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फर्जी सर्टिफिकेट से प्रिंसिपल बनी ‘अनामिका से होगी वसूली

यूपी में शिक्षा विभाग में अनामिका शुक्ला मामले के खुलासे के बाद एक-एक करके फर्जी टीचर निकल रहे हैं। अब मेरठ में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर एक महिला स्कूल की प्रिंसिपल तक बन गई।महिला का नाम प्रियंका शर्मा बताया जा रहा है। पीएवी गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल मोरीपाडा में वह प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत थीं। आरोप है कि प्रियंका ने फर्जी तरीके से जिला विद्यालय निरीक्षक सहारनपुर के हस्ताक्षर का अनुभव प्रमाण पत्र बनवा लिया। इस आधार पर 2016 में उन्हें नौकरी मिल गई।

पिछले 4 साल से प्रियंका शर्मा फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रधानाध्यापिका की नौकरी कर रही थीं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मेरठ ने अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से प्रियंका शर्मा की नियुक्ति केा समाप्त कर दिया है। प्रियंका की नियुक्ति 23 जुलाई 2016 को शून्य कर दी गई है।प्रियंका शर्मा पुत्री विजेन्द्र शर्मा निवासी मालीवाड़ा का चयन पीएवी गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल मोरीपाड़ा की चयन समिति के जरिए 23 जुलाई 2016 को हुआ था। इसके बाद प्रियंका शर्मा ने विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। नियुक्ति के समय प्रियंका की शैक्षिक योग्यता बीए, बीएड, यूपी टैट, जूनियर स्तर और प्राइमरी स्तर की थी। प्रधानाध्यापिका के पद के लिए योग्यता की अनिवार्यता के आधार पर केवी हायर सेंकेंड्री स्कूल हयात कॉलोनी सहारनपुर का अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न किया गया था।अनुभव प्रमाण पत्र में जिला विद्यालय निरीक्षक सहारनपुर से भी प्रतिहस्ताक्षर दिखाया गया था। शास्त्रीनगर निवासी गिरीश चंद्र गुप्ता ने सूचना के अधिकार के तहत प्रियंका शर्मा के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक सहारनपुर से जारी किए गए अनुभव प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी मांगी। जिसमें डीआईओएस कार्यालय सहारनपुर ने जानकारी उपलब्ध कराई कि प्रियंका शर्मा का अनुभव प्रमाण पत्र कार्यालय से प्रतिहस्ताक्षरित नहीं किया गया है। इसके आधार पर गिरीश चंद्र गुप्ता ने अपर आयुक्त मेरठ मंडल मेरठ को प्रियंका शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और एडीएम प्रशासन ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी। खंड शिक्षा अधिकारी चरन सिंह और सूर्य कांत गिरी खंड शिक्षा अधिकारी जांच अधिकारी नियुक्त किए गए। दोनों जांच अधिकारियों ने अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी पाया और उसकी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी। जिसके आधार पर प्रियंका शर्मा की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

होगी चार साल के वेतन की वसूली
बीएसए सतेंन्द्र कुमार ने बताया कि फर्जी तरीके से अनुभव प्रमाण पत्र बनवाकर प्रधानाध्यापिका के पद पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। जांच के बाद अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है। जिसके बाद प्रधानाध्यापिका प्रियंका शर्मा की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया है। प्रियंका शर्मा से 2016 से अब तक की वेतन वसूली की जाएगी। इसके साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही चल रही है।

बीएसए सतेंद्र कुमार नियुक्ति निरस्त करने की बात कर रहे हैं। लेकिन क्या प्रियंका के खिलाफ धोखाधड़ी से सरकारी नौकरी हासिल करने का केस भी दर्ज कराया जाएगा। अगर केस दर्ज हुआ तो आरोपी प्रियंका शर्मा का जेल जाना निश्चित है।

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