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फैसले का स्वागत, मगर शरीयत की रोशनी में बने 3 तलाक पर कानून

लखनऊ.तीन तलाक  को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के खिलाफ बताया है। इस मुद्दे पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस रिवाज पर छह महीने के लिए रोक लगा दी, साथ ही सरकार से इस पर कानून बनाने को कहा है। इस मुद्दे पर दारुल उलूम देवबंद का कहना है कि हम फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन तीन तलाक पर कानून शरीयत की रोशनी में बनना चाहिए। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  का कहना है कि कानून को लाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि बोर्ड अपने कानून के हिसाब से ही चलता है।

 देवबंद के मौलाना मो. अरशद फारूकी ने कहा, “हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। पार्लियामेंट से हमारी सिफारिश है कि जो भी कानून बनाया जाए, वह शरीयत की रोशनी और आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बात सुनने के बाद बनाया जाए। हमें उम्मीद है कि कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हिसाब से ही बनेगा।”
– तंजीम-उलेमा-ए-हिंद के स्टेट प्रेसिडेंट मौलाना नदीम-उल-वाजदी का कहना है, “हमें कोर्ट से इस फैसले की पहले से ही उम्मीद थी। अब कोर्ट ने हुकूमत को एक मौका दिया है। अगर हुकूमत गलत कानून बनाती है तो हम फिर कोर्ट जाएंगे, क्योंकि इसकी गुंजाइश अभी बाकी है। हम दारूल-उलूम देवबंद और आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। वो जो भी फैसला लेंगे, हमें मंजूर होगा।”
 मुरादाबाद
हमारे मजहब में अल्लाह का कानून चलता है

जिला इमाम मौलाना रईस ने कहा, “अगर सरकार कोई कानून बनाएगी या फिर कोर्ट उस पर फैसला देगा तो हमारे यहां उसे कोई कबूल नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे मजहब में अल्लाह का बनाया कानून चलता है। उसे बदला नहीं जा सकता, तीन तलाक अल्लाह का कानून है।”
 “आमतौर पर तलाक तभी होता है, जब औरत गलत होती है। कोई शौहर बीवी को तलाक देना नहीं पसंद करता। तीन तलाक जिन महिलाओं को मिला है, वह पीड़ित नहीं बल्कि गलत हैं।”
 बरेली
हम इस्लाम और कानून दोनों की बात मानेंगे

बरेली के दरगाह आला हजरत के स्पोक्सपर्सन और आॅल इंडिया तंजीम उलामा-ए-इस्लाम के नेशनल जनरल सेक्रेटरी मौलाना शहाबुद्दीन राजवी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी नहीं है। अभी पार्लियामेंट को कानून बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। पार्लियामेंट से हम बात करेंगे कि जो भी कानून बनाया जाए, वो शरीयत की रोशनी में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की नजर में बनाया जाए।”
 बरेली के मौलाना मो. अशरफ का कहना है, “इस्लाम का अपना काम है और कानून का काम अपना है। हम दोनों को ही मानेंगे।”
 अलीगढ़
उम्मीद है सरकार शरिया के साथ खिलवाड़ नहीं करेगी

अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की वुमेंस कॉलेज की स्टूडेंट कहकशां खानम ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कानून बनाने का मौका दिया है। हमें उम्मीद है कि सरकार शरिया के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करेगी। जिस तरह से सरकार अभी मीडिया के जरिए ट्रिपल तलाक के बारे में लोगों को बता रही है, उसकी जिम्मेदारी है कि तलाक का जो सही कानून है उसके बारे में भी अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए।”
 एक दूसरी स्टूडेंट रेहाना अबरार का कहना है, “ट्रिपल तलाक गलत है और अगर उसे सही माना जा रहा है तो विक्टिम महिला को उसका पूरा हक मिलना ही चाहिए। समाज में उसे पूरी इज्जत और प्रोटेक्शन मिलना चाहिए। तलाकशुदा महिला के लिए सभी को अपनी सोच बदलनी चाहिए।”
रुख्सार कहती हैं, “ट्रिपल तलाक को मुद्दा बनाया जा रहा है, लेकिन इसे वुमन राइट्स के तौर पर देखें तो अच्छा फैसला है। मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि मुस्लिम महिलाओं को आगे जाकर क्या हक मिलेंगे।”
 लखनऊ
10 सितंबर को पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग में लेंगे फैसला

आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “हम देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं। 10 सितंबर को भोपाल में आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग होनी है। आगे की स्ट्रैटजी पर वहीं से विचार किया जाएगा।”
 ऑल इंडिया मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर जफरयाब जिलानी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है। हमें पहले से ही कोर्ट पर यकीन था। कानून लाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने कानून के हिसाब से ही चलता है।”
 “कोर्ट ने भी हमारे कानून को संवैधानिक करार दिया है। 10 सितंबर को भोपाल में मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक है। बाकी मुद्दों पर उसमें चर्चा के बाद ही कुछ कह सकूंगा।”साभार -भास्कर

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