Breaking News

आरुषि मर्डर केस: 4 साल बाद जेल से रिहा हुए तलवार दंपती

 नवंबर, 2013 से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद थे राजेश और नूपुर तलवार
  नोएडा.आरुषि-हेमराज मर्डर केस में बरी तलवार दंपती (डॉ. राजेश और नूपुर) सोमवार शाम को करीब चार साल बाद गाजियाबाद की डासना जेल से बाहर आ गए। दोनों 4 बजकर 55 मिनट पर जेल से बाहर निकले। उनके चेहरे पर उदासी के भाव थे। वे अपने घर न जाकर आरुषि के नाना-नानी के घर पहुंचे। राजेश सफेद कमीज और नीली पेंट पहने हुए थे, जबकि नूपुर नारंगी कुर्ते के साथ सफेद सलवार और दुपट्टा पहने थीं। उनके पास बैग भी थे। बता दें कि 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट का फैसला पलटते हुए इन्हें बरी कर दिया। ऐसे में 9 साल बाद फिर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर आरुषि का कातिल कौन है? पहले यूपी पुलिस और फिर सीबीआई ने इस हाइप्रोफाइल केस की जांच की, लेकिन डबल मर्डर सुलझने की बजाय मिस्ट्री बनता गया।

1) सीन ऑफ क्राइम की गंभीरता से पड़ताल नहीं हुई
 सीबीआई की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट में जिक्र है कि जब 16 मई 2008 को बेडरूम में आरुषि की बॉडी मिली तो उसके दाहिने हाथ पर लाल निशान था, जो किसी शख्स के दबाव डालने से बना था। पजामा भी उतरा हुआ था और कमर के नीचे का हिस्सा दिखाई दे रहा था। इससे साफ संकेत मिल रहे थे किसी ने उसके साथ जबर्दस्ती की है।
आरुषि के कमरे में और उसकी डेडबॉडी को पुलिस ने सिर्फ सरसरी निगाह से देखा। उस कमरे की दीवार पर खून के छींटे पड़े थे। मर्डर केस में सीन ऑफ क्राइम की गंभीरता से पड़ताल करने की बजाय नौकर हेमराज के साथ सहमति से आपत्तिजनक हालत में होने की बात कही गई।
 2) हेमराज पर शक था, फिर भी उसके कमरे की तलाशी नहीं ली गई
 16 मई की सुबह जब आरुषि के मर्डर का खुलासा हुआ तो नौकर हेमराज लापता था। पुलिस को हत्या का पहला शक उसी पर हुआ। ऐसे में पुलिस को सबसे पहले उसके कमरे की तलाशी लेनी चाहिए थी। मगर नोएडा पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
इसके बाद उसके कमरे में एक सुला वाइन, एक बीयर और कोल्ड ड्रिंक की एक खाली बोतल और 3 गिलास मिले थे। एक बोतल शराब से आधी भरी थी। उसके कमरे का यूरिनल भरा हुआ था। हालात साफ थे कि उस रात हेमराज के कमरे में 3 या इससे ज्यादा लोग मौजूद थे, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।
 3) कत्ल वाली रात हेमराज ने खाना नहीं खाया था, पर ये जांच का हिस्सा नहीं
 जांच में सामने आया था कि 15 मई की रात को हेमराज ने खाना नहीं खाया था। उसका खाना किचन में ही रखा मिला था। इससे साफ है कि वह रात को किसी के आने का इंतजार कर रहा था। इसके बाद 17 मई की सुबह जब हेमराज की बॉडी तलवार दंपती के फ्लैट की छत पर मिली तो उसके एक पैर में चप्पल थी और दूसरी चप्पल पास में पड़ी हुई थी। इसका मतलब हुआ कि वह अपनी मर्जी से चप्पल पहनकर छत पर गया था।
इसके बाद डॉ. राजेश के कम्पाउंडर कृष्णा ने नारको टेस्ट में माना था कि रात को हेमराज बीड़ी पीनी के लिए छत पर गया था और उसने खाना भी नहीं खाया था। इसे भी सीबीआई ने जांच का हिस्सा नहीं माना।
 4) आरुषि के मर्डर के बाद सुबह 6 बजे हेमराज के नंबर पर कॉल किसने रिसीव की, नहीं पता
  16 मई की सुबह तलवार के घर पर नौकरानी भारती पहुंची थी, तब हेमराज के घर में नहीं होने पर डॉ. नूपुर ने अपने लैंडलाइन नंबर से हेमराज के मोबाइल फोन पर कॉल किया था। हेमराज का फोन 9 सेकेंड के लिए रिसीव भी हुआ था, मगर किसी ने जवाब नहीं दिया।
इसके बाद जांच में पता चला था कि जब फोन उठा तो उसकी लोकेशन जलवायु विहार के आसपास ही मिली थी। ऐसे में यह पड़ताल जरूरी थी कि अगर तलवार दंपती ही कातिल थे तो उन्होंने हेमराज को फोन क्यों किया और फिर किसने उसे रिसीव किया?
