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स्वतंत्र पत्रकार सी. बी. झा की प्रधान मंत्री मोदी के नाम खुली चिठ्ठी…..?

श्री नरेन्द्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री,
भारत सरकार,
नई दिल्ली ।
विषय: पी. जी. पोर्टल PMOPG/D/२०१८/०४४७५०२, दिनांक ०५/१२/२०१८ ।
संदर्भ संख्या (भारत सरकार) ६००००१८०१२५८२६ जिसका निस्तारण २८/१२/२०१८ को रिश्वत की मांग करने वाले अधिशासी अभियन्ता की आख्या पर कर दिया गया – जिस पर मेरी घोर आपत्ति दर्ज की जाए ।
माननीय प्रधानमंत्री जी,
इसमें कोई दो राय नहीं कि देश की सत्ता पर आपको आसीन देख देश के आम नागरिकों में भ्रष्टाचार से निजात मिलने व न्याय मिलने की पूरी आशा जागृत हुई, पर आपके निरंतर प्रयासों के बावजूद भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूरी एकजुटता के साथ देश के आम नागरिकों के सपनों पर पानी फेर दिया, जिसका जीता – जागता उदाहरण आपके उक्त पोर्टल पर दर्ज़ शिकायत का एकतरफा निस्तारण है – जो कि एकदम गलत तरीके से रिश्वत मांगने वाले अधिशासी अभियंता जलकल – ४ की ही आख्या पर मुझसे बिना पूछे निस्तारित कर दिया गया । मोदी जी, मैंने ३ दिसंबर को अपनी व्यथा पंजीकृत डाक से आपको भेजी और आपके सिपहसालारों ने मेरी इस व्यथा को आप तक नहीं पहुंचने दिया, उल्टे इस शिकायती पत्र को “मुख्यमंत्री उ. प्र.” के जनसुनवाई पोर्टल पर अग्रसारित कर दिया ? जो कि सैद्धांतिक रूप से बिल्कुल भी ठीक नहीं । क्योंकि योगी आदित्यनाथ जी, व सुरेश खन्ना जी को पिछले वर्ष दिनांक २८/०९/२०१७ को पंजीकृत डाक द्वारा अपनी पीड़ा पहले ही प्रेषित कर दी गई थी । कार्यवाही के नाम पर सब सिफर रहा – मेरे यहां किसी भी प्रकार की, सूचना नहीं आयी और ना ही ‘ योगी सरकार ‘ ने मुझे बुलाया । और भ्रष्ट अधिकारियों की गलत आख्या पर योगी के सिपहसालारों ने उसका निस्तारण आनन – फानन में कर डाला । जिसका मैंने जनसुनवाई पोर्टल पर घोर आपत्ति दर्ज़ कराकर विरोध प्रकट किया था । मेरे प्रबल विरोध को देख योगी जी के सिपहसालारों ने मेरी उक्त घोर आपत्ति को अपने पोर्टल से तुरंत ही निकाल दिया था-योगी जी के सिपहसालारों की कालीकरतूतों से मुझ पीड़ित को अब तक न्याय ना मिल सका ।
मोदी जी आपको बड़े ही खेद सहित और हिम्मत करके बताना चाहता हूं कि ‘ यहां उ. प्र. में सबकुछ ठीक – ठाक नहीं चल रहा  – उसका एक ही कारण कि योगी के सिपहसालार अपनी मनमानी करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, मोदी जी उ.प्र. में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सरकार के ३ सत्ता सीन मंत्रियों के ३ पी. ए. सलाखों के पीछे हैं – मान्यवर यह क्या हो रहा है कि कुछ भी तो ठीक – ठाक नहीं है ?? और योगी जी कहते हैं “कि सभी कुछ ठीक तो है ।” उक्त निस्तारण पर मैं आपको कुछ तथ्य परक सत्य बताना चाहता हूं – मैं दिनांक १९/११/१८ को एक “जलकर सीवर कर बिल” जो कि जोन – ४, के अधिशासी अभियंता बी. एन. मिश्रा ने मेरे घर के लॉन में फिकवा दिया था । उसी दिन मैं बी. एन. मिश्रा से मिला – उक्त त्रुटिपूर्ण बिल जिसकी राशि ₹ १८,९३१/- है इस बिल के साथ शासनादेश की प्रति दिखाते हुए १२.५% जलकर व ३% सीवरकर जो कि मेरे नगर निगम के सालाना कर निर्धारण  ४,०८३/ के हिसाब से  ६३२.८६/- वार्षिक होता है – उसे आप जोड़ लें और एक दूसरा संशोधित बिल बना दें । अधिशासी अभियन्ता बोले के आप सभी जगह तो हो ही आए – और फिर मेरे ही पास आकर बिल ठीक कराने की बात करते हैं । यदि बिल संशोधन कराना है तो १०% कमीशन लगेगा – इसकी व्यवस्था करके आइए – तो मैं इस बिल को आधा कम करके बना दूंगा ।
