Search
Friday 6 December 2019
  • :
  • :
Latest Update

बनारस की जनता तय करेगी कि असली राष्ट्रवादी कौन

बनारस की जनता तय करेगी कि असली राष्ट्रवादी कौन

बनारस के विनोद कुमार दूबे मडुवाडीह में रहते हैं। उन्हें गठबंधन के प्रत्याशी तेज बहादुर भाने लगे हैं। कांग्रेसी मिजाज के दूबे का कहना है कि केन्द्र सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक और आपरेशन बालाकोट के बहाने सेना का राजनीतिकरण कर दिया। अब प्रधानमंत्री के खिलाफ एक सीमा पर तैनात रहा फौजी ही सवाल उठा रहा है। दूबे कहते हैं कि अब बनारस की जनता तय करेगी कि असली राष्ट्रवादी कौन है? दूबे के इस सवाल को भाजपा नेता सिंटू सिंह हवा में उड़ा देते हैं। सिंटू सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बनारस से करीब पांच लाख वोटों से जीत रहे हैं।

बनारस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं। स्वामी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर के कांसेप्ट से नाराज हैं। उनके चेले अभय शंकर का कहना है कि इस कॉरिडोर के कारण बाबा विश्वनाथ के आसपास की प्राचीनता नष्ट हो गई। यही प्राचीनता दुनिया के सबसे पुरानी धार्मिक नगरी की निशानी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक भी तेज बहादुर यादव के समर्थन में उतर रहे हैं। अभय शंकर का कहना है कि अब फौजी के मुकाबले में प्रधानमंत्री हैं। फौजी के सवालों का जवाब दें। छात्र नेता संजय सिंह को भी लग रहा है कि छटवें चरण का मतदान होते-होते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रवाद से तेजबहादुर यादव का फौजीवाद टकराने लगेगा।

बनारस के वकील विनोद सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री जब बनारस में नामांकन करने आए थे तो बनारस की सड़कों पर गुलाब की पंखुडिय़ों की परत चढ़ गई थी। भीड़ तो कई राज्यों के लोगों की लग रही थी। सबकुछ ठीक था, लेकिन दो दिन जिस तरह से, जिस अंदाज में प्रधानमंत्री टीवी पर दिखाई दिए, मीडिया में छाए रहे, वह मतदाताओं को भीतर-भीतर नाराज कर रहा है। लेकिन बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय की प्राध्यापिका मीनाक्षी सिंह को प्रधानमंत्री मोदी में देश का भविष्य दिखाई दे रहा है। मीनाक्षी सिंह इतिहास की प्रोफेसर हैं। उनका कहना है कि बनारस में युवाओं में मोदी जी का क्रेज है। लड़कियों और लड़कों में उत्साह है। हालांकि मीनाक्षी का मानना है कि 2014 के मुकाबले थोड़ा मोदी की छवि फीकी पड़ी है।

गोदौलिया चौराहे पर मुन्ना के पान की दुकान पर चुनावी चर्चा होती है। हरिश्चंद्र कालेज के गेट के पास चाय-पान की दुकान पर चर्चा आम है। इसी तरह की स्थिति बीएचयू गेट से आगे बढऩे पर संकट मोचन मोड़ पर और अस्सी भदैनी के रास्ते की चाय की दुकानों पर होती है। इन चर्चाओं में प्रधानमंत्री पर चर्चा का कोई तोड़ नहीं है, लेकिन बनारसी अंदाज में प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल भी उठ रहे हैं। news source by amarujala



A group of people who Fight Against Corruption.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *