार कुल 64,000 से अधिक लोग विदेशों से भारत आए।
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   इसमें से महज़ 8 हज़ार लोगों को ही अलग-थलग रखा गया, बाकी कम्युनिटी सर्विसेज़ मे है। इनकी संख्या लगभग 56,000 के करीब हैं।
भारत में कॅरोना वायरस का सबसे पहला मरीज़ केरल में 30 जनवरी को मिला जो चीन के वुहान शहर मे मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था, वह वुहान से भारत वापस लौटा था। यही से भारत में कॅरोना वायरस से होने वाली मौत का खाता खुला ।
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  भारत में चीन के वुहान शहर से 23 जनवरी तक 60 छात्र भारत में बिना किसी जाँच के वापस आ गए कैसे?
 उस वक़्त कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर मे अपने ऊफान के चरम पर था और भारत के करीब 700 छात्र वुहान मे मेडिकल की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे,  इस खबर ने भारत में खलबली मचा दी। सभी एक सुर में अपने-अपने परिजनों को याद कर अपनी-अपनी आप बीती बतानी शुरू की । ज्ञातव्य है कि ये सभी पूंजीपतियों की औलादें थी।
आनन फानन में केंद्र सरकार ने चीन के वुहान शहर में
छुपकर बैठे इन 700 पूंजीपतियों के बच्चों के लिए (हॉट लाइन ) जारी कर दी  ताकि वह कोरोना आयात कर भारत ला सकें!
हाॅटलाइन नम्बर:-
(1) 8618612083617
(2)8618610952903
(3)8618612083629
इन तीनों हॉट लाइन पर चीन के वुहान शहर से 600 के करीब कालें दर्ज की गई ।
27 जनवरी 2020 को चीन के वुहान शहर मे छुपे 250 भारत के छात्रों को लाने के लिए एअर इंडिया का 423 यात्रियों की क्षमता वाला बोइंग B-747 विमान भेजा गया।
इसके बाद एअर इंडिया का 366 यात्रियों की क्षमतावाला एक दूसरा विमान फिर भेजा गया ताकि बाकी छुपे छात्रों को ढूढ कर  लाया जाये और उनसे consignment की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके ।
5 डाक्टरों की एक टीम भी इन छात्रों की मेडिकल जांच के लिए भेजी गई, परन्तु वह 5 डाक्टर कौन-कौन थे,उनके पास कोरोना वायरस की जाँच करने वाली कौन सी किट थी—-गोपनीयता के ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है ।
चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्त्री के बयान के अनुसार कोई भी भारतीय छात्र इस कोरोना वायरस से संक्रमित नही है।
इनके बयान पर गौर करें;
चीन के  वुहान शहर से आए छात्र में  कोरोना वायरस का पहला केस 30जनवरी 2020 भारत में मिला था, जिसकी बाद में मौत हो गई ।
इसके बाद दूसरा कोरोना पीड़ित छात्र भी उन्हीं छात्रों में से एक निकला जो चीन के वुहान शहर से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटे थे ।
केंद्र सरकार ने तब तक कोई लॉक डाउन नही किया, कोई रेल, बस सेवा नही रोकी….. क्यों….?
मार्च के दूसरे सप्ताह तक भारत में 133 लग्ज़री  विमानों ने लैंडिंग किया था।
 चीन, इटली, ईरान से बहुत से भारत मूल के लोग भारत वापस आये उन्हें 14 दिनों तक क्वारंटीन करने की बरक्स अपने-अपने घर जाने क्यों दिया गया? याद रहे इन तीनों देशों में उस समय कोरोना वायरस अपने उफान पर था।
 NRI और उद्योगपतियों के बच्चों के माध्यम से धीरे धीरे परन्तु लगातार कोरोना वायरस भारत में बड़ी संख्या में प्रवेश करता रहा। जब सारी दुनिया कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरत रही थी,तब हम 24 फ़रवरी 2020 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो दिवसीय भारत दौरे को महिमामंडित कर रहे थे । पहला कार्यक्रम गुजरात के अहमदाबाद मे सम्पन्न हुआ, जहाँ भारत की नामचीन हस्तियों के साथ लाखों की संख्या में अन्य लोग भी मौजूद थे।
इस कार्यक्रम को सम्पन्न करने में 120 करोड़ रुपए खर्च हुए, यह पैसा किसका था और इस दौरे से देश को क्या लाभ मिला ।
डोनाल्ड ट्रंप आगरा के बाद दिल्ली पहुँचते हैं । हजारों की संख्या में सुरक्षा कर्मी और शासन-प्रशासन,पूरा मंत्रिमंडल के सदस्य बिना किसी मेडिकल सुरक्षा के आते जाते रहे। क्यों?