मोदी जी, उक्त अभियन्ता से जब मैंने कहा कि आप तो रिश्वत की बात करने लगे – यह आपको शोभा नहीं देता – तो उसने मुझे ऑफिस से बाहर जाने का रास्ता दिखाया । मोदी जी मैं निराश यहां से लौट आया और फिर मैंने आपको एक व्यथा पूर्ण पत्र लिखा, जिसको कि आपके सिपहसालारों ने आप तक न पहुंचा कर उसे योगी जी के यहां अग्रसारित कर दिया । यही चूक मेरे लिए न्याय नहीं दिला पाई, आपके सिपहसालार क्या किसी की पीड़ा नहीं समझते हैं ? क्या इन्हें किसी से कोई हमदर्दी नहीं – या फिर आपने इन्हें बेख़ौफ़ – बेलगाम छोड़ रखा है जो यह चाहें सो करते रहें और आप तक किसी का दुख़ इस तरह से पहुंचने ही ना पाए । क्या आपके यह सिपहसालार संवेदनहीन हैं – या फिर इन्हें अपना दायित्व निभाना नहीं आता ?
मैंने अपने इस मामले में कल्याण बनर्जी, अंडर सेक्रेटरी, मुख्यमंत्री सचिवालय, लखनऊ के दूरभाष ०५२२-२२१५१२७ पर कितने ही बार संपर्क करने का प्रयास किया – पर बनर्जी ने फोन उठाने का कष्ट तक नहीं किया । मोदी साहब, बड़ी ही हैरानी के साथ लिख रहा हूं कि इस मामले में योगी सरकार ने एकदम उदासीनता दिखाई और वह इसलिए कि उनके सिपहसालारों को लगा कि यह उनकी सरकार की शिकायत है – तो इसीलिए मैं कल्याण बनर्जी से मिलने का प्रयास करता रहा – पर उन्होंने तो मुझसे फोन पर भी संपर्क करने का कष्ट तक नहीं किया ??? आनन – फानन में उक्त की जांच नगर आयुक्त, नगर निगम, लखनऊ को दिनांक: २४/१२/२०१८, सोमवार को दे दी गई, आपको बता दूं कि नगर आयुक्त ने किसी भी उप नगर आयुक्त को मेरे बयान लेने मेरे घर पर नहीं भेजा – और एकदम असत्य व निराधार आरोप लगाते हुए दिनांक २८/१२/२०१८, शुक्रवार को मेरी शिकायत / पीड़ा को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया – जो कि बहुत ही शर्मनाक है ।
मोदी जी, जलकल सचिव रमेश चन्द्र रघुवंशी ने बी. एन. मिश्रा अधिशासी अभियंता, जोन – ४ से सांठ गांठ कर मुझे बदनाम करने व परेशान करने की गरज से ही अपने द्वारा अपर नगर आयुक्त को दिनांक २८/१२/२०१८ को उक्त दोनों लोगों ने सही आख्या नहीं दी – जांच का बिंदु वर्तमान शिकायती पत्र जो मैंने मोदी जी आपको दिनांक ०३/१२/२०१८ को लिखा – उसमे भी मैंने बताया था कि अधिशासी अभियंता बी. एन. मिश्रा बिल ठीक कराने के एवज में रिश्वत (सुविधा शुल्क) मांग रहे हैं । “इस मुख्य केंद्र बिंदु और भ्रष्टाचार के अति गंभीर प्रश्न को आखिर इस जांच आख्या से क्यों हटा दिया गया” – इसका कोई भी हवाला / ब्योरा इस जांच आख्या में क्यूं नहीं आया ? जिन पत्रों का हवाला बी. एन. मिश्रा ने आख्या में दिया है – उनकी प्रति पोर्टल पर क्यूं नहीं दर्शायी गई – इसमें कौन सी चाल छिपी है – यह तो बी. एन. मिश्रा ही बता दें ।
मोदी जी, बी. एन. मिश्रा ने मेरे ऊपर आरोप लगाया है कि पत्र संख्या १११६ इ.ई. – ४ दिनांक ०६/११/१७, पत्र संख्या ३०/कैंप इ.ई , दिनांक ०३/१०/२०१७ एवं पत्र संख्या १२०५/एल. जे. एस./इ.ई – ४ दिनांक १७/११/२०१७, विभाग के पत्रवाहक द्वारा मुझे भेजे गए थे एकदम झूठ है ।
बी. एन. मिश्रा का यह कहना भी गलत है कि पत्र इन्हें रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजा गया था और मैंने लेने से इंकार किया – एकदम सत्य से परे है ।
उन सभी रजिस्टर्ड पत्रों की छायाप्रति रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजे गए पत्रों को पोर्टल पर क्यों नहीं दिखाया गया – आखिर ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का क्या मतलब होता है ??
मोदी जी, बी. एन. मिश्रा इ.ई – ४ का यह कहना भी एकदम झूठ है कि बिल शासनादेश अनुसार सही निर्गत किया गया है । क्या इस अभियंता ने शासनादेश की छायाप्रति संलग्न की ?? यदि नहीं तो क्यों ?
क्योंकि सरकारी गजट उ. प्र. (असाधारण) संख्या १९६९/९२-८५-११०-७० हस्ताक्षरित, कमल पांडेय आई.ए.एस, सचिव, लखनऊ ०५ अक्टूबर १९८५ है और जिसकी प्रति मैंने आपको लिखे अपने शिकायती पत्र में संलग्न भी की है – जिसमें जलकल १२.५% एवं सीवरकर ३% – कुल कर निर्धारण पर वसूला जाना शासन ने तय किया है और इसमें दोहरा मापदंड हो ही नहीं सकता ?
यदि मेरे हिसाब से बिल जारी करना संभव नहीं है – तो बी. एन. मिश्रा इ.ई. – ४ ने मुझसे क्यों १०% कमीशन की मांग की – और जिसके बदले उसने कहा कि बिल की रकम आधी कर दी जाएगी यानी रिश्वत दे दीजिए, तभी शासनादेश के अनुसार बिल बनेगा – नहीं तो बी. एन. मिश्रा अधिशासी अभियंता मनमानी पूर्ण तरीके से बिल भेजकर मुझे परेशान / प्रताड़ित करते रहेंगे । मोदी जी, योगी जी के सिपहसालार कितने निराले और चालाक हैं कि पीड़ित की न सुनकर अपनी चालाकी मुझ जैसे वरिष्ठ पत्रकार को बता रहें हैं ।
मोदी जी, मेरे ज़मीर को सबसे ज्यादा कचोटने वाली बात जो इस जांच आख्या में बी. एन. मिश्रा, उसके गुर्गे सचिव रमेशचंद्र रघुवंशी ने मेरे वावत लिखी है ” कि संभवतः शिकायतकर्ता उक्त भवन का जलकर / सीवरकर जमा करने से बचना चाहते हैं, इस हेतु वह बारबार निराधार पत्राचार / शिकायत दर्ज़ करा रहे हैैं “।
बी. एन. मिश्रा के इस कथन का भी मैं पुरजोर खंडन / विरोध करता हूं कि उसने मेरे दूरभाष पर इस वावत बात करने का प्रयास किया । एकदम झूठ बोल रहे हैैं – बी. एन. मिश्रा ई.ई. – ४ ।
मोदी जी, उक्त पूरी की पूरी आख्या में “दाल में कुछ काला है ” ऐसा कहना एकदम ठीक नहीं होगा, बल्कि “पूरी की पूरी दाल ही काली है” – मैं ऐसा कहूंगा ।
मोदी जी, नगर आयुक्त लखनऊ के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी थी – कि जांच उस अधिकारी को दें – जो कि मुझ पीड़ित से रिश्वत लेकर बिल संशोधन करने की बात करता हो – अाखिर नगर आयुक्त ने ” चोर ” को ही साहूकार बना डाला ?? क्या कमाल की कारीगरी है – मोदी जी ” आखिर योगिराज में सब ठीक ठाक जो चल रहा “
मोदी जी, मेरे ऊपर किसी भी प्रकार का सरकारी / गैरसरकारी कर्ज नहीं है – और मैं एक ईमानदार जिंदगी जिया हूं  – उसूल और सिद्धांत मेरा गहना है – मैं कभी भी इन सिद्धांतों से समझौता नहीं कर पाया – और इसीलिए मैं बी. एन. मिश्रा जैसे भ्रष्ट लोगों से जूझता रहा ।
