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यह  ब्रिज भूपेन हजारिका के नाम से जाना जाएगा: मोदी

नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम के तिनसुकिया में देश के सबसे लंबे पुल का इनॉगरेशन किया। इस पुल से असम और अरुणाचल प्रदेश की दूरी 165 किमी कम हो जाएगी। मोदी ने कहा, “पुल ने 5 दशक का इंतजार खत्म किया। इस ब्रिज को भूपेन हजारिका पुल के नाम से जाना जाएगा।” पुल की चीन बॉर्डर से हवाई दूरी 100 किमी है। बता दें कि मोदी सरकार ने 26 मई को तीन साल पूरे कर लिए। सरकार ने 26 मई से लेकर 15 जून तक देशभर के 900 शहरों में ‘मोदीफेस्ट’ मनाने का फैसला किया है। मोदी खुद इस फेस्ट की शुरुआत गुवाहाटी में करेंगे। यहां वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

अटलजी की सरकार दोबारा आती तो ये 10 साल पहले ही मिल जाता…

– मोदी ने कहा, “आज सालों से जिसका इंतजार था, उस पुल का उद्घाटन हो गया। आज उस स्थान पर आने का मौका मिला जो कभी कुंडिल नगर के नाम से जाना जाता था। यहां से श्रीकृष्ण का नाता रहा है।मैं भी उसी द्वारिका से आता हूं।”

– “5 दशक से इस ब्रिज का इंतजार हो रहा था। अगर अटलजी की सरकार दोबारा केंद्र में आती तो ये 10 साल पहले आपको मिल जाता। अटलजी ने इसके काम को गंभीरता से लिया था। लेकिन बीच में सरकार बदल गई। इसी के चलते आपका सपना अटका रहा। लेकिन पिछले तीन साल में अटलजी के सपने को पूरा करने के लिए काम किया।”

– “आज असम सरकार का एक साल पूरा हो रहा है। इस मौके पर ये गर्व की बात है कि आपको ये ब्रिज समर्पित हो रहा है। विकास के इंफ्रास्ट्रक्टर का महत्व है। अगर हम इस पर ध्यान नहीं देंगे तो ये संभव नहीं है। सरकार चाहती है कि विकास को स्थाई बनाया जाए। देश के सपने को पूरा किया जाए।”
– “आज असम और अरुणाचल के बीच की दूरी 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। करीब डेढ़ घंटे का समय बचेगा। अदरक की पैदावार करने वाले किसानों के लिए एक नया रास्ता खुल जाएगा। किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जा सकता है।”

असम-अरुणाचल के बीच के सफर में 5 घंटे की कमी आएगी

– ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर बना 9.15 किमी लंबा यह पुल एशिया का दूसरा सबसे लंबा पुल है। यह असम में तिनसुकिया जिले के ढोला और सदिया को जोड़ता है। इससे दोनों राज्यों में आवाजाही के वक्त में 5 घंटे की कमी आएगी।
– पुल के जरिए सदिया से ढोला कस्बे तक 60 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। पहले ये सफर 6 घंटे का होता था। पुल की लागत 2056 करोड़ है।
– यह मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक से 3.55 किमी लंबा है। यह पुल देश की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए रणनीतिक रूप से भी अहमियत रखता है।
– इनॉगरेशन में असम के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित, सीएम सर्बानंद सोनोवाल और ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर गडकरी भी  मौजूद रहे।

– “पूरे नॉर्थ-ईस्ट को हिन्दुस्तान के हर कोने से जोड़ने के लिए सरकार काम कर रही है। इस क्षेत्र में अगर इन्फ्रास्ट्रक्टर डेवलप हो तो भारत का ये इलाका पूरा साउथ-ईस्ट एशिया में इकोनॉमी का हब बन सकता है।”
– “हमने नॉर्थ-ईस्ट में रेल लाइनें बिछाने के लिए महत्व दिया। ये इलाका टूरिज्म का केंद्र बन सकता है।”
– “इस ब्रिज को हम मशहूर गायक भूपेन हजारिका के नाम से जानेंगे। ये उन्हें हमारी श्रद्धांजलि है। वो ब्रह्मपुत्र के सपूत थे, वो इसी के लिए जिए थे।”

क्यों अहम है पुल?
– पुल असम की राजधानी दिसपुर से 540 किमी और अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से 300 किमी दूर है। चीन के बॉर्डर से पुल का एरियल डिस्टेंस महज 100 किमी है।
– यह पुल नॉर्थ-ईस्ट के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को देश के अन्य हिस्सों से जुड़ने के लिए सड़क की सुविधा मुहैया कराएगा। अभी तक इन लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था।

– पुल पर 60 टन के लड़ाकू टैंक उतारे जा सकते हैं। चीन बॉर्डर पर फोर्सेस को पहुंचने में आसानी होगी।
– 2011 में पुल बनना शुरू हुआ था। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में बनाया गया है।
– इससे असम-अरुणाचल में टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके पैदा होंगे।

मोदी ने असम को क्यों चुना?

– असम में दोहरा जश्न मनाया जा रहा है। यहां सर्बानंद सोनोवाल की लीडरशिप वाली बीजेपी सरकार एक साल पूरे करने जा रही है। माना जा रहा है कि इसी वजह से मोदी ने अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने पर जश्न के लिए इस स्टेट को चुना है।18 मई 2016 को असम असेंबली के रिजल्ट आए थे। बीजेपी ने पहली राज्य में जीत दर्ज की थी। यहां 15 साल से राज कर रही कांग्रेस सरकार को बाहर कर दिया था।

 

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