10 मार्च को दैनिक जागरण में एम्स के निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने एडवाइज़री जारी करते हुए बताया कि कोरोना वायरस जम्मू से केरल तक पसरा है । समाचार पत्र ने इस ख़बर को प्राथमिकता दी थी ।
 इसी दैनिक जागरण का अपना मत था, कि होली जनमानस के लिए सालभर का त्यौहार है कोरोना वायरस से बिल्कुल भी न डरने की आवश्यकता नही है ।
 दैनिक जागरण के दावे के समर्थन में 13 मार्च को केंद्र सरकार ने खुद भी कहा कि कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है।
जबकि 13 मार्च तक मे भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की संख्या 60 तक पहुँच चुकी थी।
————————-भारत में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों और अन्य कार्यक्रमों पर नज़र डालते हैं;
13 मार्च 2020 को कनिका कपूर ने कानपुर नगर में अपने मामा के घर पर कार्यक्रम किया था, 13,14,15 मार्च तक कई अन्य पार्टियों में शिरकत किया। वह इन कार्यक्रमों में लगभग 400 लोगों के संपर्क में आई ।
14 मार्च 2020 को निजामुद्दीन के मरकज़ मे अधिवेशन शुरू हुआ। 15 मार्च 2020 को निजामुद्दीन मरकज़ का अधिवेशन खत्म हो गया।
16 मार्च2020 को हिन्दू महासभा की तरफ से गौ मूत्र पार्टी आयोजित की गयी । 16 मार्च 2020 को दिल्ली सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों को बंद करा दिया ।
17 मार्च 2020 को तिरुपति मे 40,000 लोग जमा थे। 18 मार्च 2020 को दूसरे दिन भी तिरुपति मे लगभग 40,000 लोग बने रहे।
साईं मंदिर में भी कुछ ऐसी ही भीड़ थी।
वैष्णो देवी मे सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक 8500 लोगों ने पंजीकरण कराया; केंद्र सरकार की सूचना के बाद भी इनको दर्शन के लिए जाने दिया गया। भारत के लगभग सभी धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ रही थी।
19 मार्च 2020 को तिरुपति सहित वैष्णों देवी के मंदिर बंद भी किए गए। 21 मार्च तक  करोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश नहीं की गई ,सिवाय साहब के राष्ट्र के नाम संदेश देने के:-इसमें इन्होंने थाली और ताली बजाकर कोरोना चुहिया को भगाने की तरकीब बता ही दी थी । फलतः
मेलों और बाजारों का आयोजन होता रहा पिक्चर हाल और मॉल सब जनता के लिए खुले रहे।
आखिर समस्त विषादों से मुक्ति का वह अप्रतिम दिन
22 मार्च 2020 को जनता कर्फ़्यू आ ही गया। शाम 5 बजे अवतारी साहब के मुक्त कंठ से सुनाए गये मुक्तक के अनुसार सांप,छछूदरों ने भी  थालियां और तालियाँ  बजानी शुरू कर दी । उसके बाद लोग हजारों की संख्या में सैकड़ो पर उतरे
DM ,SP तक इस मूर्खतापूर्ण कार्य को महिमामंडित करने
में हिस्सेदार बने।
 DM, SP को निलंबित भी किया गया,परन्तु इनके समर्थक नेताओं व अति उत्साही भीड़ का पुलिस ने खुला समर्थन भी किया।
23 मार्च 2020 को मध्यप्रदेश मे जाहिल शिवराजसिंह ने मंत्रिमंडल के साथ शपथ ग्रहण किया। कोरोना भी इनकी फ़ितरत के सामने नतमस्तक रहा ।
23 मार्च 2020 और 24 मार्च के बीच महज़ 4 घंटे के अंतराल पर 24 मार्च 2020 की मध्यरात्रि से लॉक डाउन लागू कर दिया  गया।
25 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ अपने सैकड़ो समर्थकों को साथ में लेकर अयोध्या मे गए, पूजा व दर्शन किया । आयातित कोरोना योगी से भी डर गया । क्यों,जानतें हैं? शायद उप्र पुलिस से भयभीत हो गया हो!