मोदी जी, लोकशाही में नौकरशाहों को जनता के प्रति विनम्र, संवेदनशील व पारदर्शी होना चाहिए – योगी जी के सिपहसालारों से विगत २०१७ में भी मैंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी – पर निष्कर्ष सिफर । जलकल के भ्रष्ट अधिशासी अभियंता बी. एन. मिश्रा के व्यवहार, उसकी गलतबयानी से मेरे मानस को गहरी ठेस लगी है – मेरी भावना और मेरी ईमानदारी पर उसने प्रश्नचिन्ह लगा दिया ! जो कि एकदम असत्य है । लोकशाही में ऐसा कदापि नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के प्रति वफादार और विनम्र होना चाहिए ।
मोदी जी, जब नौकरशाह जनता से मनमानी करते हैं – तो मजबूरी में ही व्यक्ति प्रधानमंत्री तक अपनी बात रखता है । आपसे उम्मीद करता था कि आप मेरी पीड़ा से ” कुछ तो दर्द महसूस करेंगे ” पर आपके सिपहसालारों ने योगी जी के जनसुनवाई पोर्टल पर अग्रसारित कर मुझे न्याय पाने से कोसों दूर कर दिया ?? “बहुत ही चतुर हैं आपके पी.एम.ओ. के सिपहसालार भी”।
जनसुनवाई में यदि आप एकतरफा निर्णय दे देंगे, मुझ पीड़ित की नहीं सुनेंगे और जो भ्रष्ट अधिकारी (ई. बी. एन. मिश्रा) मुझसे रिश्वत मांग रहा हो, उसी को जांच अधिकारी बनाकर एवं उसी के द्वारा भेजी गई ” असत्य आख्या ” और गलत बयानी पर विश्वास कर लेंगे – तो मैं समझता हूं कि फिर मुझ पीड़ित से न्याय कोसों दूर चला जाएगा ? फिर तो आपसे मैं न्याय की उम्मीद कैसे करूं ???
योगी जी की कार्यशैली, उनके सिपहसालारों की बी.एन. मिश्रा से मिलीभगत होने की वज़ह से ही इस भ्रष्ट अधिशासी अभियंता का रिश्वत मांगना जारी है – इस पर अविलंब रोक लगाएं ।
मोदी जी, मैं एक सत्य की लड़ाई लड़ रहा हूं – आप देख ही रहें हैं कि यह सभी लोग एक साथ मिलकर मेरे सत्य को छुपाने में लगे हैं, पर मैं भी पीछे नहीं हटने वाला । यदि आप मेरी इस पीड़ा को गंभीरता से नहीं लेंगे, और जो लोग मुझे परेशानी व दर्द दे रहे हैं – आप भी योगी जी की तरह मूकदर्शक बने रहेंगे – तो फिर मुझे मजबूर होकर न्याय पाने हेतु – आपके समक्ष ” इंडिया गेट ” पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ेगा – और जिसकी एकमात्र जिम्मेदारी आपकी होगी ।
अस्तु, आपसे विनम्र निवेदन है कि समय रहते, इस पूरे घटनाक्रम की किसी आई.ए.एस. अधिकारी से जांच कराकर – ई. बी.एन. मिश्रा की काली करतूतों पर तत्काल लगाम लगाए व मुझ पीड़ित को राहत देने की कृपा करें ।
आभारी होऊंगा ।
भवदीय,
सी. बी. झा,
पत्रकार

(स्वतंत्र),

५/६८९, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ ।
दूरभाष: ९९३५६-४१५९९; ९८३९०-६८१२४

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