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गंगा पॉल्‍यूशन पर केंद्र सख्‍त,764 औद्योगिक यूनिट पर लटकी तलवार

 दि‍ल्ली। गंगा बेसिन को प्रदूषण मुक्त बनाने की सरकार की मुहिम यूपी से लेकर पश्चिम बंगाल तक की करीब 764 औद्योगिक इकाइयों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। स्वच्छ गंगा पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार व पश्चिम बंगाल की 764 उद्योगों सहित 118 नगर पालिकाओं और नगर निगमों को नोटिस भेजा है। इसके तहत एनएमसीजी ने उद्योगों और निगमों से गंगा प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए उपायों पर 15 दिन के भीतर एक्‍शन प्‍लान सौंपने को कहा है। प्रदूषण फैलाने वाली जो इकाइयां एनएमसीजी के राडार पर हैं, उसमें उत्तर प्रदेश की चीनी, टैनरी, कैमिकल बिहार की ऑटो पार्ट, सिल्क, रंगाई और पश्चिम बंगाल की लैदर, कैमिकल, फर्टीलाइजर से जुड़ी छोटी इकाइयां शामिल हैं।

राज्‍य
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की संख्‍या
उत्‍तर प्रदेश
687
पश्‍चिम बंगाल
22
बिहार
13
उत्‍तराखंड
42
उत्‍तर प्रदेश की 687 इकाइयों को नोटिस
एनएमसीजी द्वारा गंगा बेसिन में बसे 4 राज्‍यों की 764 इकाइयों को नोटिस भेजा है। अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में गंगा में प्रदूषण फैला रहे इन सभी 764 इकाइयों और नगर पालिकाओं की सूची पेश की गई है। इसमें सर्वाधिक 687 औद्योगिक इकाइयां उत्‍तर प्रदेश की हैं। उत्‍तर प्रदेश में भी सर्वाधिक प्रदूषित उद्योग कानपुर और उसके निकट स्थित हैं। इसके अलावा कन्नौज, कानपुर की कैमिकल इकाइयां और भदोही, इलाहाबाद और वाराणसी की रंगाई से जुड़ी इकाइयाें को भी नोटिस भेजा गया है।
नगर पालिकाओं पर हो सकती है कार्रवाई
इसके अलावा सभी 118 नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों को गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक उपकरणों को लगाने, एसटीपी की संख्या बढ़ाने और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्‍लांट (ईटीपी) और कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्‍लांट (सीईटीपी) स्‍थापित करने की वास्तविक समय सीमा बताने को कहा है। नोटिस में सभी निगमों और उद्योगों को संबधित प्रदेश के राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह (एसपीएमजी) को सीधे कार्य योजनाएं पेश करने तथा उनकी एक प्रति एनएमसीजी को देने का निर्देश दिया गया है।
राज्‍य
नगर पालिकाओं की संख्‍या
उत्‍तराखंड
15
उत्‍तर प्रदेश
30
बिहार
26
झारखंड
02
पश्चिम बंगाल
44
बिहार, प.बंगाल की लैदर और प्रिंटिंग यूनिट पर खतरा
प्रदूषण को लेकर सरकार के सख्‍त कदम से बिहार और पश्चिम बंगाल की कैमिकल और लैदर यूनिट, झारखंड की एंसिलरी यूनिट की मुश्किलें बढ़ सकती है। बिहार के भागलपुर में टैक्स्टाइल यूनिट चला रहे रहे रईस आलम बताते हैं कि रंगाई हमारा पुश्तैनी पेशा है। हमारे पास कैमिकल ट्रीट करने के लिए न तो तकनीक है और न ही पैसा। यह जिम्मेदारी सरकार ही है। लेकिन समय समय पर सरकारी अधिकारी पॉल्यूशन के नाम पर वसूली करते हैं। वहीं पश्चिम बंगाल के वर्धमान में लैदर कटिंग यूनिट चला रहे श्रेयांस चौधरी बताते हैं कि गंगा के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन जिस निवेश की जरूरत है वह सरकार ही कर सकती है। इंडस्‍ट्री बंद कर देने से सिर्फ बेरोजगारी बढ़ेगी। और कुछ बेहतर नहीं होगा।
इंडस्‍ट्री पर हो सकती है कार्रवाई
एनएमसीजी का नोटिस गंगा बेसिन में मौजूद उद्योगों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। एनएमसीजी के अनुसार नोटिस का पालन न करने की स्थिति में वह उच्चतम न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण(एनजीटी) के समक्ष जरूरी रिपोर्ट पेश कर सकता है। एनएमसीजी के अनुसार नोटिस का पालन नहीं करने और गंगा प्रदूषण को नियंत्रित करने में ढिलाई उद्योगों के लिए गंभीर परिणाम दे सकती है।
प्रधानमंत्री गुरुवार को करेंगे मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक
गंगा प्रदूषण को लेकर गंभीर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शीघ्र ही  राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें गंगा बेसिन के आसपास बसे 5 राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्रियों की बैठक में इस प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर चर्चा होगी। यह कानून जल और वायु संरक्षण कानूनों की तर्ज पर बनेगा और इसका उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान भी होगा। साथ ही गंगा नदी बेसिन प्रबंधन के लिए एक स्थायी फंड बनाने का प्रावधान भी इस कानून में किया जाएगा।

 

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