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कोरोना के डंक से सिसकती दुनियां

दुनिया के करीब १९९ देश कोरोना वायरस के जहरीले डंक से घायल सहमी और सिसकती जिन्दगी को बचाने की ज़द्दोजहद  में लगे हैं अब तक करीब छ: लाख लोग इसकी जद में आ चुके है और इस लेख को  लिखे जाने तक लगभग २७,३७० लोगो की जिदगी यह लील चुका था वहीं करीब १,३३,३६५ को इसके संक्रमण के बाद डाक्टरों द्वारा बचाया भी गया है !

चीन के वुहान से चले इस वायरस ने वर्तमान में ब्रिटिस,जर्मनी,स्पेन,फ्रांस,स्विटजर्लैंड इटली जैसे तमाम सुविधा संम्पन देशों के साथ सुपर किंग अमेरिका की भी नींदें उड़ा दी हैं यहाँ इसके जहरीले डंक से सर्वाधिक लोग प्रभावित हैं. भारत भी इसके डंक से अछूता नहीं बचा है यहाँ भी इसके करीब  ८९० कोरोना संक्रमित मेरे लिखे जाने तक दर्ज हो चुके हैं और २० लोगों की मौत हो चुकी है तथा करीब ७३ लोगों को रिकवर भी किया जा चुका है  !

डब्लू एच ओ की माने तो विश्वव्यापी इस संकट में कोरोना वायरस से लड़ने की तैयारी करने में भारत ने कुछ देर जरूर कर दी है लेकिन इसके कहर से बचने की तैयारी में अब जुट गया है यहां फिलहाल  २१ दिनों के लाकडाउन का आदेश बीते २४ मार्च की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया मालुम हो कि यहाँ कोरोना वायरस का पहला पोजिटिव मामला ३० जनवरी को ही केरला में संज्ञान में आ चुका था यहाँ एक छात्र जो कि वुहान “चीन”  से आया था उसमे कोरोना की पुष्टि हुई थी ! इस मामले में वैज्ञानिक शोधार्थियों की एक टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘सीओवी-आईएनडी-१९’ में कहा गया कि महामारी के शुरुआती चरण में अमेरिका और इटली के मुकाबले भारत प‚जीटिव मामलों को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफल रहा लेकिन जरूरी चीज जो छूट गई है वह है इस वायरस से सचमुच में çभावित मामलों की संख्या को जानना की वह कितनी है…? शोधार्थी वैज्ञानिकों की इस टीम में अमेरिका के ज‚न ह‚पकिंस विश्वविद्यालय की देबश्री र‚य भी शामिल हैं वैज्ञानिकों के मुताबिक जांच के दायरे, जांच के नतीजों की सटीकता उन लोगों की जांच पर निर्भर करती है जिनमें इस वायरस से संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हों रिपोर्ट मेंइसका भी जिक्र है कि भारत में जांच किए गए लोगों की संख्या तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। व्यापक जांच न होने की स्थिति में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण को रोक पाना असंभव होता है ऐसे में यह आकलन नहीं कर सकते कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधा केंन्द्रो  के बाहर कितनी संख्या में यहाँ संक्रमित व्यक्तयों की  हैं लिहाजा  भारत के लिए यह जरूरी है कि वह देश में कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से फैलने से पहले बेहद कड़े उपायों को अपनाए इन शोधार्थियों द्वारा यह भी शंका जाहिर की गयी कि संभव है भारत में मई महीने के मध्य तक कोरोना वायरस से संक्रमित पुष्ट मामलों की संख्या एक लाख से लेकर १३ लाख तक भी हो यह भी बताते चलें की इन  वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में १६ मार्च तक भारत में दर्ज मामलों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया है तथा किसी एक समय पर संक्रमित संख्या का अनुमान लगाया और भारत के लिए लगाए गए उन अनुमानों की तुलना अमेरिका व इटली से की। वैज्ञानिकों में दिल्ली स्कूल अ‚फ इकोन‚मिक्स, नयी दिल्ली और मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका के वैज्ञानिक भी शामिल रहे !

