Search
Thursday 15 November 2018
  • :
  • :
Latest Update

महिला एवं बाल अपराधों पर त्वरित एक्शन जरूरी-अमिताभ यश

महिला एवं  बाल अपराधों पर त्वरित एक्शन जरूरी-अमिताभ यश

प्रदेश की महत्वपूर्ण जांच एजेन्सी स्पेशल टास्क फोर्स (एस0टी0एफ0) में एस0एस0पी0 के तौर पर अपनी टीम के साथ पब्लिक के लिए कई जि़लो में दहशत का पर्याय बने चित्रकूट, बांदा के दुर्दान्त अपराधी ददुआ और ठोकिया के गिरोहों का सफाया करने वाले गोरखपुर ज़ोन के आई0जी0 श्री अमिताभ यश से उनकी कार्यप्रणाली के बारे में हमारे सब-एडीटर एवं राष्ट्रीय निशानेबाज़ मुकीम सिद्दीकी ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंशः-
आप पुलिस विभाग में किस बैच में आए और गोरखपुर आने के पहले किन-किन जनपदों में कौन-कौन से पदों पर रहे है और मूलतः कहां के रहने वाले है?
मैं 1996 बैच का आई0पी0एस0 हूँ। एस0पी0 और एस0एस0पी0 के तौर पर मैं संतकबीरनगर, गोरखपुर, हरदोई, महराजगंज, बाराबंकी, जालौन, सहारनपुर, सीतापुर, बुलंहशहर, नोएडा आदि जनपदों में रहा हूँ। इसके अतिरिक्त डी0आई0जी0/एस0एस0पी0 के तौर पर मुरादाबाद और कानपुर तथा बांदा में डी0आई0जी0 के तौर पर कार्यनिवर्हन किया है उसके बाद से ही आई0जी0 ज़ोन गोरखपुर के तौर पर कार्यरत हूँ। मैं मूलतः भेाजपुर बिहार का रहने वाला हूँ।
 गोरखपुर एक अति संवेदनशील शहर माना जाता है। यहां अपराध नियन्त्रण हेतु आपके द्वारा क्या कदम उठाये जा रहे है?
यू0पी0 के लगभग 20 अतिसंवेदनशील जनपदों में गोरखपुर ज़ोन के 5 जनपद आते है जिनमें गोण्डा रेंज के 4 जनपद और गोरखपुर रेंज का एक जनपद स्वयं गोरखपुर है। जाति पर आधारित माफिया गिरोहों के टकराव के लिए भी गोरखपुर जाना जाता है। जातिगत अपराध भी यहां की सामाजिक समस्या है। इससे निपटने का मुख्य उपाय यहां का डेवेलपमेन्ट है। इसके अतिरिक्त छोटी घटनाओं पर त्वारित कार्यवाही के लिए सभी पुलिसकर्मियों को समय-समय पर निर्देश दिये जाते है। जिससे छोटी घटनाओं को बड़ा बनने का मौका न मिले।
 पुलिस की छवि को बेहतर बनाने के लिए क्या आपके पास कोई योजना है?
पुलिस की छवि को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहला स्टेप ये है कि पुलिस अपना बेसिक काम ठीक से करें। प्रकाश में आए हुए पुराने अपराधियों पर निगरानी रखी जाए। उनके जमानतदारों पर निगरानी रखी जाए। ़क्षेत्र के विवादों पर निगरानी रखने तथा अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से पब्लिक में पुलिस के प्रति अच्छा संदेश जाता है। इसके अतिरिक्त विशेषकर महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में भी त्वरित कार्यवाही से भी पुलिस की छवि लोगों की नज़र में और अच्छी होगी।
 गोरखपुर से सटे हुए दो बार्डर हैं, एक दूसरे प्रान्त बिहार का बार्डर तो दूसरा नेपाल राष्ट्र का बार्डर। नेपाल सीमा पर आंतकी घुसपैठ को रोकने के लिए उ0प्र0 पुलिस द्वारा क्या कदम उठाये जा रहे है?
