Search
Tuesday 18 September 2018
  • :
  • :
Latest Update

अटकलों से इतर होगा बीजेपी का मुख्यमंत्री 

अटकलों से इतर होगा बीजेपी का मुख्यमंत्री 
वाराणसी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घडिय़ा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी संग्राम में उतरी सभी राजनीतिक सेनाओं के दिलों की धड़कन बढ़ती जा रही है। कांग्रेस सपा और बसपा की निगाहें फिलहाल भाजपा की ओर है। कांग्रेस ने शीला दीक्षित को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया है। सपा के सियासी संग्राम के बीच फिलहाल तो अखिलेश यादव ही आगामी चुनाव में सीएम का चेहरा होंगे। बसपा बॉस मायावती स्वयंभू सीएम पहले से ही घोषित हैं।
सर्वे में सबसे आगे पायदान पर खड़ी भाजपा को छोड़कर मुख्यमंत्री के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं लेकिन भाजपा की ओर से अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। घोषणा में देरी कहिए या बीजेपी के आला पदाधिकारियों की सोची समझी रणनीति कि बीजेपी मुख्यमंत्री का चेहरा अभी सामने नहीं ला रही है। भाजपा की संसदीय कमेटी की चुप्पी ने सांसद योगी समेत सीएम की लालसा लिए अन्य नेताओं को प्रचार-प्रसार का मौका दे रखा है। उत्तर प्रदेश में इस समय देखा जाए तो योगी समर्थक मुख्यमंत्री बनाने के लिए खासी मुहिम चला रखे हैं। दूसरे नंबर पर स्मृति ईरानी है। मुख्यमंत्री का चेहरा बनने के लिए कुछ समय पहले तक पोस्टरवार करने वाले वरुण गांधी और उनके समर्थक फिलहाल चुप्पी साधे हैं।
भाजपा द्वारा सीएम पद का प्रत्याशी घोषित न करने के पीछे पार्टी की अपनी रणनीति है। अंदरखाने की माने तो प्रदेश में जीत का परचम लहराने के लिए पार्टी की संसदीय कमेटी में मुख्यमंत्री का चयन होगा। इतना ही नहीं इस समय जिन नामों की बयार बह रही है, उनमें से कोई सीएम पद का उम्मीदवार नहीं होगा। योगी के नाम को लेकर पार्टी के भीतर पहले से ही घमासान है। योगी घोर कट्टरवादी हैं जबकि बीजेपी कट्टरता का चोला उतारकर उदारवादी पार्टी के रूप में सामने आने को बेताब है। योगी के समर्थकों की मुहिम और भविष्य में होने वाली बगावत को रोकने के लिए ही योगी के संसदीय क्षेत्र पर केंद्र सरकार का विशेष ध्यान है। एम्स देने के साथ ही कई ट्रेनें भी योगी के संसदीय क्षेत्र को सौगात के रूप में दे दी गई है।
स्मृति ईरानी फिलहाल विवादों में चल रही है और पार्टी नहीं चाहेगी कि यूपी की कमान ऐसी महिला के हाथों में हो जिसका नाता यूपी से नहीं है। साड़ी के भुगतान को लेकर आईएएस से टकराव समेत अन्य विवादों में स्मृति को लेकर अब शीर्ष नेतृत्व खास गंभीर नहीं है।
योगी और स्मृति ईरानी के साथ ही गांधी परिवार के वरुण गांधी के नाम की आंधी चली थी। इलाहाबाद में हुई केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान तो वरुण समर्थकों ने ऐसी मुहिम चलाई की शीर्ष नेतृत्व खफा हो गया और वरुण को चेतावनी दे दी गई। चेतावनी मिलने के बाद वरुण गांधी और उनके समर्थक शांत हो गए।
भाजपा के एक शीर्ष पदाधिकारी की माने तो बीजेपी अब हिंदुत्व के मुद्दे पर नहीं, विकास और देशभक्ति की राह पर आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश को विकास की जरूरत है। सिर्फ हिंदुत्व का एजेंडा लेकर चलने से भाजपा के साथ दलित व पिछड़े नहीं आएंगे लेकिन देशभक्ति का जज्बा ऐसा है जो जातियों का बंधन तोड़ सकता है। हिंदूत्व का एजेंडा लेकर चलने से पढ़ा लिखा वह युवा वर्ग जो रोजगार चाहता है, वह अपने क्षेत्र में शांति चाहता है, धर्म के नाम पर उन्माद पैदा करने वालों से अब युवा कटने लगे हैं। विकास और देशभक्ति की राह पर चलने में युवाओं को कोई परेशानी नहीं है। उरी हमले के बाद सोशल मीडिया पर जिस तरह से युवाओं ने पाक को सबक सिखाने के लिए मुहिम छेड़ी और जिस तरह सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया उसके बाद के जश्र से साफ है कि भारत देश बदल रहा है और यहां के युवा भी।
उत्तर प्रदेश में चुनाव में भाजपा का चेहरा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे क्योंकि वह सर्वमान्य हैं। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडऩवीस को चुनाव से पहले कौन जानता था, हरियाणा के सीएम खट्टर भी सिर्फ संगठन से जुड़े थे। जो लोग कह रहे हैं कि बिहार चुनाव में सीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने से हार मिली, वह गलत हैं। वहां दूसरे राजनीतिक समीकरण बने जिसके चलते बीजेपी को मात मिली। यूपी में जीत के बाद शीर्ष नेतृत्व प्रदेश को ऐसा मुख्यमंत्री देगा जो प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाए।


A group of people who Fight Against Corruption.