 5) फॉरेंसिक रिपोर्ट को नजरअंदाज किया गया
सीबीआई ने दावा किया था कि आरुषि के कमरे में ही हेमराज को मारा गया था। मगर इसके लिए जब आरुषि के कमरे से लिए गए खून के सैंपल, आरुषि और हेमराज के कपड़ों की फॉरेंसिक जांच हुई तो रिपोर्ट में अलग-अलग बातें सामने आईं। सीएफएसएल दिल्ली की 19 जून की रिपोर्ट के मुताबिक, आरुषि के तकिए, बेडशीट और गद्दे की जांच में हेमराज का कोई डीएनए या ब्लड सैंपल नहीं मिला। साथ ही हेमराज के कपड़ों पर आरुषि का ब्लड नहीं मिला था। सीडीएफडी हैदराबाद के डीएनए एक्सपर्ट एसपीआर प्रसाद की 6 नवंबर 2008 की रिपोर्ट में कहा गया कि कमरे से सिर्फ आरुषि का ही डीएनए मिला।
 6) कृष्णा के तकिए पर हेमराज का ब्लड कैसे पहुंचा? इसकी जांच नहीं हुई
सीबीआई ने 16 जून को कम्पाउंडर कृष्णा के कमरे से उसका तकिया जब्त कर हैदराबाद में फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था। इसकी जांच रिपोर्ट में पता चला कि जिस पर्पल तकिए पर खून मिला था, वो हेमराज का था।
यह रिपोर्ट जब सामने आई तो सीबीआई ने इसे मानने के बजाय कहा कि यह फॉरेसिंक लैब की तरफ से टाइपिंग की गलती हुई है। जबकि इससे साफ है कि उस रात हुए कत्ल के बाद हेमराज का ब्लड फ्लैट नंबर एल-32 से थोड़ी दूरी पर एल-14 में रहने वाले कृष्णा के कमरे तक कैसे पहुंच गया?
 7) पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर के बयान में विरोधाभास
 यूपी पुलिस ने आरुषि का पोस्टमार्टम (PM) कराया। इसकी रिपोर्ट में एनएडी (नो एब्नॉर्मल डिटेक्शन) लिखा गया था। यानी कि तब डॉक्टर्स ने आरुषि के साथ किसी तरह की ज्यादती होने की बात नहीं मानी थी। लेकिन बाद में जब पीएम करने वाले डॉक्टर सुनील दोहरे बयान देने के लिए सीबीआई कोर्ट गए तो उन्होंने कोर्ट को बताया था कि लड़की की बॉडी के एक्सटर्नल एग्जामिनेशन में वैजाइनल कैविटी ओपन मिली थी। डॉक्टर के इस बयान से पीएम रिपोर्ट को लेकर कई तरह के सवाल उठे।
 तलवार ने फ्री में कैदियों का चेकअप किया
डासना जेल के जेलर दधिराम मौर्य ने कहा कि तलवार दंपती ने जेल में कैदियों का फ्री में चेकअप किया। अगर वे पैसे लेते तो उनकी फीस करीब 49,500 रुपए होती। तलवार दंपती कैदियों के चेकअप के लिए नियमित रूप से जेल आते रहेंगे।”
जेल के डॉक्टर सुनील त्यागी ने कहा, “तलवार दंपती ने जेल के डेंटल डिपार्टमेंट में कई कैदियों को दांतों की बीमारी से उबरने में मदद की थी। उनके जाने के बाद हम अपने डेंटल डिपार्टमेंट के फ्यूचर को लेकर चिंतित हैं। वे हर 15 दिनों में जेल में इलाज के लिए आएंगे।”
उधर, बरी होने के बाद तलवार दंपती से सलाह-मशविरा करने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई थी। जेल सूत्रों का कहना है कि राजेश तलवार के भाई दिनेश तलवार ophthalmologist हैं। वे भी हर 15 दिन में अपनी टीम के साथ जेल में मरीजों को देखने आएंगे।
 क्या है मामला?
मई 2008 में नोएडा के एक घर में आरुषि और उसके नौकर हेमराज की डेड बॉडी पाई गई थी। गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट इस मामले की सुनवाई की थी। एडिशनल सेशन जज श्यामलाल यादव ने मशहूर डेंटिस्ट राजेश और नूपुर तलवार को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर दोषी माना था।
जस्टिस यादव ने 28 नवंबर 2013 को तलवार दंपती को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट का फैसला पलटते हुए तलवार दंपती को बरी कर दिया।

About Jan Jagran Media Manch

A group of people who Fight Against Corruption.

Check Also

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *