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Father’s Day Special: मिलिए इस बेटी से जिसने पिता की देखभाल के लिए छोड़ दी मल्‍टीनेशनल की नौकरी

‘मेरी पहचान आप से पापा, क्या कहूं, आप मेरे लिए क्या हो, रहने को है पैरों के नीचे ये जमीं, पर मेरे लिए तो मेरा आसमान आप हो पापा, ये पंक्तियां गोरखपुर की बिटिया शिखा पर सटीक बैठती है। एक तरफ जहां लोग नौकरी पाने के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं वहीं पिता के लिए बेटी शिखा ने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी। अब पिता के साथ ही है।

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मोहद्दीपुर की रहने वाली शिखा श्रीवास्तव को जब पता चला कि उसके पिता अश्वनी श्रीवास्तव किडनी रोग की चपेट में आ गए हैं तो उसने बिना वक्त गंवाए लखनऊ में स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ दी और वापस गोरखपुर अपने पिता के पास चली आई। शिखा के नौकरी छोड़ने पर पिता ने काफी समझाया कि वह अपनी नौकरी करे यहां वह सबकुछ संभाल लेंगे। लाख समझाने के बाद भी शिखा ने पिता की नहीं मानी और बोली.पापा आप ठीक हो जाओ, मुझे दोबारा और अच्छी नौकरी मिल जाएगी। आखिरकार पिता अश्वनी श्रीवास्तव बातों और तर्कों में अपनी बेटी से हार गए और फिर उसे दोबारा जाने के लिए नहीं कहा। शिखा बीते एक साल से अपने पिता की नियमित रूप से हर दो से तीन दिन पर डायलिसिस कराने ले जाती है और दवा व खान-पान का पूरा ख्याल भी वही रखती है।

ऐसी बेटी सबको मिले
कोषागार कार्यालय में बतौर ट्रेजरी अफसर पद पर तैनात अश्वनी श्रीवास्तव बताते हैं कि उनकी बेटी उनके साथ साए की तरह रहती है। अकेला छोड़ती ही नहीं है। मैं डायलिसिस की डेट भूल जाता हूं लेकिन बेटी याद रहती है। बेटी के अपनत्व से मन से बहुत ही स्वस्थ हूं।

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बीटेक और एमबीए की पढ़ाई के बाद लखनऊ में कर रही थी नौकरी 
लखनऊ की एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर एक्क्यूटिव ज्वाइन किया था। एक साल नौकरी को बीता ही था कि पिता की बीमारी के बारे में पता चला। बिना वक्त गंवाए शिखा ने नौकरी छोड़ी और पिता के सेवा के लिए गोरखपुर आ गई। कहती है कि पिता के ऊपर कोई एहसान नहीं, यह हर बेटी का फर्ज है।



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