बताते चलें कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने २२ मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया जिसका लोगों ने पूरी तरह पालन तो किया लेकिन कोरोना वायरस के देश में बढ़ते संक्रमण को गंभीरता से नहीं लिया और दिन भर एकांतवास रहे लोग शाम ५ बजते ही सारे किये कराये पर ताली और थाली पीटते जुलुस के शक्ल में सड़कों पर उतर आये उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तो जिले के आला अधिकारी तक जुलूस में शामिल दिखे जिन्हें सांसद वरुण गांधी की शिकायतोंपरांत शर्मिन्दगी का सामना भी करना पड़ा    तत्पश्चात मंगलवार रात देश के प्रधानमंत्री मोदी को भारत में २१ दिनों के लिए संपूर्ण ल‚कडाउन की घोषणा करनी पड़ी क्यों कि कोरोना वायरस से भारत में फैलते संक्रमण को लेकर डब्लू एच ओ भी भारत को लगातार चेतावनी दे रहा था इधर वैज्ञानिक शोधार्थी विश्व बैंक के डेटा का जिक्र करते मीडिया से यह सार्वजनिक कर ही चुके थे कि भारत में çति १००० व्यक्ति बेड की संख्या सिर्फ ०.७ है, जबकि फ़्रांस में यह ६.५, दक्षिण कोरिया में ११.५, चीन में ४.२, इटली में ३.४ और अमेरिका में २.८ है ऐसी स्थित में भारत के लिए बिना  कड़े कदम उठाये कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकना एक टेढ़ी खीर ही है !

लाकडाउन एक तरह की आपातकालीन व्यवस्था को कहा जाता है. जिसके तहत सार्वजनिक यातायात के साथ-साथ निजी प्रतिष्ठानों को भी बंद कर दिया जाता है.पिछले तीन महीने से विश्वभर में फैले इस महामारी से निपटने के लिए ज्यादातर देशों ने लाकडाउन का ही तरीका अपनाया हैं.इस लिहाज से अब ये शब्द जनता के लिए नया नहीं रह गया है लेकिन मोदी द्वारा जनता कर्फ्यू के दौरान ही यदि देश के लोगों को यह आगाह कर दिया जाता कि देश को लाकडाउन किया जायेगा तो शायद आज जो दिहाड़ी मजदूर और गरीब लम्बी दूरी पैदल तय कर घर जाने को भूखे प्यासे लाचार परेशांन सड़कों पर दिख रहे हैं इन्हें इतनी जíोजहद का सामना ना करना पड़ता,लेकिन दिन व दिन कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया जाना भी सरकार  के लिए जरूरी हो गया था क्योंकि धीरे धीरे कोरोना संक्रमित लोगो की संख्या लगातार बढ़ रही थी स्थित को भांप शिक्षार्थी मेडिकल डाक्टरों नर्सों की छुट्टियां भी टाल दी गयी अस्पतालों की संख्या बेडो की संख्या और बेन्टीलेटर भी बढाने पर जोर दिया जाने लगा वावजूद इसके डाक्टरों की सेफ्टी किट के अभाव को लेकर डाक्टरों द्वारा सिस्टम पर उंगलिया उठी दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में काम करने वाले ड‚क्टर देबब्रत महापात्रा ने तो अपने फेसबुक टाइम लाइन के जरिए प्रधान मंत्री जी को खुली चिट्ठी तक लिख डाली तथा यहाँ तक कह डाला राष्ट्रीय राजधानी में केंन्द्र  सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक अस्पताल के पीडीऐट्रिक आईसीयू में काम करने वाला ड‚क्टर होने के नाते, मैं आपका ध्यान जमीनी हालात की ओर दिलाना चाहता हूं. हमारे पास सामान्य मास्क तक पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं. हमें अपने गाउन २-३ दिन तक दोबारा इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं, जो बिना गाउन के काम करने के ही बराबर है. सभी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट की सप्लाई बहुत कम है. अगर देश की राजधानी के बीचों-बीच स्थित एक अस्पताल की हालत ये है तो हम देश के दूसरे हिस्सों के लिए उम्मीद ही क्या की जा सकती है. बात ये है कि अगर आप इस महामारी से निपटने में हेल्थ सिस्टम की मदद करना चाहते हैं तो बाल्कनी में खड़े होकर ताली बजाने की जगह आपको उन्हें उपकरण देने चाहिए. मुझे पूरा  भरोसा है कि ये खुला ख़त आप तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन फिर भी इस उम्मीद में ये ख़त लिख रहा हूं कि दूसरे डाक्टर और आम नागरिक खड़े होकर ताली बजाने की जगह एक प्रभावी समाधान के लिए एकजुट होंगे. अगर आप स्वास्थ्य कर्मियों को वो चीजें नहीं दे सकते, जो उन्हें अपनी और देश की सुरक्षा के लिए चाहिए तो तालियां बजाकर उनका मजाक ना उड़ाएं.

और भी कुछ डाक्टरों द्वारा कुछ इसी तरह ही कहा गया जो की अति विचारणीय भी है भारत को लाकडाउन हुए अभी चार दिन ही गुजरे हैं लोग परेशान हो उठे हैं जब कि महामारी की स्थित को देखते हुए केंæ व राज्य सरकारों ने लोगों को परेशांन ना होने एवं घर पर ही जरूरत की चीजों को पहुंचाए जाने का भरोषा ही नहीं दिया है बल्कि करना भी शुरू कर दिया है भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार  को सभी वित्तीय संस्थाओं को कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसके बाद सरकार द्वारा लिए गए लाकडाउन के फैसले को देखते हुए सभी ऋणों के लिए तीन महीने की मोहलत देने की भी अनुमति दे दी है। केंæीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रास्तों में अटके मजदूर गरीब लोगों को उनके गंतब्य तक पहुँचाने में संभावित प्रयास की बात कही है इधर भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार सार्स-सीओवी-२ वायरस की एक माइक्रोस्कोपी तस्वीर का खुलासा भी किया है वैज्ञानिकों ने केरल में ३० जनवरी को सामने आए कोरोना वायरस के मरीज के गले की खरास का जो नमूना लिया था उस नमूने से यह तस्वीर सामने आई है। इसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान जर्नल (आईजेएमआर) के नवीनतम संस्करण में प्रकाशित किया गया है।

हालात यहाँ तक आ गएँ हैं कि धीरे धीरे कोरोना वायरस की चपेट में केवल आम ही नहीं बल्कि खास सेलिब्रिटी नेता व खिलाड़ी भी आ चुके हैं ब्रिटिश शाही परिवार तक यह वायरस पहुँच चुका है ब्रिटेन की मीडिया ने इसका खुलासा कर दिया है  कि ब्रिटिश शाही परिवार के प्रिंसचार्ल्स कोरोना वायरस पाजिटिव पाए गए हैं प्रधानमंत्री बोरिस जानसन भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। शुक्रवार २७ मार्च को उनकी रिपोर्ट प‚जिटिव आने की खबर आई। भारत के  दक्षिण मुंबई के एक अस्पताल के ह्रदय रोग सर्जन की कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण गुरुवार सुबह मृत्यु हो चुकी है डाक्टर असरफ लोगो  चिकितसा में लगे थे उनकी माँ की मौत हो गयी लेकिन मरीजो को वो छोडकर नहीं गए बाद में माँ का अंतिम संस्कार कर वो तुरंत फिर सेवा में आ गए उनका कहना था इस समय यह त्याग देश के लिए जरूरी है  !

हालात बिगड़ रहे हैं भारत सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण तथा इसकी रोकथाम के लिये लगाये गये लाकडाउन से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम करने के लिये गुरुवार को बहुप्रतीक्षित आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा भी कर दी है मगर आम आदमी मौजूदा स्थित से डरा सहमा सा है यहाँ अभी से ही दिहाड़ी मजदूर गरीब तबके के लोग भूंख के शिकार होते नजर आने लगे है जब की राज्य सरकारे घर घर राहत सामग्री पहुंचाने की कवायद में लगी हैं, मौसम ने अलग  यहाँ किसानो की कमर तोड़ कर रख दी है बेमौसम बरसात और ओलाब्रष्टि ने यहाँ फसलों को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया है घरों को जा रहे कुछ मजदूर सड़क दुर्घना के शिकार भी हो गए हैं किसानो के खाते में भी जल्द ही राहत राशि सरकार ने भेजने की तैयारी की है सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद आम आदमी डरा सहमा सा है घर घर में पूजा प्रार्थना दुवाओं का सिलसिला शुरू है सब यही चाह रहें है की विस्वव्यापी इस महामारी से ईस्वर सबको निजात दे !

 

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