24मार्च 2020 की मध्यरात्रि से लॉक डाउन तब लागू किया जाता है जब बात हाथ से निकल जाती हैं। इसीलिए साहब ने ताकीद कर दिया था कि इसे एक तरह की इमरजेंसी मान सकते हैं।
  अब आप सोचे कि एक तरह का आचरण करने वाले इन जाहिलों को हिन्दू-मुस्लिम रूप क्यों दिया जा रहा है? दो धर्मो के बीच की सौदागरी कैसे की जाती है अंतर बताने कि एक कोशिश  करता हूँ।
   तिरूपति,साईं मंदिर,गुरूद्वारा मजनूँ टीला और निजामुद्दीन मरकज़ हर जगह की स्थिति लगभग एक जैसी थी, लेकिन भेदभावपूर्ण रवैया के कारण हिन्दू-मुस्लिम कैसे बनाया गया जानिए………..
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 वैष्णों देवी मे 400 श्रद्धालुओं के (फसें) होने की ख़बर आई थी। क्या है पूरा मामला जानते हैं…..
केंद्र सरकार की तरफ से 18 मार्च 2020 को वैष्णों देवी प्रबंधन को सूचित किया जाता है कि कोरोना वायरस के चलते वैष्णों देवी मंदिर को बंद कर दिया जाए।
लेकिन यह सूचना मिलने के पहले ही 18 मार्च 20 की सुबह 5  बजे से लेकर दोपहर 2 तक 8500 लोगों का दर्शन के लिए पंजीकरण किया जा चुका था, वैष्णों देवी मंदिर के प्रबंधको के बयान के अनुसार पंजीकरण के बाद दर्शन करने से रोका नही जा सकता है । वैसे सारे लोग वापस चले गए थे, परन्तु  बिहार से आये 400 लोगों का जत्था (फंस) गया। वैष्णों देवी के दर्शन करने और वापस आने मे दो से तीन दिन लग जाते हैं।
 इन परिस्थितियों के आलोक में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि लोग 18 मार्च 20 को गए होगें, वापस आते आते-आते 20 या 21 मार्च हो गई होगी तथापि 22 मार्च से जनता कर्फ्यू लागू हो गया था। उसके बाद लगातार 23 मार्च की शाम तक लागू रहा, महज़ 4 घंटो के अंतराल पर ही 21 दिनों के लिए लॉक डाउन लागू का फरमान सुना  दिया गया। पता नहीं इन 4 घन्टो मे उनको कोई साधन मिला होगा या नही।  बिहार से आए सभी 400 लोग फंस गए। जब तक उनके पैसा रहा होगा, तब तक काम चल गया ।
   उसके बाद जो जहाँ रुके थे, उसके मालिको ने जगह खाली करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। इनकी पीड़ा सुनकर स्थानीय न्याय मित्र मोनिका कोहली और उनके साथी वकीलों ने जम्मू हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जम्मू कश्मीर के हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और दूसरी जज सिंधु शर्मा ने तत्काल वीडियो कॉन्फेन्सिंग से सुनवाई करते हुए, मोनिका कोहली और अन्य वकीलों की दलीलें सुनी और दोनों जजों ने 11 पेज का निर्णय सुनाया। उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश ने यह सुनवाई अपने आवास से की ।
   जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 30/03/2020 सोमवार को संघ शासित प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार के सभी 400 तीर्थयात्रियों को होटलों से निकाले न जाने की व्यवस्था के साथ उनके भोजन पानी व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करें।
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ये तो हुआ  हिन्दुओं का पक्ष:-
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अब दूसरा पक्ष यानि मुस्लिम की बात भी कर लेते हैं। जिन्हें जाहिलों व कोरोना तिज़ारत के सौदागरों के खिताब से नवाजा जा रहा है;  बहुत से लोगों को जानकारी नहीं होगी।
इस समय पूरे देश में निजामुद्दीन मरकज़ बड़ी जोर शोर से चर्चा में है। उसका सबसे बड़ा कारण गोदी मीडिया के जाहिल एंकर
हैं।
(मरकज़ ) शब्द से बहुत से लोग अपरिचित होगें।
मरकज़ शब्द का मतलब होता है कि वो जगह जहाँ से सभी मस्जिदों के लिए एडवाइज़री जारी होती हैं। या दूसरे शब्दो मे कहा जाये तो मुख्यालय जो हर शहर में होता हैं।
देश ही में नही विदेशों में भी होता हैं। सबसे बड़ी मस्जिद
मरकज़ के तबलीगी जमात या (जमाती) ।जमाती वो लोग होते हैं जो इस्लाम धर्म की जानकारी देने का काम करते हैं। नमाज़ कैसे पढ़ा जाए, क्या कमियां होती हैं वह बताने का काम करते हैं। या सरल शब्दो मे कहा जाए तो धर्म की सही जानकारी देने वाले लोगों को ही जमाती कहा जाता है । जब मरकज़ अधिवेशन 15 मार्च को खत्म हो गया था। तब फिर ये इतने सारे लोग कहाँ से रुक गए?
