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‘रंगलीला’ के कलाकारों ने मुशी प्रेमचंद्र की पुण्यतिथि पर प्रस्तुति दे शमाँ बाँधा

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर रविवार को उनकी तीन कहानियों का पाठ नए रंग विन्यास में हर किसी को लुभा गया। आगरा, ब्रज की लोक रंग कलाओं के पुनरुद्धार को समर्पित संस्था ‘रंगलीला’ के कलाकारों की कथावाचन की शैली ने दर्शकों को बांधे रखा।
कलाकारों के नाटकीय अंदाज, भाव संप्रेषणीयता ने लोगों को कायल बना लिया। इस दौरान ‘ईदगाह’ में जहां हामिद की संवेदना दिखी, वहीं ‘ठाकुर का कुंआ’ में जोखू की तड़प और ‘पूस की रात’ में हल्कू की पीड़ा झलकी। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र और प्रेमचंद के गांव लमही में लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्था के तत्वावधान में यह प्रस्तुति की गई।

बचपन में दादी, काकी के मुंह से राजा-रानी के अलावा रामायण, महाभारत से जुड़ी कहानियां बच्चों के लिए प्रेरक हुआ करती थीं। अब बदले दौर में इस परंपरा का जब लोप होने लगा है, तब ‘रंगलीला’ की कथावाचन की यह नई शुरुआत रंगमंच के नए अध्याय के श्रीगणेश के रूप में सामने आई है।
संस्था के कलाकार सृष्टि गुप्ता, सोनम वर्मा और प्रथम यादव ने तीन कहानियों ईदगाह, ठाकुर का कुआं और पूस की रात के नाट्य रूपांतरित वाचन में अपनी प्रभावी प्रस्तुतियों से लोगों को अंत तक बांधे रखा।

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