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ये क्या मुआवजा है या किसानों के जख्मों पर मरहम की जगह नमक ?

 यूपी में बेमौसम बारिश से फसलें तबाह होने के बाद किसान भले ही खुदकुशी करने पर मजबूर हों लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। फैजाबाद जिले में किसानों को मुआवजे के नाम पर 75, 100 और 150 रुपए के चेक जारी किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ चेक तो ऐसे किसानों के नाम जारी हुए हैं जिनकी मौत हो चुकी है। फर्जीवाड़े के हाल यह है कि कब्रिस्तान की जमीन पर भी मुआवजे के चेक जारी कर दिए गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पूरे मामले की जांच और आरोपी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फैजाबाद का मामला मीडिया में आने के बाद प्रदेश सरकार ने यहां के लेखपाल को बर्खास्त कर दिया है कुछ लोग कह रहें है की अखिलेश सरकार को बदनाम करने में अधिकारी कर्मचारी  अहम् भोमिका निरवाह कर रहें हैं क्यों की मुख्यमंत्री द्वारा 750 रुपये से कम का मुवाज़ा किसी को दिया ही नहीं जाना था वावजूद इसके इस तरह के कृत्य अधिकारी कर्मचारी कर रहें है ताकि सरकार बदनाम हो ।
बीजेपी ने बनाया मुद्दा
फैजाबाद के एसडीएम अशोक कुमार सिंह ने माना है कि अससरों ने सर्वे सही तरीके से नहीं किया। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की जमीन को खेती योग्य जमीन दिखाकर दिए गए चेक की जांच कराई जाएगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने रविवार को फैजाबाद के वाजिदपुर गांव का दौरा करने के बाद कहा कि वे किसानों के हक की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा, ‘गांव में कोई नायब तहसीलदार या लेखपाल नहीं आया। नियम के अनुसार, मुआवजे के नाम पर कम से कम 750 रुपए मिलने चाहिए। गांव में प्रधान का कब्रिस्तान है, जिसमें खेती नहीं होती। उसमें भी आठ लोगों का चेक बना दिया गया है।’
किसी को 75 रुपए तो किसी के हाथ खाली
वाजिदपुर गांव के किसान कमलेश का कहना है कि मुआवजे के लिए उन्हें केवल 75 रुपए का चेक मिला है। इसी गांव के रामराज को 200 रुपए का चेक मिला है। जियाउद्दीन को 18 बीघा फसल बर्बाद होने के बाद भी कोई मुआवजा नहीं मिला।
जो जिंदा नहीं उनके नाम भी चेक जारी
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने इस गांव में आठ ऐसे लोगों के नाम चेक जारी कर दिए हैं, जिनकी मौत कई साल पहले हो गई थी। ऐसे आठ लोगों के नाम 100-100 रुपए के चेक जारी हुए हैं। कब्रिस्तान की जमीन के मालिक शमशुद्दीन का कहना है कि उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान की जमीन को खेती योग्य जमीन दिखाकर आठ लोगों का चेक बना दिया है, जबकि जो खेत बोया जाता है, उसका चेक नहीं बना है।

 

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