रुकिए! मेरी तरह आप भी भ्रम में पड़ गए न?
अधिवेशन होना और जमाती होना दोनों अलग-अलग है ।
 यह 100 साल पुरानी परंपरा है, भारत में ही नहीं, अपितु पुरी दुनिया में ये परम्परा प्रचलित है। हर एक जमाती 30 दिनों से लेकर 4 माह तक रुकते हैं । उनको कहाँ जाकर धर्म की जानकारी देनी है ये बात भी मरकज मस्ज़िद वाले ही बताते हैं।
इसीलिए ये लगभग 1400 जमाती रुकें रहे।  इनके एक जगह पर रुके होने की सूचना थाने व SDM को दी गई थी । विदेश से अगर कोई यात्री भारत आता है तो उसका लेखा-जोखा सरकार के पास रहता है कि वह कहां पर है और कितने दिन से है।
 16 मार्च को दिल्ली सरकार 50 से ज्यादा व्यक्ति जमा होने पर रोक लगा देती हैं। तदोपरान्त 21 मार्च को धारा 144 लगा दी जाती हैं।
 *22 मार्च को जनता कर्फ़्यू लागू होता है*।
 *24 मार्च से  लॉकडाउन का प्रारब्ध*।  25 मार्च को मरकज़ के प्रबंधक मौलाना शाद के बेटे मौलाना यूसुफ ने पुलिस और SDM को लेटर लिखकर सूचित किया कि इन सभी लोगों को घर भेजने की अनुमति व लाकडाऊन पास का इंतजाम कर दें ताकि इन्हें अपने संसाधनों से इनके घरों तक पहुंचा दिया जाए कि गुज़ारिश की।
   इसी मरकज़ से  एक व्यक्ति की तमिलनाडु में मौत हो जाती हैं, मौत का कारण अभी तक अज्ञात है। 29 मार्च को मरकज़ एक पत्र दिल्ली के कमिश्नर को भी लिखता हैं। जिसमें मरकज़ मे शामिल एक व्यक्ति की मौत होने की सूचना दी जाती हैं।
लेकिन मरकज़ से सटी दीवार का पुलिस थाना और उसकी  पुलिस सोती रहती हैं।
 अहम प्रश्न यह है कि 25 मार्च को दिये गए पत्र पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जबकि 25 मार्च को ही तहसीलदार ने बिल्डिंग का दौरा किया था और 26 मार्च को SDM भी मरकज़ पहुँचे थे। 28 मार्च को WHO की टीम भी मरकज़ मे गई थी।
 27 मार्च को 6 और 28 मार्च को 33 लोग जाँच के लिए अस्पताल भेजे गए थे। मरकज़ मे (छिपे) या फिर (फंसे) हुए विदेशियों ने अपने दूतावास से संपर्क किया या नही ये बात अभी तक स्पष्ट नहीं हुई हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि बड़ी सोची समझी साजिश के तहत इसको मज़हबी रंग दिया गया है?
तेलंगाना से एक अपुष्ट खबर आती है निजामुद्दीन मरकज से लौटे 6 लोगों की मौत कोरोना वायरस से हो गई है। इसी के बाद ज़ी न्यूज़ ,रिपब्लिक TV9 भारतवर्ष समेत हिंदी भाषा के सारे दंगाई चैनल में मरकज को देशद्रोहियों का अड्डा बताने की होड़ लग गये ।
virus  infected मीडिया द्वारा जो आधी अधूरी जानकारी किसी कहानी की तरह पेश कर फैला दी गई आखिर इसकी पटकथा लिखी कहाँ गई ?  थाने में सूचना देने के बाद भी  निज़ामुद्दीन में  विदेशी छिपे होते हैं, लेकिन वैष्णो देवी में विदेशी श्रद्धालु फँसे होते है इस बहरत से किसे रिझाने की कोशिश की जा रही है? एक बात पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ कि इस पटकथा से दिल के गहरे ज़ख्मों के मरहम की तलाश की गई है । संभवतः मुस्लिमों का जो हौसला दिल्ली हिंसा, शाहीन बाग में बैठ कर नही टूटा उसे इस झूठी कहानी से तोड़ने का फरेब किया गया हो ।
कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन मे सबसे ज्यादा मुसलमान को गरीबों की मदद करते हुए देखा गया है।
