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Tuesday 20 November 2018
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धूर्त है पर हिट है

धूर्त है पर हिट है

BY: हरि शंकर व्यास

अरविंद केजरीवाल वह बला हैं जिससे कांग्रेस और भाजपा न पार पा सकते हैं और न पीछा छुड़ा सकते हंै। अरविंद केजरीवाल को भले कोई काईंया कहें, धूर्त माने या तानाशाह या गैर-जिम्मेदारना बताए मगर जनता की नब्ज को समझने वाला उन जैसा नेता आज दूसरा नहीं है। कांग्रेस यों भी मरी हुई है उसे और मारना बड़ी बात नहीं है मगर 56 इंच चौड़ी छाती वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताई जाने वाली भाजपा से सीधे और बेशर्मी के साथ अरविंद केजरीवाल का भिड़ना अकल्पनीय है। वे यदि ऐसा कर रहे है तो उसके पीछे जूनुन है, जिद्द है और सुविचारित रणनीति है। ध्यान करें शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु की सभा में इटली की अदालत, इटली में रिश्तेदार और रिश्वत की जांच कराने के संकल्प के साथ सोनिया गांधी पर शक की सुई को बारीकि से मोड़ा था। जिसने वह टीवी फुटैज देखी, फुरफुरी हुई कि प्रधानमंत्री ने कैसे तेंवर दिखाए। मगर अगले दिन अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में आप की जो रैली कराई और सोनिया गांधी को गिरफ्तार नहीं किए जाने का सवाल उठाते हुए नरेंद्र मोदी को जैसे ललकारा उसका देशव्यापी मनौवेज्ञानिक असर क्या नहीं हुआ होगा? डा सुब्रहमण्यम स्वामी, अमित शाह, नरेंद्र मोदी, मनोहर पर्रिकर से ले कर भाजपा के तमाम प्रवक्ताओं, नेताओं का कांग्रेस पर बोला हल्ला केजरीवाल ने एक झटके में हाईजेक कर लिया।

हां, जनमानस के दिमाग के तंतुओं को अरविंद केजरीवाल ने अपनी सीधी, सपाट भाषा में जैसे झिंझोड़ा है या झिंझोड़ रहे हैं उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अरविंद केजरीवाल समभाव नरेंद्र मोदी और सोनिया गांधी पर जैसे हमले कर रहे हंै वह उस जनता को टारगेट किए हुए है जो सोनिया गांधी से भी चिढ़ती है और नरेंद्र मोदी से भी! यह भी ध्यान रहे कि शनिवार की आप रैली की जितनी फुटेज देखने को मिली उसमें नारे भारत माता की जय और वंदे मातरम के सुनाई दिए थे।

आज फिर अरविंद केजरीवाल ने यह हल्ला बोला है कि सोनिया गांधी के पास नरेंद्र मोदी के कई गुप्त राज है इसलिए वे उन्हंे गिरफ्तार नहीं कर सकते। वे उनसे डरते हंै। यह केजरीवाल की शातिर, धूर्ततापूर्ण रणनीति है।
इस सबका अर्थ है। अरविंद केजरीवाल और उनकी आप पार्टी बुनियादी तौर पर उस मध्य वर्ग पर फोकस किए हुए है जिस पर मई 2014 में नरेंद्र मोदी का जादू सिर चढ़ बोला हुआ था। जो भ्रष्टाचार को ले कर खदबदाता है। जिसकी आकंक्षा मजबूत राष्ट्रवादी नेतृत्व की है। अरविंद केजरीवाल को कांग्रेस या लेफ्ट के वोट नहीं चाहिए। इस मामले में बहुत पहले ही प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को दूर करके केजरीवाल ने अपनी यह समझ बता दी थी कि वे जनवादी राजनीति करेंगे लेकिन वामपंथी नहीं कहलाएंगे। तभी जेएनयू और कन्हैया के मामले में भी उन्होंने होशिय़ारी से अपने को दूर रखा। जेएनयू में लेफ्ट और कांग्रेस का हल्ला होने दिया।

गौरतलब है कि कांग्रेस जहां इधर-उधर के हल्ले कर रही है वही अरविंद केजरीवाल ने फोकस सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी पर किया हुआ है। सीबीआई का छापा हो या पाकिस्तान से जांच टीम आई हो, सबमें अरविंद केजरीवाल ने सीधे नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। वाराणसी में चुनाव लड़ने से ले कर अब तक जितने भी मामलों में अरविंद केजरीवाल ने राजनीति की है उसमें उन्होने सीधे नरेंद्र मोदी को मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की डिग्री का ताजा विवाद हो या आगस्ता हेलिकॉप्टर रिश्वत मामले में सोनिया गांधी पर नरेंद्र मोदी का हमला हो, सभी में केजरीवाल का हल्ला बोल यह मकसद लिए है कि लोग उन्हंे नरेंद्र मोदी के आगे लड़ता हुआ देखें। केजरीवाल स्थाई तौर पर नरेंद्र मोदी के सामने अपनी पोजिशनिंग चाह रहे हैं। अब इसकी जल्दबाजी इसलिए है क्योंकि आगस्ता और पार्टी नेताओं के भ्रष्टाचार के मामले में राहुल गांधी, सोनिया गांधी उलझे रहने है। कांग्रेस रक्षात्मक और अपने बचाव के मोड़ में रहेगी। सो नरेंद्र मोदी से लड़ने, उनके आगे अपने को विकल्प बनाने की धुन में अरविंद केजरीवाल कूदे है। तभी वे आने वाले दिनों में बहुत धमाल करेगें।

इस धमाल में आगस्ता कांड एक मामला है तो प्रधानमंत्री की बीए की डिग्री दूसरा मामला है। एक से कांग्रेस और दूसरे से प्रधानमंत्री को घेरेंगे। हांलाकि दोनों ही बातों में अरविंद केजरीवाल के पास फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है जिससे लोग उनके आरोपों को तथ्यात्मक माने। मगर यही केजरीवाल की पुरानी शैली है। अन्ना हजारे के आंदोलन के वक्त और उसके बाद की राजनीति में भी केजरीवाल ने शीला दीक्षित से ले कर रिलायंस कंपनी, नितिन गडकरी आदि कई मामलों में आरोप लगाए। हल्ला किया और आगे बढ़े।

मौटे तौर पर अरविंद केजरीवाल ने आज अपनी राजनीति के दो धरातल बनाए हुए है। एक धरातल आम आदमी याकि गरीब मतदाताओं का है। उनके लिए बिजली, पानी की रियायतों से दिल्ली में अपनी फसल बनाई है तो दूसरी और मध्यवर्ग का वह अखिल भारतीय धरातल है जिसमें उन्होने दिल्ली की ओड-इवन योजना का भी धुआंधार प्रचार करवाया। अपनी जुबानी बार-बार बोलते हुए धारणा बनवाई कि दुनिया में दिल्ली की चर्चा है कि दिल्ली बदल रही है! बार-बार लगातार एक बात को दोहराते हुए केजरीवाल अब उससे भी आगे अखिल भारतीय तलवारबाजी का शो कर रहे हंै। उन्होने भ्रष्टाचार का मुद्दा पकड़ा है। भाजपा और कांग्रेस की तलवारें क्योंकि म्यान से बाहर निकली है तो वे भी इससे आगे के सिनेरियों को समझते हुए दो भारत केसरी पार्टियों के बीच तीसरे भारत केसरी बनने की धुन में तलवार ले कर कूद पड़े है। उनकी तलवारबाजी मामूली नहीं होगी।

 



A group of people who Fight Against Corruption.