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जानिए गूगल की वो सर्विसेज, जिसके लिए आप को चार्ज देना पड़ेगा

जानिए गूगल की वो सर्विसेज, जिसके लिए आप को चार्ज देना पड़ेगा

आज गूगल दुनिया भर में न केवल सर्वाधिक पॉपुलर, बल्कि बेहद उपयोगी सर्च इंजन भी है। इसके बिना आज के तकनीकी युग की कल्पना करना काफी कठिन है। ख़ास बात यह है कि यह फ्री है, मतलब सर्च करने के लिए डायरेक्टली गूगल को कुछ पैसा नहीं देना पड़ता है।
गूगल सर्च ही की भांति, गूगल की तमाम दूसरी सर्विसेज फ्री थीं, किंतु 1 जून 2021 से इसकी कई सर्विसेज चार्जेबल हो गई हैं, जिसमें गूगल फोटोज का पहला नाम है। इस संबंध में 1 जून 2021 से मुफ्त क्लाउड सर्विस बंद करने की बात कही गई और अगर एक्स्ट्रा स्टोरेज चाहिए, तो इसके लिए यूजर्स को अलग पैसे देने होंगे। मतलब कंपनी फ्री सर्विस की बजाय यहां पर सब्सक्रिप्शन मॉडल पर भरोसा कर रही है, और अगर किसी को गूगल फोटो यूज़ करना है, तो अब यह गूगल वन के नाम से मौजूद रहेगा।

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बता दें कि बीते 1 जून 2021 से यूजर्स मात्र 15 जीबी क्लाउड स्टोरेज ही फ्री एक्सेस कर पाएंगे, और उससे अधिक स्टोरेज अगर आपको चाहिए, तो 1.99 डॉलर, मतलब तकरीबन डेढ़ सौ रूपये आपको गूगल को देने पड़ेंगे। वहीं एनुअल सब्सक्रिप्शन के लिए तकरीबन 20 डालर यानी पंद्रह सौ रूपये के आसपास गूगल को देने होंगे। 
हालाँकि, आपको बता दें कि अगर पहले से आपके फोटो, वीडियो पड़े हैं, तो उससे गूगल कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा, बल्कि वह सुरक्षित रहेगा। यह नियम सिर्फ नए यूजर्स के लिए है।
इसी प्रकार से दूसरी यूट्यूब सर्विसेज भी हैं, जो यूं तो पूरी तरह से फ्री हैं, किंतु अगर आप यूट्यूब पर हैं, और आप इससे कमाई करते हैं तो 1 जून के बाद आप की कमाई पर टैक्स लगेगा।
केवल अमेरिका में रहने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि भारत के साथ साथ दुनिया भर के तमाम कंटेंट क्रिएटर यूट्यूब से होने वाली कमाई पर टैक्स देंगे। नई गूगल पालिसी के मुताबिक तकरीबन 24 फ़ीसदी टैक्स, यूट्यूब से होने वाली कमाई पर किसी यूजर को देना पड़ेगा। गूगल के इस निर्णय का यूट्यूबर्स ने कड़ा विरोध किया है। हालांकि यह निर्णय लागू हो चुका है, और अगर आपका चैनल मोनेटाइज है, तो उस मॉनिटाईज चैनल में ऊपर की ओर यह नोटिफिकेशन आप जरूर देख पाएंगे।

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वास्तव में गूगल को कई देशों में एकाधिकार की लड़ाई का सामना करना पड़ा है, और जिस प्रकार से तकनीकी क्षेत्र में उसकी मोनोपोली है, उसके बनाए गए नियमों को मानना यूजर्स की एक तरफ से विवशता भी है।
वैसे देखा जाए तो अगर आप बेहतरीन सर्विस ले रहे हैं, तो आपको पे करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हालाँकि विकसित देशों में ऐसा लोग करते भी हैं, किन्तु विकासशील देशों में अभी लोगों को सपोर्ट किए जाने की आवश्यकता है। बजाय कि कंपनियों के प्रॉफिटेबल बनाने के, दुनिया भर के तमाम यूट्यूबर इस बात को लेकर आश्चर्य में हैं कि आखिर क्यों अमेरिका के कंटेंट क्रिएटर्स को टैक्स नहीं देना पड़ेगा, जबकि बाहर के लोगों को 24 फ़ीसदी जैसा बड़ा टैक्स गूगल को देना पड़ेगा?
– मिथिलेश कुमार सिंह

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