यही बात हिंदू मुस्लिम की राजनीति करने वाले कुछ चंद लोगों का हाजमा खराब करने के लिए काफ़ी है । दोनों पक्ष की बात  रखने का मकसद सिर्फ इतना है कि एक को न्याय पालिका से बिना कुछ कहें, सब कुछ मिल गया। पर दूसरे पक्ष की सूचना देने के बाद भी इस कोरोना वायरस को फैलाने का दोषी सच जाने बिना ही मान लिया गया ।
 संभव है कि असफलताओं की ढेरों पर बैठी केन्द्र सरकार कहीं मरकज का मामला उठाने के पीछे गोबर मीडिया का हाल में हुई घटनाओं से ध्यान भटकाने का यत्न तो नहीं है? लाकडाउन के बाद लोगों के सामने भूखे मरने की स्थिति पैदा होना, खाने पीने के सामानों का महंगा हो जाना, बड़ी  तादात में लोगों का अपने घरों के लिए पैदल सफर करना और सरकार  की तरफ से लोगों को घर पहुंचाने के लिए  कोई इंतजाम न होना और 29 लोगों का घर जाते हुए रास्ते में मर जाना, ये कुछ ज्वलंत सवाल है जो सरकार को कटघरे में खड़ा करती है ।
      पीएम रिलीफ फंड होते हुए भी मोदी जी का नया पीएम केयर फंड बनाना जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है और  जिसके मालिक केवल 3 व्यक्ति  हैं । अमित शाह ,राजनाथ सिंह निर्मला सीतारमण ये तीनो इस ट्रस्ट के व्यक्तिगत ट्रस्टी है ।
इस बात का सोशल मीडिया में जोर शोर से मुद्दा बनाया जाना,
भारत में कोरोना वायरस से निपटने में मेडिकल उपकरणों की कमी होते हुए दूसरे देशों को मेडिकल उपकरण वेंटीलेटर बेचने के कुकृत्य को अंजाम देने की साज़िश से पर्दा उठने से कहीं सरकार ही वेंटिलेटर पर तो नही चली गयी थी?
    भारत के पास 1 लाख  वेंटिलेटर ventilator नहीं है जबकि करोना वायरस महामारी को देखते हुए भारत को 6 लाख  वेंटीलेटर की जरूरत है👇👇
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गोबर मीडिया ने क्या किया है, एक बानगी आपको बता देता हूँ।
सुभाष चंद्रा बीजेपी के सांसद इनका एक न्यूज चैनल है।
जिसका नाम है Zee News
इनकी करतूत देखिए
अपने न्यूज़ चैनल पर समाचार मे बता रहे हैं कि इस मरकज़ से
1684 लोग निकल कर कहाँ कहाँ गए पूरे भारत में……
जाहिर सी बात है कि ये लिस्ट मरकज़ से ही मिली होगी।
इनका मतलब कि मरकज़ वालों ने अपनी लिखा पढ़ी कर रखी थी। मरकज वाले हर जमाती के आने-जाने का हिसाब किताब रखते हैं।
लिस्ट कुछ इस प्रकार है……
हिमांचल- 86
पंजाब- 09
राजस्थान – 156
महाराष्ट्र – 109
कर्नाटक – 45
केरल – 15
हरियाणा- 22
उत्तराखंड- 34
मेघालय- 05
राँची – 46
पश्चिम बंगाल – 156
असम – 216
बिहार – 86
मध्यप्रदेश – 107
ओडिशा – 15
तमिलनाडु – 501
हैदराबाद – 55
अंडमान निकोबार – 21
कुल 1684 लोग
इस न्यूज़ चैनल की बात मान लेता हूँ, सही है।
तो क्या ये न्यूज़ चैनल वाला चीन के वुहान शहर जहाँ से इस कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी, वहाँ से आये 600 छात्रों, कनिका कपूर, केरल,राजस्थान व अन्य धार्मिक स्थलों से लाखों लोग अपने-अपने अपने निवास स्थानों को गए हैं, कौन कहाँ और कितनी संख्या में गया है, बता सकते हैं?
अगर हाँ तो इसी तरह उनकी भी लिस्ट जारी होनी चाहिए …..अगर नही ?
तो ये भेदभावपूर्ण बर्ताव कर समाज में पूंजीपतियों का खुला समर्थन करते हुए, सारा दोष मुस्लिम समाज पर थोप देना कहां का न्याय है, इस देश में कानून व्यवस्था जिंदा है या नही ? कृ मेरे सवालों को आप भी दोहरायें;


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A group of people who Fight Against Corruption.


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