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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा,नोटबंदी के बाद हुए बदलावों से बैंकों को 3,800 करोड़ रुपये का घाटा

बैंकों के पेमेंट सिस्टम में नोटबंदी के बाद किए गए बदलावों से बैंकों को 3,800 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। नोटबंदी के बाद कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए खरीदी गई पीओएस मशीनों की ही बात करें तो यह पिछले साल जनवरी में 13.8 लाख थीं और इस साल जुलाई तक इनकी संख्या 28 लाख हो चुकी हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में यह सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शंस बढ़े हों लेकिन कम एमडीआर, कार्ड का कम इस्तेमाल, कमजोर टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कारणों से बैंकों को भारी घाटा हुआ है। इस रिपोर्ट को तैयार करने वालीं, एसबीआई ग्रुप की चीफ इकॉनमिक अडवाइजर सौम्या कांति घोष ने कहा, ‘हमारा मानना है कि बैंकों द्वारा डिवेलप किए गए पॉइंट ऑफ सेल पीओएस इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरे मन से सपॉर्ट करना होगा।’ पीओएस मशीन का इस्तेमाल डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पैसे काटने के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘सरकार ने पीओएस इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और बैंकों ने भी अधिक से अधिक पीओएस मशीनों को इन्स्टाल किया है। लेकिन लंबे समय की बात करें तो उद्देश्य तभी पूरा होगा जब PoS से होने वाले ट्रांजैक्शंस एटीएम को पीछे छोड़ देंगे। जो अभी मुश्किल लगता है।’ एसबीआई के अनुमानों के मुताबिक, इंटर बैंक ट्रांजैक्शंस से पीओएस टर्मिनल्स पर 4,700 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इसमें से अगर एक ही बैंक में किए गए पीओएस ट्रांजैक्शंस को घटा दें तो यह कुल घाटा 3,800 करोड़ रुपये हुआ।साभार- एनबीटी

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