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आज ‘मन की बात ‘ नहीं बल्कि दिल की बात

संविधान दिवस 26 जनवरी 2020 डॉ फ़िरोज़ एम अल-होदा ने ‘मन की बात को दिल की बात को ‘व्यंगात्मक तरीके से  देश के मुखिया से उन्ही के लहजे में कुछ इस तरह समर्पित की .

मेरे प्रिय देशवासियों ,आज का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में बहुत ही अहम् है आज हम सब भारत के संविधान के रचना की 71त्रवा पर्व मना रहे हैं. वैरिस्टर बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान यानि इंडियन सेक्युलर सोसलिस्ट रिपब्लिक घोषित होने का पर्व,आज के  दिन  हम सभी भारत के लोग हर साल इस पर्व का तहेदिल से इस्तकबाल करते हैं तथा आजादी का जश्न  मनाते है .

मेरे प्यारे देशवासियों  एवं मित्रों आज दिल की बात आपके सामने कहने का मन कर रहा है जो कि पिछले पांच सालों में आपसे नहीं कर सका वैसे ‘मन की बात ‘ करते हुए करीब 60 एपीसोड पूरे कर लिए और यदि आगे भी मैं देश का मुखिया बना रहा तो मन की बाते आपसे यूँ ही करता रहूँगा .लेकिन आज के इस खुशी के पर्व पर मैं आप लोगों से ‘दिल की बात’ करना चाहता हूँ पिछले दिनों मैं अपनी माता जी से मिलने अपने गृह जनपद गया हुआ था माँ ने मेरे माथे पर चिंता की लकीरें देखी माँ ने पूछा क्या बात है बेटा तू इतना बड़ा आदमी होकर मुझे परेशान सा क्यों दिख रहा है .मैंने कहा नहीं माँ ऐसी कोई बात नहीं लेकिन माँ नहीं मानी…. उसने फिर पूछा क्या तेरा बगलगीर अमितवा तुझे परेशान कर रहा है फिर भी मैंने कहा नहीं माँ वो बहुत बढ़िया आदमी है. माँ बोली तो फिर तेरी आँखों में ये उदासी मुझे क्यों दिख रही है .

आखिर मित्रों माँ  के सामने तथा मेरी चहेती मीडिया के सामने मैं खामोश नहीं रह सका और माँ को मैंने उनके कानो में अपने दिल की बात कह दी .

माँ तो माँ है उसने एक प्यार का इज़हार करती चपत मेरे गालों पर लगाई .गालों पर चपत लगते ही माँ बोली तू मूर्खता ना कर कोई परेशानी है तो अपनों के सामने कह डाल सब तुझे कितना चाहते हैं तेरी उदासी ख़त्म होगी अगर तू अपनों के बीच दिल की बात करे… मन की बातें तो करता ही रहा है तू  अब अपनों से दिल की बातें कर .

मित्रों मैं प्रधान तो बन गया लेकिन अभी तक प्रधान सेवक नहीं बन सका यहाँ  तक  कि चौकीदार  भी नहीं भाई लोग चौकीदार चोर है कहने से बाज़ नहीं आ रहें हैं सच में मैं उदास हूँ अब आप लोग ही  इंसाफ कर सकते हैं इसलिए आज माँ के आशीर्वाद से आप सबके सामने मैं अपने दिल की बात रखना चाहता हूँ जिससे मेरे मन को शुकून मिल सके और मेरे माथे से उदासी की लकीर हट सके .

मित्रों बचपन से मेरी आत्मा में यही तमन्ना थी की मैं प्रधान सेवक बनू अपने मुल्क को हिन्दू मुल्क बनाऊं मैंने बहुत मेहनत भी की ई वी एम ई वी एम भी खेला,  क्या क्या नहीं किया मैंने यहाँ तक की गुरु तुल्य अपने प्रिय आडवानी को भी  किनारे किया शीर्ष कुर्सी दलित के हांथो दी, तरह तरह के हथकंडे अपनाए अपने खासम ख़ास को गृह की चावी सौप दिया किन्तु सारे किये पर सबने पानी फेरना शुरू कर दिया है सीएए  एनआरसी एनपीआर का कार्ड भी बेकार ही साबित होता दिख रहा है  क्या छात्र- छात्राए क्या महिलायें सभी मेरे नाक में दम किये हुए हैं मैं बुरी परिस्थितियों में हूँ इसलिए आज इस ख़ास मौके पर आप सबसे मन की बात ना करके  दिल की बात कर रहा हूँ आशा है आप सभी जरूर मेरी उदासी को समझेंगें और जरूर कुछ ऐसा मंत्र देंगें जिससे मैं प्रधान सेवक बना रह  सकूं .जय भारत जय भारती

 

 

 

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