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मुद्दे हुए गौड़ और जातियों के गुणा-भाग पर अटक गयी राजनीति

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, तत्कालीन यूपीए सरकार के मंत्री प्रदीप जैन और सपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव के चुनाव लड़ने से झांसी-ललितपुर सीट के पिछले लोकसभा चुनाव पर सबकी नजरें टिकी थीं लेकिन, इस चुनाव में ये स्थिति नहीं है। सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा मुख्य मुकाबले में हैं। वहीं, पहली बार ऐसा हो रहा है कि कांग्रेस के मैदान में होने के बावजूद उसका प्रत्याशी न सिर्फ पार्टी के लिए बाहरी है बल्कि, झांसी के लिए भी बाहरी हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी से गठबंधन करने के पीछे कांग्रेस की कौन सी मजबूरी थी, इसे लेकर जिला कांग्रेस सकते में है।

दो बार सपा का कब्जा: सपा और बसपा के गठबंधन में ये सीट सपा के खाते में गई। सपा ने यहां से विधान परिषद के पूर्व सदस्य श्यामसुंदर सिंह को मैदान में उतारा है। जबकि, पूर्व सांसद और पिछले चुनाव में रिकॉर्ड 3.85 लाख वोट हासिल करने वाले डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव का नाम भी प्रमुखता से चल रहा था। लेकिन, सपा ने पिछड़ों में सवर्ण माने जाने वाले यादव जाति के श्यामसुंदर पर भरोसा जताया। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी श्यामसुंदर दो बार विधानपरिषद सदस्य रहे हैं। एक बार बबीना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं पर सफल नहीं हुए। रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हैं और कृषि भूमि भी है।
प्रचार में भी जाति देखकर उतार रहे
पार्टियां जातिगत वोटों की लामबंदी के लिए जी जान से जुटी हुई हैं। क्षेत्र में जिस जाति के वोटों का जहां ज्यादा दबदबा, वहां उसी जाति के नेताओं को प्रचार में उतारा जा रहा है। स्थानीय मुद्दे गौण हो चुके हैं।
यहां की सभी विस सीट भाजपा के कब्जे में झांसी-ललितपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती हैं। 2017 के चुनाव में इन सभी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। महरौनी विधायक मनोहर लाल पंथ प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री भी हैं।
भाजपा ने दिया उद्यमी को मौका: बुंदेलखंड की राजधानी कही जाने वाली झांसी  से लड़ रहे तीनों प्रमुख प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी तो पहली बार किसी भी चुनाव में जनता से वोट मांग रहे हैं। मतदाता मौन है, उन्हें किसे वोट देना है, इसका मन वो पहले ही बना चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से रिकॉर्ड 1.90 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाली उमा भारती ने इस बार चुनावी राजनीति से किनारा कर दिया। भाजपा के चार विधायकों के साथ-साथ अन्य नेता भी टिकट की कतार में थे, लेकिन पार्टी ने बैद्यनाथ समूह के प्रबंध निदेशक उद्यमी अनुराग शर्मा को प्रत्याशी बनाया। पहली बार चुनाव लड़ रहे अनुराग के पिता पं. विश्वनाथ शर्मा झांसी और हमीरपुर से सांसद रह चुके हैं।
मोदी और योगी आ चुके, प्रियंका का रोड शो आज
भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आदि की सभाएं हो चुकी हैं। माहौल गरमाने के लिए 25 अप्रैल को कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी झांसी आएंगी। वे यहां रोड शो करेंगी। जबकि, 26 अप्रैल को अखिलेश यादव के आने का कार्यक्रम है।
बाबू सिंह के भाई को कांग्रेस से टिकट: कांग्रेस के टिकट के लिए पूर्व मंत्री प्रदीप जैन और हाल ही में मध्य प्रदेश चुनाव में बड़ी भूमिका अदा करने वाले सुधांशु त्रिपाठी के नाम प्रमुखता से चल रहे थे। मप्र चुनाव में सहप्रभारी बनाकर भेजने के बाद सुधांशु को पार्टी ने राष्ट्रीय सचिव बनाया। लेकिन, कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के नेतृत्व वाली जन अधिकार पार्टी से गठबंधन कर लिया और झांसी ललितपुर सीट जअपा को दे दी। जअपा से बाबू सिंह कुशवाहा के भाई शिवशरण कुशवाहा मैदान में हैं। वे कांग्रेस के चिह्न पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। शिवचरण बांदा में वकालत करते हैं। बाबूसिंह लंबे समय से जेल में थे। उनके कारनामों की चर्चा अभी भी हो रही है। मगर बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ेगा।

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