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Sunday 21 April 2019
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मोदी सरकार ने इसलिए पहले नहीं पेश किया था लुभावना बजट

मोदी सरकार ने इसलिए पहले नहीं पेश किया था लुभावना बजट
विपक्ष भले ही वर्तमान सरकार के इस आखरी बजट को चुनावी बजट कहे और कार्यवाहक वित्तमंत्री पीयूष गोयल के बजट भाषण को चुनावी भाषण की संज्ञा दे, लेकिन सच तो यह है कि इस आम बजट ने अपने नाम के अनुरूप देश के आम आदमी के दिल को जीत लिया है। जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, यह सर्वव्यापी, सरस्पर्शी, सरसमवेशी, सर्वोतकर्ष को समर्पित एक ऐसा बजट है जो भारत के भविष्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के सपने अवश्य जगाता है जो कितने पूर्ण होंगे यह तो समय ही बताएगा।यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने चुनावी साल में बजट प्रस्तुत किया हो। लेकिन हाँ, यह पहली बार है जब भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में जहाँ अब तक लगभग हर सरकार चुनावी साल के बजट में केवल आगामी लोकसभा चुनावों को ही ध्यान में रखकर बजट प्रस्तुत करती थीं, वहां इस सरकार ने आगामी दस सालों को ध्यान में रखकर बजट प्रस्तुत किया हैलेकिन मोदी सरकार के इस बजट में समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है यहां तक कि विपक्ष के लिए भी। इस बजट से उन्होंने राहुल गांधी के कई चुनावी वादों का जवाब भी दे दिया है। जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों को हर साल 6 हज़ार रुपए तीन किश्तों में सीधे उनके खाते में डालने के प्रस्ताव से उन्होंने कांग्रेस की कर्ज़ माफी योजना पर वार किया है। इससे एक तरफ उन्होंने ना सिर्फ राहुल के मोदी पर किसानों के प्रति असंवेदनशील होने के आरोप को ध्वस्त कर दिया बल्कि रकम सीधे किसानों के खातों में डलवा कर कांग्रेस की कर्जमाफी के लॉलीपॉप की हवा भी निकाल दी। क्योंकि जिस प्रकार एक महीने के भीतर ही मध्य प्रदेश और राजस्थान से करोड़ों के कर्जमाफी घोटाले सामने आ रहे हैं खुद राहुल भी अब समझ चुके हैं कि लोकसभा चुनावों में वो कर्जमाफी का कार्ड नहीं चलने वाला। इसलिए तीन राज्यों में जीत के तुरंत बाद जो राहुल यह कह रहे थे कि 2019 में कर्जमाफी महत्वपूर्ण मुद्दा होगा और मैं नरेंद्र मोदी को तब तक नहीं सोने दूंगा जब तक वो पूरे देश में कर्जमाफी नहीं कर देते आज वो राहुल कर्जमाफी की नहीं बल्कि ”न्यूनतम आय” की बात कर रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार ने इस बजट से राहुल की इस घोषणा की भी हवा निकाल दी। क्योंकि सरकार ने बजट में संभवतः विश्व की सबसे बड़ी पेंशन योजना का प्रस्ताव पेश किया है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के कर्मियों को 60 वर्ष की आयु के बाद हर माह तीन हज़ार रुपए पेंशन का प्रावधान है। इसके लिए उन्हें हर महीने मात्र 100 रुपये जमा करने होंगे।


A group of people who Fight Against Corruption.


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