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विचार

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी  !

 मिथलेश दिवेदी/भोला नाथ मिश्रा ………………………………………..   सोनभद्र । ‘ नारी  सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रयास त्रेतायुग से लेकर वर्तमान इक्वींस्वी शताब्दी  तक बखूबी  हो रहे है लेकिन लॉक-डाउन पार्ट टू  अवधि के दौरान जिले में जो कुछ भी छन कर आ रहा है उससे  तो यहीं कहा जा सकता है …

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दोहरे संकट की मार झेलते पत्रकार

  कोरोना की जंग में योद्धाओं की भूमिका में डॉक्टर, पुलिस,स्वास्थ्य कर्मचारी और सफाई कर्मचारी तो गिने जा रहें हैं लेकिन इन्ही के बीच पत्रकारों की बड़ी फौज भी अपनी जान जोखिम में डाल रिपोर्टिंग करते हुए कोरोना की जंग में शामिल है जो आम लोगों के बीच खबरें पहुंचा …

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सच्चे धर्म से रूबरू कराते मानवताधर्मी योद्धा     

कोरोना वायरस की महामारी से पूरा विश्व हलकान है ज्यादातर देशों में धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया है इस आधुनिक युग में वे देश जो संसाधन सम्पन्न माने जाते थे वे भी कोरोना के डंक से कराहते नज़र आ रहें हैं किन्तु जिन्दगी की इस जंग में सच्चे …

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*कोरोना आयातित है या प्रायोजित…….?

आलेख -गौतम राणे सागर कोरोना वायरस आया नहीं लाया गया है यह बात बेवजह नहीं बल्कि कुछ सबूतों की रोशनी में प्रस्तुत है । यहां कुछ विचारणीय प्रश्न है जिस पर सुराग रसी की जानी आवश्यक है ।   पूरी पोस्ट पढ़िए और खुद फैसला कीजिए कि मेरा मत उचित …

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उठाने होंगे कारगर कदम……..

केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते कठिन दौर से गुजर रहा है, इस विषम संकट के दौर में एक छोटी भूल या गलती भयावह स्थित को जन्म दे सकती है भारत इस संकट की घड़ी में कोरोना वायरस से लड़ने में कितने विजन …

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कोरोना के डंक से सिसकती दुनियां

दुनिया के करीब १९९ देश कोरोना वायरस के जहरीले डंक से घायल सहमी और सिसकती जिन्दगी को बचाने की ज़द्दोजहद  में लगे हैं अब तक करीब छ: लाख लोग इसकी जद में आ चुके है और इस लेख को  लिखे जाने तक लगभग २७,३७० लोगो की जिदगी यह लील चुका …

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ईवीएम और अनसुलझे सवाल…?

      लेख – गौतम राणे सागर  लोकतंत्र दो धुरियों पर टिका है पहला स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव दूसरा सजग और जीवंत विपक्ष , पप्पू  विपक्ष पर चर्चा करना  समय की बर्बादी है !  फेकू के अधीन आज  जिस स्थिति में लोकतंत्र है ,चुनावी प्रक्रिया है निश्चित तौर पर …

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कड़क शासन सुरक्षित देश, संरक्षित देशवासी

        द्वारा – गौतम राणे सागर  वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां 1975 के स्थिति से भी भयानक,बदतर व नियंत्रणहीन है । देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा है यदि ये कहा जाए कि लोकतंत्र के चारो  स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस पूर्णरूपेण सरकार के नियंत्रण में है …

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सेना की जरूरतों पर ध्यान देने का वक्त

भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनातनी का माहौल है। यह अफसोस की बात है कि जब-जब  पाकिस्तान को लगता है कि अमेरिका का हाथ उसके सिर पर है, वह उन्माद से भर जाता है। डोनाल्ड ट्रंप ने जब अमेरिका का कार्यभार संभाला था, तो उन्होंने पाकिस्तान को …

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नहीं है नोटबंदी से जुड़ी मौतों पर कोई सूचना-पीएमओ

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय सूचना आयोग को बताया है कि उसके पास नोट्बंदी के बाद हुई मौतों के बारे में कोई सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवम्बर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी। पी एम् ओ  मुख्य जनसूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने केंद्रीय सूचना आयोग …

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