कोई भी अन्र्तराष्ट्रीय सीमा एक चैलेंज होती है। नेपाल और भारत के क्लोज़ लिंक के कारण दोनों जगह पब्लिक की आवाजाही आसान है जिसका सबसे अधिक फायदा अपराधी उठाते हैं। इसके अतिरिक्त विदेशी इंटेलिजेंस एजेन्सियां भी इसका फायदा उठाती हैं। भारत की सभी एजेन्सियों और यहां की आस-पास की लोकल पुलिस को मिलकर इसका हल निकालना पड़ेगा। चूंकि लोकल पुलिस का रोल प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण होता है इसलिए अन्य एजेन्सियों के साथ लोकल पुलिस को भी अधिक सक्रिय रहना होगा जिसके लिए समय-समय पर उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में निर्देश दिये जाते हैं।
 गोरखपुर में क्राइम ब्रांच के अलावा कौन-कौन सी यूनिट अपराध नियन्त्रण में लगी हुई है?
गोरखपुर में अपराध नियन्त्रण हेतु कई यूनिट कार्य करती है जैसे क्राइम ब्रांच, एंटी टेररिस्ट सेल (ए0टी0एस0) और स्पेशल टास्क फोर्स (एस0टी0एस0) आदि।
 एक सामान्य व्यक्ति के मन में पुलिस के प्रति तमाम तरह की शंकाये रहती है जिससे वह चाहकर भी पुलिस के निकट नहीं जाता। इस सम्बन्ध में आपकी कोई रणनीति है?
पुलिस यदि सही काम करती है तो स्वयं ही लोगों से जुड़ जाती है। पब्लिक और पुलिस में आपस में सांमजस्य होना चाहिए। पब्लिक और पुलिस में अच्छा इंटरैक्शन थाने और चौकी स्तर से ही होना चाहिए।
 राजनीतिक दबाव भी पुलिस की कार्यप्रणाली में खलल डालते है। क्या आप पर भी कभी किसी अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति को छोड़ देने जैसा कोई राजनीतिक दबाव पड़ा है?
राजनीति, पुलिस, प्रशासन सभी समाज के हिस्से हैं। पर पुलिस किसी दबाव में आकर अपना काम नहीं करती।
 आपके सर्विस ज्वाइन करने से अब तक ऐसा कोई कार्य जो विशेष रहा हो जिसे उपलब्धि में गिना जा सकें?
कोई भी गुडवर्क टीम भावना से ही संभव है। जब मैं बुदेलखण्ड में था, तो मेरे अधिनस्थ काम करने वाली टीमों ने लगभग 18 गैंग का सफाया किया था। और फिरौती हेतु अपहरण करने वाले लगभग 100 से ज्य़ादा अपराधियों को मेरे साथ काम करने वाली टीमों ने मार गिराया था। मेरे बतौर एस0टी0एफ0, एस0एस0पी0 के सवा दो साल के कार्यकाल में 65 से ज्य़ादा अपराधियों का सफाया किया गया था। 21 जुलाई 2007 को चित्रकुट, बांदा में दहशत का पर्याय बने ददुआ का एनकांउन्टर, 4 अगस्त 2007 को चित्रकुट में ही ठोकिया का सफाया और 19 मार्च 2008 को फतेहपुर में उमर केवट को मार गिराया गया था। उस बीच कुछ ऐसे भी विशेष कार्य थे जो पब्लिक में डिस्कस नहीं किया जा सकता। मैं ये दोबारा कहना चाहूँगा कि इन सभी गुडवर्क मैं सिर्फ मेरा नहीं बल्कि मेरे उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन के साथ ही मेरे अधीनस्थ कार्य करने वाली टीमों का भी अहम रोल रहा हैं।



A group of people who Fight Against Corruption.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *