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‘बेदी बाण’ रहे निष्प्राण ….

चुनाव से ऐन पहले किरण बेदी भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने किरण बेदी को दिल्ली चुनाव में भाजपा उम्मीदवार व सीएम्प्रोजेक्ट किया। अब यह तो 10 फरवरी को ही पता चल पाएगा कि भाजपा का यह ‘बेदी बाण’कितना प्रभावी रहा या निष्प्राण रहा बेदी बाण भाजपा को इस रणक्षेत्र में विजय दिला सकता है या नहीं इसका सभी को इंतज़ार है किरण बेदी की पांच कमियां जिसे लोग नज़रंदाज़ नहीं कर सके –
1. राजनीतिक अनुभव की कमी : किरण बेदी भले ही प्रशासनिक सेवा में रह चुकी हों, लेकिन राजनीतिक के मैदान में वे पहली बार उतरी हैं। लोकपाल में अन्ना आंदोलन में उन्होंने लोकपाल के लिए आंदोलन किया था, लेकिन आंदोलन और राजनीति दोनों में अंतर है। दिल्ली में भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं से सामंजस्य बैठाना भी उनके लिए चुनौती होगा।

2. सख्त छवि : किरण बेदी की छवि एक सख्त पुलिस अधिकारी की रही है। पुलिस में रहते हुए उन्होंने सख्ती से अपने कार्य को किया है। दिल्ली चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने के बाद उनकी सख्त छवि को लेकर सरकारी अधिका‍री-कर्मचारियों में कहीं न कहीं डर है। किरण बेदी के बारे में कहा जा रहा है कि इनका रवैया तानाशाह है। इनका दावा है कि पुलिस सेवा में रहते हुए इनका कार्यकाल बहुत अच्छा था, लेकिन जानकारों का मानना है कि पुलिस सेवा के अधिकारियों को समय-समय पर अनिवार्य रूप से मिलने वाले पदक भी इन्हें नहीं मिले हैं। इस तरह से सेवाकाल के क्रमश: 21 और 15 वर्ष पूरे होने पर बेदी को दो पुलिस पदक मिलने चाहिए थे लेकिन उन्हें यह पदक नहीं मिल सके, क्योंकि अपना कोई भी उत्तरदायित्व समय पर पूरा नहीं किया।

3. बेबाक बयानबाजी : भाजपा में आने से पहले किरण बेदी ने गुजरात दंगों को लेकर नरेन्द्र मोदी पर सोशल मीडिया पर खूब निशाना साधा और बयानबाजी की। अन्ना आंदोलन के दौरान उन्होंने मंच से राजनेताओं को लेकर बयान दिए, उन पर मजाक किए, लेकिन अब मोदी के साथ मंच पर नजर आती हैं। दिल्ली चुनाव में प्रचार के दौरान भी बेदी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहीं।

4. अवसरवादी : अन्ना आंदोलन के दौरान बेदी राजनीति में नहीं आने के लिए मना किया था, लेकिन दिल्ली चुनाव के ठीक पहले उन्होंने आंदोलन के दौरान साथी रहे केजरीवाल की पार्टी में शामिल न होकर भाजपा का दामन थाम लिया। राजनीतिक विश्लेषकों को कहना है कि वे भाजपा में इस शर्त पर शामिल हुईं कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए।

5. निरंकुश : किरण बेदी ने अपने पुलिस कार्यकाल के दौरान 30 हजारी के वकीलों पर लाठीचार्ज किया था और इसे लेकर ‍वकीलों में किरण बेदी को लेकर गुस्सा भी हैं और दिल्ली चुनाव में वकील उनके खिलाफ भी हैं। बेदी के बारे में कहा जाता है दिल्ली में उनका निरंकुश रवैया उन पर भारी पड़ सकता है।

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