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तृतीय बौद्धिक सम्मेलन 18 मार्च को लखनऊ में, पिछड़े वर्ग से देश भर के चिन्तकों ,विचारको ,पत्रकारों, साहित्यकारों का होगा जमावड़ा

      लखनऊ ब्यूरो ! दिल्ली और घाटमपुर कानपुर में आयोजित  बौद्धिक सम्मेलन की अपार सफलता  के बाद अब तृतीय बौद्धिक सम्मेलन का आयोजन 18 मार्च दिन रविवार को लखनऊ स्थित एस आर एस इण्टरनेशनल स्कूल 16 बसंत विहार पिकनिक स्पॉट रोड,इंदिरानगर में आयोजित किया जा रहा है जिसमे देश के पिछड़े वर्ग के प्रख्यात साहित्यकार, कवि, लेखक,पत्रकार,समाजसेवी,व्यवसायी बड़ी संख्या में जुटेंगे ।
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार  `श्री राजकुमार सचान’होरी’ जीं करेंगें इस सम्मेलन में पिछड़ा वर्ग के जो भी पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी, कवि, लेखक, व्यवसायी भाई बहन भाग लेना चाहें वो कृपया संयोजक सिमित को  दिए गए मोबाइल नम्बर-9958788699 या  7080919199 पर सूचना जरूर दे दे बौद्धिक सम्मेलन  का उद्देश्य बौद्धिक क्रांति  के माध्यम परिवर्तन व पिछड़ों का उत्थान  है ! पिछड़ा वर्ग  के  उत्थान हेतु सतत प्रयासरत प्रख्यात  साहित्यकार   श्री राजकुमार ‘होरी’ का कहना है कि  इतिहास  इस बात का गवाह है कि सदैव “बौद्धिक क्रांति के रास्ते ही सामाजिक, राजनैतिक क्रांति हुई है “
                 उन्होंने राजधानी लखनऊ में आयोजित इस तृतीय बौद्धिक सम्मलेन में पिछड़े वर्ग के लोगों को आमत्रित करते हुए कहा की यदि आप साहित्यकार, पत्रकार ,कलाकार  हैं तो आप भाग ले सकते हैं या ऐसे बुद्धिजीवी या समाजसेवी,व्यवसायी हैं जो आर्थिक सहयोग के साथ पुस्तकों के और समाचार पत्रों के प्रकाशन में योगदान देना चाहते हैं तो आपका स्वागत है ।
 श्री होरी ने बताया की सम्मेलन 11 बजे से प्रारंभ होगा जिसमें समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पुस्तकों के प्रकाशन की भी समीक्षा भी जायेगी। उन्होंने यह भी कहा की आयोजित सम्मेलन की जानकारी पाने वाले भाई बहन  इस महत्वपूर्ण जानकारी को देश के कोने-कोने में पहुँचाने के लिए अपने व्हाट्सअप ग्रुप समूहों व सोशल नेटवर्किंग पर शेयर  जरूर कर दें जिससे समाज के लोग भागीदारी ले सकें ।
   श्री होरी के मुताबिक बौद्धिक क्रांति से ही समाज का उत्थान संभव है क्योंकि जातिवाद के पुरोधाओं द्वारा वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी को धर्म की चासनी में लपेटकर पढ़ने और लिखने से दूर रखा गया ताकि उनको वर्ण व्यवस्था के दकियानूसी फंदे में फंसाकर हर जाति को पुश्तैनी काम में उलझा दिया जाए।कुर्मी से खेती, नाई से बाल काटना, तेली को तेल निकालना, अहीर को दुग्ध व्यवसाय, गड़रिया को पशुपालन और काछी को सब्जी उगाने के काम में लगाकर उनको न केवल शिक्षा से ही वंचित रखा गया बल्कि अनवरत पिछड़ा बनाये रखा गया उनका कहना है की वास्तविक शिक्षा से दूर चिरनिद्रा में जा चुकी पिछड़े वर्ग में  प्रतिभाओं की कमी नहीं है जरूरत उनको जाग्रत करने की है आयोजक राजकुमार सचान ‘होरी’ का मानना  है कि जो समाज अपने बौद्धिक वर्ग का जितना अधिक  पालन- पोषण करता है वह स्थाई रूप से उतना ही आगे बढता जाता  है!  उन्होंने कहा की  18 मार्च दिन रविवार को लखनऊ स्थित एस आर एस इण्टरनेशनल स्कूल में तीसरे बौद्धिक संघ सम्मेलन का आयोजन इसी क्रम  की तीसरी कड़ी है ! बौद्धिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यक्रम के आयोजक राजकुमार सचान ‘होरी’के अनुसार करीब   70% से अधिक ही पिछड़ा वर्ग समाज  है वावजूद इसके  इस पिछड़े वर्ग समाज की विभिन्न जातियों में लेखन से जुड़े बौद्धिक लोग जैसे पत्रकार, साहित्यकार, प्रोफेसर, कवि, इतिहासकार,कहानीकार,कलाकार  आज तक नाम मात्र ही हैं।इसका मूल कारण समान्त्शाहों द्वारा  पिछड़े वर्ग की सभी जातियों को खेती-किसानी में सदियों से उलझाए रखना मुख्य है इस हेतु समाज में नयी चेतना जागरूकता पैदा करने के लिए पिछले दिनों  पत्रकारों, लेखकों, कवियों, रचनाकारों का  प्रथम बौद्धिक सम्मेलन  गाजिआबाद  में आयोजित किया जा चुका है दूसरा बौद्धिक सम्मेलन एचएलएस कॉलेज, देवमनपुर, घाटमपुर जिला कानपुर नगर में आयोजित किया गया और अब राजधानी लखनऊ में तीसरा बौद्धिक सम्मलेन आयोजित किया जा रहा है ।

 

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2 comments

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